





























Hadeeth Cards
Da'wa cards that highlight great meanings from the noble prophetic hadiths in a simple style and attractive display that helps the Muslim to have a deeper understanding of his religion in an easy way
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अबू हुरैरा रज़ियल्लाहु अनहु का वर्णन है, वह कहते हैं कि अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फ़रमाया : "ईमान की सत्तर से कुछ अधिक अथवा साठ से कुछ अधिक शाखाएँ हैं। जिनमें सर्वश्रेष्ठ शाखा 'ला इलाहा इल्लल्लाह' कहना है। जबकि सबसे छोटी शाखा रास्ते से कष्टदायक वस्तु को हटाना है। हया भी ईमान की एक शाखा है।"
इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया हैअल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम बता रहे हैं कि ईमान की बहुत-सी शाखाएँ हैं, जिनमें से कुछ कार्य हैं, कुछ आस्थाएँ और कुछ कथन। जबकि ईमान की सबसे उत्तम एवं उत्कृष्ट शाखा ला इलाहा इल्लल्लाह कहना है, उसके अर्थ को जानते हुए और उसके तक़ाज़ों पर अमल करते हुए। यानी केवल अल्लाह ही एकमात्र इबादत के लायक़ है। उसके सिवा कोई इबादत के लायक़ नहीं है। जबकि ईमान का सबसे कम रुतबे वाला काम यह है कि रास्तों से लोगों को कष्ट देने वाली चीज़ों को हटाया जाए। फिर अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने बताया कि हया भी ईमान की एक शाखा है। याद रहे कि हया इन्सान का एक आचरण है, जो उसे अच्छा काम करने और बुरे काम से बचे रहने की प्रेरणा देता है।
अबू बशीर अंसारी रज़ियल्लाहु अनहु कहते हैं : एक यात्रा में वह अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के साथ थे। उनका कहना है कि जब लोग अपने सोने की जगहों में थे, तो आपने एक व्यक्ति को भेजा कि किसी ऊँट के गले में कोई ताँत अथवा अन्य कोई वस्तु बंधी मिले, तो उसे रहने न दिया जाए, बल्कि काट दिया जाए।
इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया हैअल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम एक यात्रा में थे और लोग अपने-अपने तंबुओं के अंदर सोने की जगहों में मौजूद थे। इसी दौरान आपने एक व्यक्ति को इस आदेश के साथ भेज दिया कि लोग अपने ऊँटों के गलों में बंधी हुई चीज़ों को काट दें, चाहे वो तांत आदि हों या घंटी तथा जूता आदि। क्योंकि वे यह चीज़ें अपने जानवरों को बुरी नज़र से बचाने के लिए बाँधा करते थे। इन चीज़ों को हटा देने का आदेश इसलिए दिया कि यह चीज़ें ऊँटों को किसी चीज़ से बचा नहीं सकतीं। लाभ तथा हानि केवल अल्लाह के हाथ में है। किसी और के हाथ में नहीं।
अब्दुल्लाह बिन उकैम -रज़ियल्लाहु अन्हु- का वर्णन है कि नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने फ़रमायाः "जिसने कोई वस्तु लटकाई, उसे उसी के हवाले कर दिया जाता है।"
इसे तिर्मिज़ी ने रिवायत किया है। - इसे अह़मद ने रिवायत किया है।जिसका दिल या कार्य अथवा दोनों किसी चीज़ से संबद्ध हो गए और वह उसी से लाभ की आशा तथा हानि से सुरक्षा की उम्मीद करने लगे, अल्लाह उसे उसी के हवाले कर देता है। चुनांचे जिसने अल्लाह से संपर्क स्थापित किया अल्लाह उसके लिए काफ़ी होता है और उसके हर कठिन कार्य को आसान कर देता है, तथा जिसने उसके सिवा किसी और से संपर्क जोड़ा, अल्लाह उसे उसी के हवाले करके अकेला छोड़ देता है, और अपमानित करता है।
तारिक़ बिन अशयम अशजई रज़ियल्लाहु अनहु का वर्णन है, वह कहते हैं कि मैंने अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम को कहते हुए सुना है : "जिसने 'ला इलाहा इल्लल्लाह' का इक़रार किया और अल्लाह के अतिरिक्त पूजी जाने वाली अन्य वस्तुओं का इनकार कर दिया, उसका धन तथा प्राण सुरक्षित हो जाएगा और उसका हिसाब अल्लाह के हवाले होगा।"
