





























Hadeeth Cards
Da'wa cards that highlight great meanings from the noble prophetic hadiths in a simple style and attractive display that helps the Muslim to have a deeper understanding of his religion in an easy way
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सुफ़यान बिन अब्दुल्लाह सक़फ़ी का वर्णन है, वह कहते हैं : मैंने कहा : ऐ अल्लाह के रसूल! मुझसे इस्लाम के बारे में एक ऐसी बात कहें, जिसके बारे में मुझे किसी और से पूछने की ज़रूरत न पड़े। आपने फ़रमाया : "तुम कहो कि मैं अल्लाह पर ईमान लाया और फिर इसपर मज़बूती से क़ायम रहो।"
इसे मुस्लिम और अह़मद ने रिवायत किया हैअल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के एक साथी सुफ़यान बिन अब्दुल्लाह ने आपसे आग्रह किया कि आप उनको एक ऐसी बात सिखा दें, जिसके अंदर पूरे इस्लाम का निचोड़ आ जाए, ताकि वह उसे मज़बूती से पकड़ लें और उसके बारे में किसी दूसरे से पूछने की ज़रूरत न पड़े। चुनांचे आपने उनसे कहा : तुम बस इतना कह दो कि मैंने अल्लाह को एक माना और उसके रब, पूज्य, सृष्टिकर्ता और अकेला इबादत के लायक़ होने पर ईमान लाया। फिर उसके बाद अल्लाह के बताए हुए रास्ते पर चलते हुए जीवन व्यतीत करो, अल्लाह के द्वारा अनिवार्य कार्यों का पालन करो और उसकी हराम की हुई चीज़ों से बचो।
अब्दुल्लाह बिन अम्र रज़ियल्लाहु अनहुमा बयान करते हैं कि अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने फ़रमाया : "अल्लाह क़यामत के दिन मेरी उम्मत से एक व्यक्ति को चुनकर सारी सृष्टियों के सामने उपस्थित करेगा और उसके सामने निन्यानवे रजिस्टरों को खोलकर रख देगा। हर रजिस्टर वहाँ तक फैला होगा, जहाँ नज़र जाती हो। फिर कहेगा : क्या तुम इनके अंदर लिखी किसी बात से इनकार करते हो? क्या इनको तैयार करने पर नियुक्त मेरे फ़रिश्तों ने तुमपर कोई अत्याचार किया है? वह कहेगा : नहीं, ऐ मेरे रब! फिर अल्लाह कहेगा : क्या तुम्हारे पास प्रस्तुत करने के लिए कोई कारण है? वह कहेगा : नहीं, ऐ मेरे रब! यह सुन अल्लाह कहेगा : हमारे पास तुम्हारी एक नेकी रखी है। देखो, आज तुमपर कोई अत्याचार नहीं होगा। चुनांचे एक पर्ची निकाली जाएगी, जिसमें लिखा होगा : मैं गवाही देता हूँ कि अल्लाह के अतिरिक्त कोई सत्य पूज्य नहीं है और मैं गवाही देता हूँ कि मुहम्मद अल्लाह के बंदे और उसके रसूल हैं। फिर अल्लाह उससे कहेगा : अपने कर्मों को तोले जाने का दृश्य देखो। यह सुन वह कहेगा : इन रजिस्टरों के सामने इस एक पर्ची की क्या हैसियत है? लेकिन अल्लाह कहेगा : तुमपर कोई अत्याचार नहीं होगा। आपने कहा : एक पलड़े में सारे रजिस्टर रखे जाएँगे और दूसरे पलड़े में उस पर्ची को रखा जाएगा। चुनांचे रजिस्टर हल्के साबित होंगे और परर्ची भारी सिद्ध होगी, क्योंकि अल्लाह के नाम से ज़्यादा भारी कोई चीज़ नहीं है।"
इस ह़दीस़ को तिर्मिज़ी और इब्न-ए-माजह ने रिवायत किया हैइस हदीस में अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने बताया है कि क़यामत के दिन अल्लाह आपकी उम्मत के एक व्यक्ति को चुनकर सारी सृष्टियों के सामने प्रस्तुत करेगा, ताकि उसका हिसाब-किताब हो सके। उसके सामने निन्यानवे रजिस्टर रख देगा। इनमें उसके वह बुरे कार्य लिखे होंगे, जो वह दुनिया में किया करता था। हर रजिस्टर की लंबाई वहाँ तक होगी, जहाँ तक आँख पहुँचती हो। फिर अल्लाह उस व्यक्ति से कहेगा : क्या तुम इन रजिस्टरों में लिखी किसी बात का इन्कार करते हो? क्या कर्म लिखने वाले मेरे फ़रिश्तों ने तुमपर कोई