





























Hadeeth Cards
Da'wa cards that highlight great meanings from the noble prophetic hadiths in a simple style and attractive display that helps the Muslim to have a deeper understanding of his religion in an easy way
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अबू सईद ख़ुदरी रज़ियल्लाहु अन्हु से वर्णित है, वह कहते हैं अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फ़रमाया है : "तुम अपने से पहले समुदायों का बित्ता-बित्ता और हाथ-हाथ अनुसरण करोगे। यहाँ तक कि अगर वे सांडा के बिल में घुसे हैं, तो तुम भी उसमें घुसोगे।" सहाबा ने कहा : ऐ अल्लाह के रसूल, क्या आपका आशय यहूदी और ईसाई हैं? तो आपने फरमाया : "फिर और कौन?"
इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया हैअल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम बता रहे हैं कि आपके ज़माने के बाद आपकी उम्मत के कुछ लोगों का क्या हाल होने वाला है। यह लोग विश्वासों, कार्यों, आदतों एवं रस्मों में यहूदियों एवं ईसाइयों की हूबहू नक़्क़ाली करने लगेंगे। हाल यह होगा कि अगर वह सांडा के बिल में घुसे होंगे, तो यह लोग भी उनके पीछे-पीछ घुस जाएँगे।
अबू हुरैरा रज़ियल्लाहु अनहु से रिवायत है कि अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फ़रमाया : "जिसने किसी हिदायत की ओर बुलाया, उसे भी उतना सवाब मिलेगा, जितना उसका अनुसरण करने वालों को मिलेगा। लेकिन इससे उन लोगों के सवाब में कोई कमी नहीं होगी। तथा जिसने गुमराही की ओर बुलाया, उसे भी उतना गुनाह होगा, जितना गुनाह उसका अनुरण करने वालों को हागा। परन्तु इससे उन लोगों के गुनाह में कोई कमी नहीं होगी।"
इसे मुस्लिम ने रिवायत किया हैअल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने बताया है कि जिसने अपने कथन एवं कार्य द्वारा लोगों को सत्य एवं भलाई का मार्ग दिखाया, उसे उसके बाद उस मार्ग पर चलने वाले तमाम लोगों के समान प्रतिफल मिलेगा और इससे बाद में चलने वालों के प्रतिफल में कोई कटौती भी नहीं होगी। इसके विपरीत जिसने अपने कथन एवं कार्य द्वारा लोगों को किसी बुराई, गुनाह या हराम कार्य का मार्ग दिखाया, उसे उसके बाद उस मार्ग पर चलने वाले तमाम लोगों के बराबर गुनाह होगा और इससे बाद में उस मार्ग पर चलने वाले लोगों के गुनाह में कोई कटौती भी नहीं होगी।
अब्दुल्लाह बिन अब्बास (रज़ियल्लाहु अन्हुमा) से रिवायत है, उन्होंने एक व्यक्ति को देखा कि जैसे ही अल्लाह की विशेषताओं के बारे में नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) की एक हदीस सुनी, (उसे एक नामालूम वस्तु समझते हुए) काँपने लगा। ऐसे में उन्होंने कहाः इन लोगों का भय कैसा है? यह स्पष्ट अर्थ वाली हदीस सुनकर नर्म पड़ जाते हैं, लेकिन अस्पष्ट अर्थ वाली हदीस सुनकर हलाक होने लगते हैं!