इसे मुस्लिम ने रिवायत किया हैअल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम बता रहे हैं कि जिसने अपनी ज़बान से कहा तथा गवाही दी कि अल्लाह के सिवा कोई सच्चा पूज्य नहीं है और अल्लाह के सिवा अन्य पूजी जाने वाली वस्तुओं का इनकार कर दिया तथा इस्लाम के अतिरिक्त अन्य सभी धर्मों से संबंध विच्छेद कर लिया, उसका धन तथा रक्त मुसलमानों पर हराम हो गया। हम केवल उसके ज़ाहिरी अमल को देखेंगे। अतः उसके धन को छीना तथा उसके रक्त को बहाया नहीं जा सकता। हाँ, अगर वह कोई ऐसा अपराध कर बैठता है, जिसकी वजह से इस्लामी दिशा-निर्देशों के अनुसार ऐसा किया जा सकता हो, तो बात अलग है। ऐसे में उसका हिसाब क़यामत के दिन अल्लाह लेगा। सच्चा होगा, तो सवाब देगा और झूठा होगा, तो अज़ाब देगा।
अब्दुल्लाह बिन अम्र रज़ियल्लाहु अनहुमा का वर्णन है कि अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फ़रमाया : "दया करने वालों पर दयावान अल्लाह दया करता है। तुम ज़मीन वालों पर दया करो, आकाश वाला तुमपर दया करेगा।"
इस ह़दीस़ को अबू दावूद, तिर्मिज़ी और अह़मद ने रिवायत किया हैअल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम बता रहे हैं कि जो लोग दूसरों पर दया करते हैं, उनपर दयावान अल्लाह दया करता है, जिसकी दया के दायरे के विस्तार में सारी चीज़ें आ जाती हैं। यह वास्तव में इन्सान के लिए उसके कर्म का पूरा-पूरा बदला है। फिर अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने इस धरती के ऊपर रहने वाली सभी चीज़ों, जैसे इन्सानों, जानवरों और पक्षियों आदि पर दया करने का आदेश दिया है। इसका फल यह सामने आएगा कि अल्लाह तुमपर आकाशों के ऊपर से दया करेगा।
अनस बिन मालिक रज़ियल्लाहु अनहु का वर्णन है कि अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फ़रमाया : “अल्लाह जहन्नमियों में सबसे हलका अज़ाब पाने वाले व्यक्ति से कहेगा : यदि धरती में मौजूद सारी चीज़ें तुम्हारी होतीं, तो क्या तुम इस अज़ाब से छुटकारा पाने के लिए वह सारी चीज़ें दे देते? वह आदमी कहेगा : हाँ! अल्लाह फ़रमाएगा : बेशक जब तुम आदम की पीठ में थे, तो मैंने तुझसे इससे आसान चीज़ की माँग की थी कि मेरा साझी न बनाना, परंतु तूने साझी बनाकर ही दम लिया।”
इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया हैअल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम बता रहे हैं कि अल्लाह एक ऐसे व्यक्ति से कहेगा, जो जहन्नम में प्रवेश करने के बाद सबसे निम्न यातना का सामना कर रहा होगा : अगर आज तेरे पास दुनिया और उसकी सारी दौलतें आ जाएँ, तो क्या इस यातना से जान छुड़ाने के लिए उन्हें देगा? वह उत्तर देगा : अवश्य दूँगा। यह उत्तर सुनने के बाद अल्लाह कहेगा : जब तुम आदम की पीठ में थे और तुमसे वचन लिया गया था, तो मैंने तुमसे इससे छोटी चीज़ माँगी थी। तुमसे बस इतना कहा था कि किसी को मेरा साझी न बनाना। लेकिन तुमने मेरी एक न सुनी। जब मैंने तुमको दुनिया में भेजा, तो तुम शिर्क के मार्ग पर चल पड़े।
आइशा रज़ियल्लाहु अनहा का वर्णन है, वह कहती हैं : कुछ लोगों ने अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम से काहिनों (ओझों) के बारे में पूछा तो आपने फ़रमाया : "इन लोगों की बातों में कोई सच्चाई नहीं होती।" लोगों ने कहा : ऐ अल्लाह के रसूल! यह लोग कभी-कभी ऐसी बात बताते हैं, जो सच हो जाया करती है। अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फ़रमाया : "यह सच्ची बात वह होती है, जिसे जिन्न उचक लेता है और उसे अपने इंसान दोस्त के कान में ऐसी आवाज़ में डाल देता है, जो मुर्गी के कुड़कुड़ाने जैसी होती है, फिर यह लोग उसके साथ अपनी तरफ से सौ से अधिक झूठ मिला देते हैं।"
इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया हैअल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम से ऐसे लोगों के बारे में पूछा गया, जो आने वाले समय से संबंधित ग़ैब की बातें बताया करते हैं, तो आपने कहा कि उनकी परवाह मत करो, उनकी बात न सुनो और उनपर ध्यान मत दो। यह सुन सहाबा ने कहा कि उनकी बातें कभी-कभी सही साबित हो भी जाती हैं। मसलन अगर उन्होंने बताया कि अमुक महीने की अमुक तारीख़ को कोई बात होगी, तो वह हो जाती है। इसपर अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फ़रमाया : दरअसल जिन्नात आकाश की जो थोड़ी-बहुत सूचनाएँ सुन लेते हैं, उनको वे आने वाले समय से संबंधित ग़ैब की बात बताने वाले दोस्त को बता देते हैं और फिर उसका यह दोस्त उसमें अपनी ओर से सौ झूठ मिला लेते हैं।
अनस बिन मालिक रज़ियल्लाहु अनहु का वर्णन है कि अल्लह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने, जबकि मुआज़ रज़ियल्लाहु अनहु सवारी पर आपके पीछे बैठे थे, फ़रमाया : "ऐ मुआज़ बिन जबल!" उन्होंने कहा : ऐ अल्लाह के रसूल! मैंं उपस्थित हूँ। आपने फिर कहा : "ऐ मुआज़ बिन जबल!" उन्होंने दोबारा कहा : ऐ अल्लाह के रसूल, मैं उपस्थि हूँ! आपने फिर कहा : "ऐ मुआज़ बिन जबल!" तो उन्होंने तीसरी बार कहा : ऐ अल्लाह के रसूल, मैं उपस्थित हूँ! तीसरी बार के बाद आपने फ़रमाया : "जिस बंदे ने सच्चे दिल से यह गवाही दी कि अल्लाह के सिवा कोई सत्य पूज्य नहीं है और मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम अल्लाह के बंदे तथा उसके रसूल हैं, अल्लाह उसे जहन्नम पर हराम कर देगा।" उन्होंने कहा : ऐ अल्लाह के रसूल! क्या मैं लोगों को आपकी यह बात बता न दूँ कि वे ख़ुश हो जाएँ? आपने फ़रमाया : "तब तो वे इसी पर भरोसा कर बैठेंगे।" चुनांचे मृत्यु के समय मुआज़ रज़ियल्लाहु अनहु ने गुनाह के भय से यह हदीस लोगों को बता दी।
इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया हैमुआज़ बिन जबल रज़ियल्लाहु अनहु अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के पीछे सवारी पर बैठे हुए थे कि आपने उनका नाम लेकर तीन बार कहा : ऐ मुआज़! आपके तीन बार संबोधित करने का उद्देश्य आगे कही जाने वाली बात के महत्व को दर्शाना था। हर बार मुआज़ रज़ियल्लाह अनहु ने उत्तर में कहा : "لبيك يا رسول الله وسعديك" ऐ अल्लाह के रसूल! मैं आपकी हर आवाज़ पर खड़ा हूँ और इसे अपने लिए गौरव समझता हूँ। चुनांचे अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने उनको बताया कि जिस व्यक्ति ने सच्चे दिल से इस बात की गवाही दी कि अल्लाह के सिवा कोई सत्य पूज्य नहीं है और मुमहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम अल्लाह के रसूल हैं तथा इसी हालत में मर गया, तो अल्लाह जहन्नम पर उसे हराम कर देगा। यह सुन मुआज़ रज़ियल्लाहु अनहु ने आपसे इस बात की अनुमति माँगी कि लोगों को यह बता दें, ताकि लोग खुश हो जाएँ। लेकिन आपको इस बात का भय हुआ कि कहीं लोग इसपर भरोसा न कर बैठें और अमल के क्षेत्र में सुस्त न पड़ जाएँ। इस लिए मुआज़ रज़ियल्लाहु अनहु ने यह हदीस किसी को नहीं सुनाई। परन्तु, मौत से पहले सुना गए, ताकि ज्ञान छुपाने के गुनाह का शिकार न होना पड़े।
अबू हुरैरा रज़ियल्लाहु अन्हु का वर्णन है कि अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फ़रमाया : "हमारा बरकत वाला तथा उच्च रब हर रात, जबकि रात का एक तिहाई भाग शेष रह जाता है, दुनिया से निकट वाले आसमान पर उतरकर फरमाता है : कौन है जो दुआ करे कि मैं उसे क़बूल करूँ; कौन है जो मुझसे माँगे कि मैं उसे प्रदान करूँ, कौन है जो मुझसे क्षमा माँगे कि मैं उसे क्षमा कर दूँॽ''
इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया हैअल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने बताया है कि हमारा उच्च एवं महान रब हर रात, जब रात का अंतिम तिहाई भाग शेष रह जाता है, तो दुनिया से निकटतम आकाश में उतरता है और अपने बंदों को दुआ करने की प्रेरणा देता है कि वह उसे पुकारने वाले की बात सुनता है, उन्हें अपनी-अपनी मुरादें माँगेने की प्रेरणा देता है कि वह माँगने वाले की झोली भर देता है और गुनाहों की क्षमा माँगने को कहता है कि वह अपने मोमिन बंदों को क्षमा कर देता है।