





























Hadeeth Cards
Da'wa cards that highlight great meanings from the noble prophetic hadiths in a simple style and attractive display that helps the Muslim to have a deeper understanding of his religion in an easy way
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इमरान बिन हुसैन (रज़ियल्लाहु अंहु) का वर्णन है कि नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने एक व्यक्ति के हाथ में पीतल का एक कड़ा देखा, तो उससे कहाः "यह क्या है?" उसने उत्तर दियाः वाहिना (एक बीमारी) के कारण इसे पहने हुआ हूँ। आपने फ़रमायाः "इसे निकाल दो, क्योंकि यह तुम्हारी बीमारी को बढ़ाने ही का काम करेगा। तथा यदि तुम इसे पहनकर मरोगे, तो कभी सफल नहीं हो सकोगे।"
इसे इब्ने माजा ने रिवायत किया है । - इसे अह़मद ने रिवायत किया है।इमरान बिन हुस़ैन -रज़ियल्लाहु अन्हुमा- ने यहाँ नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- की शिर्क से लड़ाई और लोगों को उससे मुक्ति दिलाने से संबंधित एक घटना का उल्लेख किया है। घटना इस तरह है कि आपने एक व्यक्ति को ताँबा का एक कड़ा पहना हुआ देखा, तो उसेसे पहनने का कारण पूछा। उसने बताया कि कष्ट से बचने के लिए ऐसा किया है, तो उसे अविलंब कड़े को निकाल फेंकने का आदेश दिया और बताया कि यह लाभदायक नहीं, हानिकारक है, तथा जिस बीमारी के कारण उसे पहना है, इससे वह और बढ़ जाएगी। इससे भी बड़ी बात यह है कि यदि वह उसे पहनकर मरा, तो आख़िरत की सफलता से भी वंचित हो जाएगा।
अबू हुरैरा रज़ियल्लाहु अनहु का वर्णन है कि अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फ़रमाया : "क्या तुम जानते हो कि निर्धन कौन है?" सहाबा ने कहा : हमारे यहाँ निर्धन वह है, जिसके पास न दिरहम हो न सामान। आपने कहा : "मेरी उम्मत का निर्धन वह व्यक्ति है, जो क़यामत के दिन नमाज़, रोज़ा और ज़कात के साथ आएगा, लेकिन इस अवस्था में उपस्थित होगा कि किसी को गाली दी होगी, किसी पर दुष्कर्म का आरोप लगा रखा होगा, किसी का रक्त बहा रखा होगा और किसी को मार रखा होगा। अतः उसकी कुछ नेकियाँ इसे दे दी जाएँगी और कुछ नेकियाँ उसे दे दी जाएँगी। फिर अगर उसके ऊपर जो अधिकार हैं, उनके भुगतान से पहले ही उसकी नेकियाँ समाप्त हो जाएँगी, तो हक़ वालों के गुनाह लेकर उसके ऊपर डाल दिए जाएँगे और फिर उसे आग में फेंक दिया जाएगा।"
इसे मुस्लिम ने रिवायत किया हैअल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने अपने सहाबा से पूछा : क्या तुम जानते हो कि कंगाल कौन है? सहाबा ने उत्तर दिया : हमारे यहाँ कंगाल वह है, जिसके पास धन एवं संपत्ति न हो। उत्तर सुनकर आपने कहा : क़यामत के दिन मेरी उम्मत का कंगाल व्यक्ति वह होगा, जो अच्छे कर्म जैसे नमाज़, रोज़ा और ज़कात के साथ आएगा, लेकिन दुनिया में किसी को गाली दे रखी होगी, किसी के मान-सम्मान पर आक्रमण