इसे इब्ने अबी आसिम ने रिवायत किया है। - इसे अब्दुर रज़्ज़ाक़ ने रिवायत किया है।अब्दुल्लाह बिन अब्बास -रज़ियल्लाहु अनहुमा- अपनी मजलिस में बैठने वाले उन आम लोगों का खण्डन कर रहे हैं, जो अल्लाह की विशेषताओं से संबंधित कोई हदीस सुनते हैं, तो अनजान बनते हुए भयभीत हो जाते हैं और काँपने लगते हैं। दरअसल, वे अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- की सहीह हदीसों और कुरआन की स्पष्ट आयतों पर जैसा ईमान रखना चाहिए, वैसा ईमान रखते ही नहीं हैं। हालाँकि अल्लाह की विशेषताएँ सत्य हैं। किसी ईमान वाले को उनपर संदेह नहीं करना चाहिए। फिर, उनमें से कुछ लोग उनका वह अर्थ बयान करते हैं, जो अल्लाह ने मुराद नहीं लिया है। ऐसा करके वे अपने विनाश का मार्ग ही प्रशस्त करते हैं।
अब्दुल्लाह बिन मसऊद रज़ियल्लाहु अनहु का वर्णन है कि अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फ़रमाया : "अपशगुन लेना शिर्क है। अपशगुन लेना शिर्क है। अपशगुन लेना शिर्क है। -आपने यह बात तीन बार कही।- तथा हममें से हर व्यक्ति के दिल में इस तरह की बात आती है, लेकिन सर्वशक्तिमान एवं महान अल्लाह उसे अपने ऊपर भरोसे के ज़रिए दूर कर देता है।
इस ह़दीस़ को अबू दावूद, तिर्मिज़ी, इब्न-ए-माजह और अह़मद ने रिवायत किया हैअल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने किसी सुनी जाने वाली या देखी जाने वाली चीज़, जैसे पक्षियों, जानवरों, अक्षम लोगों, संख्याओं या दिनों आदि का अपशगुन लेने से सावधान किया है। लेकिन यहाँ पक्षी का उल्लेख इसलिए किया कि अज्ञानता काल में उससे अपशगुन लेना एक आम बात थी। होता यह था कि अरब के लोग जब कोई काम, जैसे यात्रा या व्यापार आदि शुरू करने का इरादा करते, तो एक पक्षी उड़ाते। यदि पक्षी दाएँ ओर उड़ता, तो अच्छा शगुन लेते और उस काम में क़दम आगे बढ़ा देते। लेकिन अगर बाएँ ओर उड़ता, तो अपशगुन लेते और क़दम वापस पीछे खींच लेते। आपने इसे शिर्क बताया। शिर्क इसलिए कि भलाई लाने वाला और बुराई से बचाने वाला अल्लाह के सिवा कोई नहीं है। आगे अब्दुल्लाह बिन मसऊद रज़ियल्लाहु अनहु ने बताया कि कभी-कभी मुसलमान के दिल में थोड़ा-बहुत अपशगुन आ जाता है। ऐसे में उसे अल्लाह पर भरोसा रखते हुए, असबाब को अपनाकर, इसे खतम कर देना चाहिए।
अब्दुल्लाह बिन शिख़्ख़ीर रज़ियल्लाहु अनहु का वर्णन है, वह कहते हैं : मैं बनू आमिर के एक प्रतिनिध मंडल के साथ अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के पास गया। वहाँ पहुँचकर हमने कहा : आप हमारे 'सैय्यिद' (अधिपति) हैं। तो आपने कहा : 'सैय्यिद' (अधिपति) तो अल्लाह है।" हमने कहा : आप हमारे बीच सबसे उत्तम और सबसे उपकार करने वाले व्यक्ति हैं। तो आपने कहा : "तुम मुझे अपने साधारण शब्दों से संबोधित करो अथवा कुछ साधारण शब्दों से संबोधित करो और देखो कहीं शैतान तुम्हें अपना प्रवक्ता न बना ले।"
