Hadeeth Cards
Da'wa cards that highlight great meanings from the noble prophetic hadiths in a simple style and attractive display that helps the Muslim to have a deeper understanding of his religion in an easy way






























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अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने इस बात से मना किया है कि कोई मुसलमान अपने भाई से तीन दिन से अधिक समय तक बातचीत बंद रखे। स्थिति यह हो कि दोनों एक-दूसरे में मिलें तो, लेकिन सलाम-कलाम कुछ न हो। इन दोनों लोगों में उत्तम व्यक्ति वह है, जो बात-चीत बंदी के इस निरंतरता को तोड़े और आगे बढ़कर सलाम करे। मालूम रहे कि यहाँ बात-चीत बंद रखने से मुराद निजी हितों के कारण बातचीत बंद रखना है। रही बात अल्लाह के हक़ के लिए बातचीत बंद रखने की, जैसे अवज्ञाकारियों, बिदअतियों और बुरे लोगों से बातचीत बंद रखने की, तो यह किसी समय सीमा के साथ बंधी हुई नहीं है। यह दरअसल बातचीत बंद रखने की मसलहत से संबंधित है।
अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने किसी मुसलमान को हानि पहुँचाने और उसे किसी भी तरह की कठिनाई में डालने से मना किया है। हानि तथा कठिनाई का संबंध उसकी जान से हो, धन से हो या परिवार से। आपने बताया है कि ऐसा करने वाले को अल्लाह उसी कोटि का प्रतिफल देगा, जिस कोटि का उसका कर्म है।
एक दिन रात के समय सहाबा अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के साथ थे। इसी बीच आपने चौदहवीं की रात को चाँद की ओर देखा और फ़रमाया : ईमाम वाले अपने रब को अपनी आँखों से देख सकेंगे और उनको उसे देखने में कोई परेशानी एवं कठिनाई नहीं होगी। फिर अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फ़रमाया : अगर तुम फ़ज्र एवं अस्र की नमाज़ से रोकने वाली चीज़ों को ख़त्म कर सको, तो उनको ख़त्म कर दो और इन दोनों नमाज़ों को समय पर संपूर्ण तरीक़े से पढ़ा करो, क्योंकि यह अल्लाह के चेहरे को देखने का सौभाग्य प्रदान करने वाली चीज़ों में से एक है। फिर आपने यह आयत पढ़ी : {وَسَبِّحْ بِحَمْدِ رَبِّكَ قَبْلَ طُلُوعِ الشَّمْسِ وَقَبْلَ الْغُرُوبِ} (तथा सूर्योदय से पहले और सूर्यास्त से पहले अपने रब की प्रशंसा के साथ पवित्रता बयान कर।)
अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम गुनाह तथा शिर्क एवं लोगों के अधिकारों के हनन के रूप में अत्याचार के मार्ग में आगे बढ़ते जाने से सावधान कर रहे हैं। क्योंकि अल्लाह अत्याचारी को मोहलत तथा ढील देता है और उसकी आयु तथा धन में वृद्धि करता जाता है। उसे फ़ौरन दंड नहीं दे देता। ऐसे में अगर वह तौबा नहीं करता, तो उसे पकड़ लेता है और छोड़ता नहीं है। क्योंकि उसके गुनाह बहुत ज़्यादा हो चुके होते हैं। फिर अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने यह आयत पढ़ी : {इसी प्रकार तुम्हारे रब की पकड़ होती है जब वह अत्याचरी बस्ती को पकड़ता है, और निश्चय ही उसकी पकड़ बहुत सख़्त व दुखद है।} [सूरा हूद : 102]
अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम अपने साथियों को यह कहकर भेजते थे कि तुम्हें जो भी प्रतिमा मिले, उसे नष्ट कर दो या मिटा दो। हदीस में "تمثالًا" शब्द आया है, जिसके मायने प्राण वाली वस्तु का चित्र है, चाहे वह आकार वाला हो या बिना आकार वाला। इसी तरह जो भी ऊँची क़ब्र मिले, उसे ज़मीन के बराबर कर दो और उसपर बने हुए भवन आदि को गिरा दो या फिर उसे इस तरह ज़मीन के बराबर कर दो कि ज़्यादा उठी हुई न हो। लगभग एक बित्ता ऊँची हो। उससे ज़्यादा नहीं।
अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने कुछ काम करने वाले अपनी उम्मत के कुछ लोगों को यह कहकर चेतावनी दी है कि वे हममें से नहीं हैं। ये काम कुछ इस प्रकार हैं: 1- ऐसा व्यक्ति जिसने अपशगुन लिया या जिसके लिए अपशगुन लिया गया। अरब के लोग कोई काम शुरू करते समय पक्षी को छोड़ते थे। पक्षी अगर दाएँ उड़ता, तो अच्छा शगुन लेते और जिस काम का इरादा होता, उसे करते। लेकिन अगर बाएँ उड़ता, तो बुरा शगुन लेते और जो काम करना चाहते, उसे छोड़ देते। यह काम न तो खुद करना जायज़ है और न किसी से करवाना जायज़ है। इसके अंदर किसी भी चीज़ से लिया जाने वाला हर अपशगुन दाख़िल है। चाहे उस चीज़ का संबंध सुनने से हो या देखने से हो, अथवा वह चीज़ चिड़िया हो, जानवर हो, विकलांग लोग हों, संख्या हों या दिन आदि हों, सभी अपशगुन अमान्य है। 2- ऐसा व्यक्ति जिसने खुद ओझा वाला कार्य किया या किसी से ओझा वाला कार्य करवाया। जिसने नक्षत्रों आदि का सहारा लेकर ग़ैब की बात जानने का दावा किया या फिर किसी ऐसे व्यक्ति के पास गया, जो ग़ैब की बात जानने का दावा करता हो और उसकी बात को सच भी माना, उसने मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम पर उतारी गई शिक्षाओं के प्रति अविश्वास व्यक्त किया। 3- ऐसा व्यक्ति जिसने किसी को लाभ पहुँचाने या किसी की हानि करने के उद्देश्य से जादू किया या जादू करवाया या नाजायज़ मंत्र आदि का उच्चारण करके धागा आदि पर गिरह लगाई तथा फूँक मारी।
अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ग़ैब की बात बताने वालों के पास जाने से सावधान कर रहे हैं। हदीस में आए हुए शब्द "العرّاف" के अंदर ओझा, ज्योतिषी और रेत पर रेखा खींचकर भविष्यवाणी करने वाले आदि सभी लोग शामिल हैं, जो कुछ भूमकिाओं के सहारे ग़ैब की बात जानने का दावा करते हैं। इन लोगों को ग़ैब की कोई बात पूछने मात्र से अल्लाह इन्सान को चालीस दिन की नमाज़ के प्रतिफल से वंचित कर देता है। यह दरअसल इस बड़े पाप की सज़ा है।
अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने बताया कि जिसने सितारों तथा नक्षत्रों का ज्ञान एवं उनकी गतियों, प्रवेश करने तथा निकलने के द्वारा धरती में भविष्य में घटने वाली घटनाओं, जैसे जीवन, मरन एवं बीमारी आदि के जानने का ज्ञान प्राप्त किया, उसने जादू का एक भाग सीखा। इन्सान यह ज्ञान जितना ज़्यादा प्राप्त करता जाएगा, वह जादू का उतना ज़्यादा ज्ञान प्राप्त करता जाएगा।
अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने इस हदीस में कुछ गुनाह बताए हैं, जो बड़े गुनाहों में शामिल हैं। उनमें से पहला गुनाह है, किसी को अल्लाह की तरह पालनहार अथवा पूज्य बना लेना। चूँकि यह सबसे बड़ा गुनाह है, इसलिए इसे सबसे पहले बयान किया गया है। दूसरा गुनाह है, अल्लाह की दया से निराश हो जाना, जो कि अल्लाह से बदगुमानी और उसकी असीम कृपा से अनभिज्ञता को दर्शाता है। जबकि तीसरा गुनाह है, बंदे का, निरंतर नेमतें मिलने पर इस बात से निश्चिंत हो जाना कि अल्लाह उसकी पकड़ कर सकता है। इस हदीस का यह अर्थ नहीं है कि बड़े गुनाह केवल इतने ही हैं। बड़े गुनाह बहुत-से हैं। यहाँ केवल अधिक बड़े गुनाहों का उल्लेख है।