करके आया होगा, किसी का माल खाकर इनकार कर दिया होगा तथा किसी को मारा और ज़लील किया होगा। अतः उसकी नेकियाँ लेकर पीड़ितों के दरमियान बाँटना शुरू कर दिया जाएगा। अगर उसके द्वारा किए गए अत्याचारों का हक़ दिलाने का कार्य पूरा होने से पहले उसकी नेकियाँ ख़त्म हो गईं, तो पीड़ितों के गुनाह लेकर उसके कर्म पत्रों में दर्ज कर दिया जाएगा और चूँकि उसके पास नेकियाँ बाक़ी नहीं रह जाएँगी, इसलिए उसे जहन्नम में डाल दिया जाएगा।
अबू हुरैरा रज़ियल्लाहु अनहु का वर्णन है, वह कहते हैं कि अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फ़रमाया है : "जो भी सोना या चाँदी रखने वाला व्यक्ति अपने उस धन का हक़ (ज़कात) अदा नहीं करता, उसके लिए क़यामत के दिन आग की तख़्तियाँ तैयार की जाएँगी और उन्हें जहन्नम की आग में तपाया जाएगा, फिर उनसे उसके पहलू, उसकी पेशानी और पीठ को दागा जाएगा। जब-जब तख़्तियाँ ठंडी हो जाएँगी, उन्हें दोबारा गर्माया जाएगा। यह अज़ाब एक ऐसे दिन में होगा, जिसकी अवधि पचास हज़ार साल के बराबर होगी। (यह सिलसिला जारी रहेगा) यहाँ तक कि बंदों के दर्मियान फ़ैसला कर दिया जाए और (अज़ाब में गिरफ़्तार व्यक्ति) जन्नत या जहन्नम की ओर जाने वाले अपने रास्ते को देख ले।" पूछा गया : ऐ अल्लाह के रसूल! ऊँटों का क्या हुक्म है? आपने फ़रमाया : "जो व्यक्ति ऊँटों का मालिक हो और उनका हक़ (ज़कात) अदा न करता हो, जबकि उनका हक़ यह भी है कि उनको पानी पिलाने के दिन (ज़रूरतमंदों एवं यात्रियों के लिए) उनका दूध दूहा जाए, तो क़यामत के दिन एक बड़े समतल मैदान में उसे ऊँटों के सामने मुँह के बल औंधा डाल दिया जाएगा और उसके सारे ऊँट पहले से भी अधिक मोटे होकर वहाँ उपस्थि होंगे। ऊँट का एक बच्चा तक अनुपस्थित नहीं होगा। यह ऊँट अपने खुरों से उस व्यक्ति को रौंदेंगे और अपने मुँह से उसे काटेंगे। जब अंतिम ऊँट (उसे रौंदते हुए) गुज़र जाएगा, तो पहले ऊँट को दोबारा लौटा दिया जाएग। यह अज़ाब ऐसे दिन में होगा, जिसकी अवधि पचास हज़ार साल होगी। (यह सिलसिला जारी रहेगा) यहाँ तक कि बंदों के दर्मियान फ़ैसला कर दिया जाए और वह जन्नत या जहन्नम की ओर जाने वाला अपना रास्ता देख ले।" पूछा गया : ऐ अल्लाह के रसूल! गायों और बकरियों का क्या हुक्म है? आपने फ़रमाय : "जो व्यक्ति गायों और बकरियों का मालिक हो और उनका हक़ (ज़कात) अदा न करता हो, क़यामत के दिन उसे एक बड़े समतल मैदान में उसकी गायों एवं बकरियों के सामने औंधे मुँह डाल दिया जाएगा। एक भी गाय या बकरी कम नहीं दिखेगी। किसी का सींग न मुड़ा होगा, न टूटा होगा और न कोई बिना सींग की होगी। वह अपनी सींगों से उसे मारेंगी और अपने खुरों से उसे रौंदेंगी। जब अंतिम गाय या बकरी रौंदकर गुज़र जाएगी, तो पहली गाय को दोबारा लौटा दिया जाएग। यह अज़ाब ऐसे दिन में होगा, जिसकी अवधि पचास हज़ार साल होगी। (यह सिलसिला जारी रहेगा) यहाँ तक कि लोगों के दर्मियान फ़ैसला कर