इस ह़दीस़ को अबू दावूद और अह़मद ने रिवायत किया हैएक प्रतिनिधि मंडल अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के पास आया। पहुँचने के बाद उन्होंने आपकी प्रशंसा में कुछ बातें कहीं, जिन में से कुछ बातें आपको पसंद नहीं आईं। उन्होंने कहा : "आप हमारे 'सैय्यिद' (अधिपति) हैं।" अतः आपने उनसे कहा : "'सैय्यिद' (अधिपति) तो अल्लाह है।" सृष्टि पर उसी का संपूर्ण आधिपत्य है। और सारी सृष्टि उसके बंदे हैं। इसके बाद उन्होंने कहा : "आप हमारे बीच सबसे उत्तम" और सबसे ऊँची श्रेणी, सबसे अधिक प्रतिष्ठा वाले एवं सबसे अधिक विशिष्ट व्यक्ति हैं। "और सबसे अधिक उपकार करने वाले" यानी सबसे अधिक देने वाले एवं ऊँचाई पर विराजमान व्यक्ति हैं। इसके अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने उनको निर्देश दिया के वे आपको साधारण शब्दों द्वारा संबोधित करें। ओर ढूँढ-ढूँढकर भारी-भरकम शब्द न लाएँ। कहीं ऐसा न हो कि शैतान उनको अतिशयोक्ति के मार्ग पर डाल दे, जो शिर्क और उसके साधनों की ओर ले जाता है।
अनस बिन मालिक (रज़ियल्लाहु अन्हु) से रिवायत है कि अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने बताया कि आप (क़यामत के दिन) आएँगे और अपने रब के आगे सजदे में गिरकर उसकी प्रशंसा करेंगे। (पहले ही सिफ़ारिश करना शुरू नहीं करेंगे।) फिर आपसे कहा जाएगाः तुम अपना सर उठाओ और कहो; तुम्हारी बात सुनी जाएगी, माँगो; तुम्हें दिया जाएगा तथा सिफ़ारिश करो; तुम्हारी सिफ़ारिश ग्रहण की जाएगी)।
इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है।अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- क़यामत के दिन आएँगे और अल्लाह के आगे सजदे में गिरकर दुआ करने लगेंगे। फिर अल्लाह आपको सबसे बड़ी सिफ़ारिश की अनुमति देगा और कहेगा : माँगो; तुम्हें दिया जाएगा और सिफ़ारिश करो; तुम्हारी सिफ़ारिश क़बूल की जाएगी।
अब्दुल्लाह बिन अब्बास रज़ियल्लाहु अन्हुमा से वर्णित है, वह कहते हैं : अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने अक़बा की सुबह, जबकि आप अपनी ऊँटनी पर सवार थे, फ़रमाया : "मेरे लिए कुछ कंकड़ी चुनो।" चुनांचे मैंने आपके लिए सात कंकड़ी चुने, जो चने के दाने के बराबर थे। नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम उन्हें अपनी हथेली में रखकर झाड़ने लगे और कहने लगे : "इसी तरह के कंकड़ी मारा करो।" फिर फ़रमाया : "लोगो, दीन में अतिशयोक्ति से बचो। क्योंकि दीन में इसी अतिशयोक्ति ने तुमसे पहले लोगों का विनाश किया है।"
इसे इब्न-ए-माजह, नसई और अह़मद ने रिवायत किया हैअब्दुल्लाह बिन अब्बास रज़ियल्लाहु अनहुमा बता रहे हैं कि वह हज्जतुल वदा के अवसर पर, क़ुरबानी के दिन, जमरा अक़बा में कंकड़ी मारने की सुबह अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के साथ थे। इसी दौरान आपने उनको कुछ कंकड़ी चुनने का आदेश दिया। चुनांचे उन्होंने आपके लिए सात कंकड़ी चुने। हर कंकड़ चने के दाने के बराबर था। अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने उन कंकड़ीयों को अपनी हथेली पर रखकर हिलाया और फ़रमाया : इसी आकार के कंकड़ी मारा करो। उसके बाद अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने धार्मिक मामलों में अतिशयोक्ति से काम लेने और सीमा का उल्लंघन करने से मना किया। क्योंकि इसी अतिशयोक्ति और सीमा के उल्लंघन ने पिछली उम्मतों का विनाश किया है।