अत्याचार किया है? यह सुन वह व्यक्ति कहेगा : नहीं, ऐ मेरे रब! इसपर सर्वशक्तिमान एवं महान अल्लाह कहेगा : तुमने दुनिया में जो बुरे कार्य किए हैं, क्या उनका औचित्य साबित करने के लिए तुम्हारे पास कोई कारण है? मसलन यह कि तुमसे वह कार्य भूल-चूक में, ग़लती से या अनजाने में हुए हैं। वह व्यक्ति कहेगा : नहीं, ऐ मेरे रब! मेरे पास प्रस्तुत करने के लिए कोई उचित कारण नहीं है। इसपर अल्लाह कहेगा : देखो, मेरे पास तुम्हारी एक नेकी रखी है और याद रखो कि आज तुमपर कोई अत्याचार नहीं होगा। अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फ़रमाया : इसके बाद अल्लाह एक पर्ची निकालेगा, जिसमें लिखा होगा : मैं गवाही देता हूँ कि अल्लाह के सिवा कोई सत्य पूज्य नहीं है और मैं गवाही देता हूँ कि मुहम्मद अल्लाह के बंदे और उसके रसूल हैं। फिर अल्लाह उस व्यक्ति से कहेगा : अब अपने कर्म को वज़न किए जाने का दृश्य देखो। चुनांचे आश्चर्यचकित होकर वह व्यक्ति कहेगा : ऐ मेरे रब! इन रजिस्टरों के सामने इस पर्ची की क्या हैसियत है? यह सुन सर्वशक्तिमान एवं महान अल्लाह कहेगा : देखो, आज तुमपर कोई अत्याचार नहीं होगा। अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने आगे फ़रमाया : उन रजिस्टरों को तराज़ू के एक पलड़े में रखा जाएगा और दूसरे पलड़े में उस पर्ची को रखा जाएगा, तो पर्ची वाला पलड़ा भारी और रजिस्टरों वाला पलड़ा हल्का हो जाएगा। इस तरह उसे अल्लाह माफ़ कर देगा।
अबू हुरैरा रज़ियल्लाहु अनहु से वर्णित है कि अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फ़रमाया : जब अल्लाह ने जन्नत एवं जहन्नम को पैदा किया, तो जिबरील अलैहिस्सलाम को जन्नत की ओर भेजा और फ़रमाया : जन्नत को और जन्नत के अंदर जन्नत वासियों के लिए मैंने जो कुछ तैयार किया है, उसे देख आओ। चुनांचे जिबरील ने जन्नत को देखा, वापस आए और कहा : तेरी प्रतिष्ठा की क़सम, जन्नत के बारे में जो भी सुनेगा, वह उसमें दाखिल हो ही जाएगा। चुनांचे अल्लाह ने आदेश दिया और उसे अप्रिय वस्तुओं से घेर दिया गया। इसके बाद फिर जिबरील से कहा : जन्नत की ओर जाओ और उसे तथा उसके अंदर जन्नत वासियों के लिए मैंने जो कुछ तैयार किया है, उसे देख आओ। इस बार देखा तो पाया कि उसे अप्रिय वस्तुओं से घेर दिया गया है। अतः उन्होंने कहा : तेरी प्रतिष्ठा की क़सम, मुझे इस बात का डर लग रहा है कि इसमें कोई दाख़िल ही नहीं हो सकेगा। इसके बाद अल्लाह ने उनसे कहा : जाओ और जहन्नम को तथा उसके अंदर मैंने जहन्नम वासियों के लिए जो कुछ तैयार किया है, उसे देख आओ। चुनांचे उन्होंने देखा तो पाया कि जहन्नम का एक भाग दूसरे भाग पर चढ़े जा रहा है। अतः वह लौट आए और बोले : तेरी प्रतिष्ठा की क़सम, उसमें कोई दाख़िल ही नहीं होगा। चुनांचे अल्लाह ने आदेश दिया और उसे आकांक्षाओं से घेर दिया गया। इसके बाद अल्लाह ने कहा : दोबारा जाओ और उसे देख लो। उन्होंने इस बार देखा तो पाया कि उसे आकांक्षाओं से भर दिया गया है। अतः वापस हुए और बोले : तेरी प्रतिष्ठा की क़सम, मुझे इस बात का डर है कि उसमें कोई दाखिल होने से बच ही नहीं सकेगा।"