दिया जाए और वह व्यक्ति जन्नत या जहन्नम की ओर जाने वाला अपना रास्ता देख ले।" पूछा गया : ऐ अल्लाह के रसूल! घोड़ों के बारे में क्या हुक्म है? आपने फ़रमयाा : 'घोड़े तीन प्रकार के होते हैं। एक तो वह घोड़े जो इन्सान के लिए बोझ (गुनाह का सबब) होते हैं, दूसरे वह घोड़े जो इन्सान के लिए पर्दा होते हैं और तीसरे वह घोड़े जो इन्सान के लिए सवाब का सबब बनते हैं। जो घोड़े इन्सान के लिए गुनाह का सबब हुआ करते हैं, वह ऐसे घोड़े हैं, जिन्हें वह लोगों को दिखाने, अभिमान और मुसलमानों का मुक़ाबला करने के लिए रखता है। इस प्रकार के घोड़े इन्सान के लिए गुनाह का सबब हुआ करते हैं। जो घोड़े इन्सान के लिए पर्दा बनते हैं, वह ऐसे घोड़े हैं, जिन्हें इन्सान अल्लाह के रास्ते में जिहाद के लिए पालता है और उनकी पीठ और गर्दनों के बारे में अल्लाह के हक़ को नहीं भूलता। इस प्रकार के घोड़े इन्सान के लिए पर्दा हुआ करते हैं। जो घोड़े इन्सान के लिए नेकी का सबब हुआ करते हैं, वह ऐसे घोड़े हैं, जिन्हें आदमी अल्लाह के मार्ग में जिहाद के उद्देश्य से मुसलमानों के लिए चरागाह या बाग में बाँधकर रखे। वह घोड़े उस चरागाह या बाग में जो कुछ भी खाते हैं, उनके परिमाण में उसके लिए नेकियाँ लिखी जाती हैं और उनकी लीद एवं पेशाब के परिमाण में भी उसके हक़ में नेकियाँ लिखी जाती हैं। अगर वह अपनी रस्सी तोड़कर एक टीले या दो टीलों पर दौड़कर चढ़ जाएँ, तो इस दौरान उनके पाँव के पड़ने वाले निशानों और उनकी गिरने वाली लीद के परिमाण में भी अल्लाह उसके लिए नेकियाँ लिख देता है। अगर उनका मालिक उन्हें ले कर किसी नदी पर से गुज़रे और वह उसका पानी पी लें, हालाँकि उसका उन्हें पानी पिलाने का इरादा न भी हो, तब भी वह जितना पानी पीते हैं, उसके अनुसार अल्लाह उसके लिए नेकियाँ लिख देता है।'"
इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया हैअल्लाह के नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने विभिन्न प्रकार के धन तथा उनकी ज़कात अदा न करने वाले को क़यामत के दिन होने वाली सज़ा का ज़िक्र किया है। मसलन : 1- सोना, चाँदी तथा उनके जैसे अन्य धन एवं तिजारत के सामान। इनपर अगर ज़कात वाजिब हो जाए और ज़कात अदा न की जाए, तो क़यामत के दिन इनको पिघलाकर पहले तख़्तियों के रूप में ढाला जाएगा और उसके बाद उन तख़्तियों को जहन्नम की आग में तपाकर उनके मालिक को अज़ाब दिया जाएगा, अतः उनसे उसके पहलू, पेशानी और पीठ को दागा जाएगा, जब-जब वह ठंडी पड़ जाएँगी, उन्हें दोबारा तपाया जाएगा। क़यामत के दिन अज़ाब का यह सिलसिला दिन भर जारी रहेगा। वह दिन भी पचास हज़ार साल का होगा। थमेगा उसी समय जब लोगों के बीच अल्लाह फ़ैसला कर देगा और यह तय हो जाएगा कि वह जन्नत जाने वालों में से है या जहन्नम की तरफ जाने वालों में से है। 