अबू हुरैरा रज़ियल्लाहु अनहु का वर्णन है, वह कहते हैं कि अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फ़रमाया : "कोई संक्रामकता नहीं, अपशगुनता नहीं, उल्लू का कोई कुप्रभाव नहीं और सफ़र मास में कोई दोष नहीं। कोढ़ के रोगी से वैसे ही भागो, जैसे शेर से भागते हो।"
इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया हैअल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने अज्ञानता काल की कुछ चीज़ों का ज़िक्र उनसे सावधान करने और यह बताने के लिए किया है कि सब कुछ अल्लाह के हाथ में है, और कुछ भी उसकी मर्ज़ी और निर्णय से हटकर नहीं होता। यह चीज़ें हैं : 1- अज्ञानता काल के लोग समझते थे कि बीमारियाँ अपने आपमें संक्रामक हुआ करती हैं। अतः अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने इस प्रकार का विश्वास रखने से मना कर दिया, कि कोई बीमारी स्वभाविक रूप से एक बीमार व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति तक जाती है। इस कायनात का संचालक एकमात्र अल्लाह है, वही बीमारी देता और ठीक करता है, यह सब कुछ उसके इरादे एवं फ़ैसले के अनुसार हुआ करता है। 2- अज्ञानता काल के लोग जब किसी यात्रा में या व्यवसाय के लिए निकलते, तो किसी चिड़िया को भगाते। वह उड़कर दाईं ओर जाती, तो खुश हो जाते। लेकिन अगर बाईं ओर जाती, तो बुरा शगुन लेकर लौट जाते। अतः अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने इस तरह चिड़िया उड़ाकर बुरा शगुन लेने से मना फ़रमाया और बताया कि यह एक ग़लत धारणा है। 3- अज्ञानता काल के लोग कहते थे : किसी घर पर उल्लू बैठ जाए, तो घर वाले मुसीबत में पड़ जाते हैं। लेकिन अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने इस प्रकार का बुरा शगुन लेने से भी मना फ़रमा दिया। 4- आपने सफ़र महीने से बुरे शगुन लेने से भी मना फ़रमाया। सफ़र चाँद के महीनों में दूसरा महीना है। जबकि कुछ लोगों का कहना है कि सफ़र एक कीड़ा है, जो जानवर या इन्सान के पेट में पैदा हो जाता है। अरबों का मानना था कि यह कीड़ा खुजली से भी अधिक संक्रमित होता है। अतः आपने इस प्रकार की धारणा का खंडन कर दिया। 5- आपने कोढ़ की बीमारी वाले इन्सान से उसी तरह भागने का आदेश दिया है, जिस तरह शेर से भागा जाता है। यह हदीस सावधानी बरतने, सुरक्षित रहने का प्रयास करने और अल्लाह के बताए हुए साधनों का प्रयोग करने की प्रेरणा देती है। कोढ़ दरअसल एक बीमारी है, जिसका शिकार हो जाने के बाद इन्सान के शरीर के अंग गलने लगते हैं।
तथा हसन बसरी से नक़ल किया जाता है कि उन्होंने कहाः जादू का उपचार केवल जादूगर ही कर सकता है।
इसे इब्ने अबी शैबा ने रिवायत किया है। - इसे ख़त्ताबी ने रिवायत किया है ।النشرة' (अल-नुशरा) का अर्थ है, जादू का उपचार। हसन बसरी के इस कथन से मालूम होता है कि जादू का इलाज सिरे से वर्जित है, क्योंकि उनके अनुसार जादू का उपचार वही कर सकता है, जिसके पास जादू का ज्ञान हो और जादू के ज़रिए जादू का इलाज शैतानी अमल है। लेकिन इब्न अल-क़य्यिम ने इस विषय पर विस्तारपूर्वक लिखा है, जिसका सार यह है कि जायज़ दवाओं द्वारा तथा क़ुरआन की आयतों को पढ़कर उसका इलाज किया जा सकता है। हाँ, जादू द्वारा उसका उपचार हराम है।