इस ह़दीस़ को अबू दावूद, तिर्मिज़ी और नसई ने रिवायत किया हैअल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने बताया है कि जब अल्लाह ने जन्नत एवं जहन्नम को पैदा किया, तो जिबरील अलैहिस्सलाम से कहा : जाओ और जन्नत को देखो। चुनांचे उन्होंने जाकर जन्नत को देखा, वापस आए और कहने लगे : ऐ मेरे रब! तेरी प्रतिष्ठा की क़सम, जन्नत तथा उसके अंदर मौजूद नेमतों एवं आनंददायी चीज़ों के बारे में जो भी सुनेगा, वह उसमें दाख़िल होना चाहेगा और इसके लिए काम करेगा। फिर अल्लाह ने जन्नत को अप्रिय एवं कठनि चीज़ों, जैसे आदेशों का पालन करना एवं मना की हुई चीज़ों से दूर रहना आदि से घेर दिया और यह अनिवार्य कर दिया कि जन्नत में प्रवेश करने की इच्छा रखने वाले को इन चीज़ों से गुज़रना होगा। उसके बाद अल्लाह ने कहा : ऐ जिबरील! जाओ और अब जन्नत को देखो। चुनांचे जिबरील गए, सब कुछ देखा और वापस आकर कहा कि ऐ मेरे रब ! तेरी प्रतिष्ठा की क़सम, मुझे जन्नत में प्रवेश के रास्ते में आने वाली कठिनाइयों तथा परेशानियों को देखकर ऐसा लगता है कि उसके अंदर कोई प्रवेश ही नहीं कर सकेगा। इसी तरह जब अल्लाह ने जहन्नम को पैदा किया, तो जिबरील से कहा : जाओ और उसे देखो। चुनांचे वह गए, उसे देखा और फिर वापस आकर कहा कि ऐ मेरे रब! तेरी प्रतिष्ठा की क़सम, जहन्नम की जो यातनाएँ, सज़ाएँ، पीड़ा तथा दुःख हैं, उनके बारे में जो भी सुनेगा, वह उसमें जाने से बचना चाहेगा और उसकी ओर ले जाने वाली चीज़ों से दूर रहेगा। इसके बाद अल्लाह ने जहन्नम को चारों तरफ़ से घर दिया और उसकी ओर पहुँचने वाले रास्ते को ख़्वाहिशों एवं मन मोहक चीज़ों से भर दिया और फिर जिबरील से कहा अब उसे जाकर देखो। चुनांचे जिबरील गए, देखा और उसके बाद वापस आकर कहा कि ऐ मेरे रब! तेरी प्रतिष्ठा की क़सम, अब उसके आस-पास इतनी आकांक्षाएँ तथा मन मोहक जीज़ें रख दी गई हैं कि मुझे डर है कि कोई उसमें जाने से बच नहीं सकेगा।
अब्दुल्लाह बिन अम्र रज़ियल्लाहु अनहुमा का वर्णन है, वह कहते हैं कि मैंने अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम को कहते हुए सुना है : "अल्लाह ने सृष्टियों की तक़दीरें आकाशों एवं धरती की रचना से पचास हज़ार वर्ष पहले लिख दी थीं। फरमाया : उस समय अल्लाह का अर्श पानी पर था।"
इसे मुस्लिम ने रिवायत किया हैअल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम बता रहे हैं कि अल्लाह ने सृष्टियों से जुड़ी हुई घटनाएँ, जैसे जीवन, मृत्यु एवं जीविका आदि आकाशों एवं धरती की रचना से पचास हज़ार वर्ष पहले ही लौह-ए-महफ़ूज़ में लिख दी थीं। अतः ये सारी घटनाएँ अल्लाह के लिए हुए निर्णय के अनुसार ही सामने आएँगी। दुनिया में होने वाला हर काम अल्लाह के निर्णय एवं फ़ैसले के अनुसार होता है। अतः जो कुछ बंदे के हिस्से में आया, वह उससे दूर नहीं जा सकता था और कुछ उसके हाथ से निकल गया, वह कभी उसके हाथ लग नहीं सकता था।
जाबिर रज़ियल्लाहु अनहु से रिवायत है, वह कहते हैं कि मैंने अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम को फ़रमाते हुए सुना है : "आदमी के बीच तथा कुफ़्र एवं शिर्क के बीच की रेखा नमाज़ छोड़ना है।"
इसे मुस्लिम ने रिवायत किया हैअल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फ़र्ज़ नमाज़ छोड़ने से सावधान किया है और बताया है कि इन्सान तथा कुफ़्र एवं शिर्क में पड़ने के बीच जो चीज़ खड़ी है, वह है नमाज़ छोड़ना। नमाज़ इस्लाम का दूसरा स्तंभ और एक बहुत ही महत्वपूर्ण फ़रीज़ा (कर्तव्य) है। जिसने इसे इसकी अनिवार्यता का इनकार करते हुए छोड़ दिया, वह काफ़िर हो गया, इस बात पर सारे मुसलमान एकमत हैं। अगर किसी ने सुस्ती के कारण भी इसे पूरे तौर पर छोड़ दिया, तो वह भी काफ़िर है। इस बात पर सहाबा का इजमा (एकमत) नक़ल किया गया है। लेकिन अगर कभी छोड़ दे और कभी पढ़ ले, तो वह इस सख़्त चेतावनी की ज़द में होगा।
बुरैदा रज़ियल्लाहु अनहु से रिवायत है, वह कहते हैं कि अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फ़रमाया : "वह वचन, जो हमारे और उनके बीच है, नमाज़ है। जिसने इसे छोड़ दिया, उसने कुफ़्र किया।"
इसे तिर्मिज़ी, नसई, इब्न-ए-माजह और अह़मद ने रिवायत किया हैअल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने बताया है कि मुसलमानों और दूसरों अर्थाथ काफ़िरों और मुनाफ़िकों के बीच जो वचन है, वह नमाज़ है। जिसने नमाज़ छोड़ दी, उसने कुफ़्र किया।
उमर बिन ख़त्ताब रज़ियल्लाहु अनहु का वर्णन है, वह कहते हैं कि अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फ़रमाया : "सर्वशक्तिमान एवं महान अल्लाह तुम्हें इस बात से रोकता है कि तुम अपने बाप-दादाओं की क़सम खाओ।" उमर रज़ियल्लाहु अनहु कहते हैं : अल्लाह की क़सम, जिस दिन से मैंने अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम से यह हदीस सुनी है, मैंने कभी बाप-दादाओं की क़सम नहीं खाई। न जान-बूझकर और न किसी की क़सम नक़ल करते हुए।
इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया हैअल्लाह के नबी सल्ल्ललाहु अलैहि व सल्लम बता रहे हैं कि अल्लाह तआला ने बाप-दादाओं की क़सम खाने से मना किया है। अतः जिसे क़सम खानी हो, वह अल्लाह की क़सम खाए। किसी और की नहीं। उसके बाद उमर बिन ख़त्ताब रज़ियल्लाहु अनहु ने बताया कि जिस दिन से उन्होंने अल्लाह के रसूल सल्लाहु अलैहि व सल्लम को बाप-दादाओं की क़सम खाने से मना करते हुए सुना है, उन्होंने बाप-दादाओं की क़सम नहीं खाई है। न जान-बूझकर और न किसी दूसरे के द्वारा ग़ैरुल्लाह की खाई गई क़सम को नक़ल करते हुए।
अब्दुल्लाह बिन मसऊद रज़ियल्लाहु अनहु का वर्णन है, वह कहते हैं कि अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फ़रमाया : "क़यामत के दिन लोगों के बीच सबसे पहले रक्त के बारे में निर्णय किया जाएगा।"
इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया हैअल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने बताया है कि क़यामत के दिन लोगों के एक-दूसरे पर अत्याचार करने से संबंधित जिस चीज़ के बारे में सबसे पहले निर्णय लिया जाएगा, वह रक्त का विषय है। जैसे क़त्ल करना और ज़ख़्मी करना।
अब्दुल्लाह बिन अब्बास रज़ियल्लाहु अन्हुमा से वर्णित है, वह कहते हैं : अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम दो क़ब्रों के पास से गुज़रे, तो फ़रमाया : "इन दोनों को यातना दी जा रही है, और वह भी यातना किसी बड़े पाप के कारण नहीं दी जा रही है। दोनों में से एक पेशाब से नहीं बचता था, और दूसरा लगाई- बुझाई करता फिरता था।" फिर आपने एक ताज़ा शाखा ली, उसे आधा-आधा फाड़ा और हर एक क़ब्र में एक-एक भाग को गाड़ दिया। सहाबा ने पूछा कि ऐ अल्लाह के रसूल! आपने ऐसा क्यों किया? तो आपने जवाब दिया : "शायद इन दोनों की यातना को उस समय तक के लिए हल्का कर दिया जाए, जब तक यह दोनों शाखाएँ सूख न जाएँ।"
इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया हैअल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम दो क़ब्रों के पास से गुज़रे और फ़रमाया : इन क़ब्रों में दफ़न दोनों लोग यातना झेल रहे हैं और ये यातना ऐसी चीज़ों के कारण झेल रहे हैं, जो तुम्हारी नज़र में बड़ी चीज़ें नहीं हैं। यह और बात है कि ये अल्लाह की नज़र में बड़ी चीज़ें हैं। इन दोनों में से एक व्यक्ति पेशाब-पाखाने के समय अपने शरीर तथा कपड़ों को पेशाब से बचाने पर ध्यान नहीं देता था। जबकि दूसरा व्यक्ति लोगों के बीच लगाई-बुझाई करता फिरता था। वह एक व्यक्ति की बात दूसरे व्यक्ति को नुक़सान पहुँचाने एवं मतभेद पैदा करने के उद्देश्य से पहुँचाया करता था।