2- ऊँट का जो मालिक फ़र्ज़ ज़कात और उसका हक़ अदा न करता हो, मसलन उसका दूध ग़रीबों और निर्धनों को न पिलाता हो, तो क़यामत के दिन किसी एक भी ऊँट को छोड़े बिना उसके सारे ऊँटों को मोटा-ताज़ा बनाकर लाया जाएगा, फिर उनके मालिक को उनके सामने एक समतल एवं विस्तृत भूमि में लिटा दिया जाएगा, उसके बाद वह ऊँट उसे अपने पैरों से रौंदेंगे और अपने दाँतों से काटेंगे। जब अंतिम ऊँट भी गुज़र जाएगा, तो पहले ऊँट से फिर से यह सिलसिला शुरू कर दिया जाएगा। अज़ाब का यह सिलसिला क़यामत के रोज़ दिन भर जारी रहेगा और वह दिन भी पचास हज़ार वर्ष का होगा। थमेगा उसी समय जब सारे लोगों के बीच अल्लाह निर्णय कर देगा और यह तय हो जाएगा कि वह जन्नत जाने वालों में से है या जहन्नम की तरफ जाने वालों में से है।। 3- गाय और बकरी का जो मालिक उनकी फ़र्ज़ ज़कात न देता हो, क़यामत के दिन उनकी पूरी संख्या के साथ इस तरह लाया जाएगा कि एक गाय या बकरी भी इधर-उधर न होगी। सब जानवर बिलकुल सही-सालिम होंगे। न किसी का सींग मुड़ा होगा, न किसी का सींग टूटा होगा और न कोई जानवर बिना सींग का होगा। फिर उनके मालिक को एक बड़े एवं समतल मैदान में उनके सामने लिटा दिया जाएगा। फिर ये गायें और बकरियाँ उसे अपने सींगों से मारेंगी और अपने पैरों से कुचलेंगी। जब अंतिम गाय एवं बकरी भी गुज़र जाएगी, तो पहली गाय या बकरी से फिर से यह सिलसिला शुरू कर दिया जाएगा। अज़ाब का यह सिलसिला क़यामत के रोज़ दिन भर जारी रहेगा और वह दिन भी पचास हज़ार वर्ष का होगा। थमेगा उसी समय जब सारे लोगों के बीच अल्लाह निर्णय कर देगा तो वह या तो जन्नत वालों में से होगा या जहन्नम वालों में से होगा। 4- घोड़ा पालने वाला। दरअसल घोड़े तीन प्रकार के हुआ करते हैं : 1- ऐसा घोड़ा जो मालिक के लिए गुनाह का कारण बने। इससे मुराद ऐसा घोड़ा है, जिसे प्रसिद्धि, अभिमान एवं मुसलमानों से युद्ध के लिए पाला जाए। 2- ऐसा घोड़ा जो इन्सान के लिए पर्दे का कारण हो। इससे मुराद ऐसा घोड़ा है, जिसे अल्लाह की राह में जिहाद के लिए रखा जाए और फिर उसके साथ अच्छा व्यवहार करते हुए उसे खिलाने-पिलाने और उसकी देखभाल की बेहतर व्यवस्था की जाए, और इसी के अन्तर्गत नर घोड़े को मादा घोड़ी के पास जाने देना है। 3- ऐसा घोड़ा जो सवाब का कारण बने। इससे मुराद ऐसा घोड़ा है, जिसे अल्लाह की राह में जिहाद के लिए रखा जाए। इस प्रकार के घोड़े जब किसी चरागाह या बाग़ में होते हैं, तो उस चरागाह या बाग़ में जो कुछ भी खाते हैं, उसी परिमाण में उनके मालिक के लिए नेकियाँ लिखी जाती हैं, तथा उनकी लीद और मूत्र के परिमाण में भी उसके लिए नेकियाँ लिख दी जाती हैं। अगर वह रस्सी तोड़कर एक टीले या दो टीलों पर दौड़कर चढ़ जाएँ, तो उनके पैरों के निशानों और इस दौरान गिरने वाली लीद के समान अल्लाह तआला उसके लिए नेकियाँ लिख देता है। अगर उनका मालिक उन्हें किसी नहर पर ले जाए और वो उनका पानी पी लें, चाहे उनका मालिक उन्हें वहाँ पानी पिलाने का इरादा न भी रखता हो, तब भी वो जितना पानी पीते हैं, उसके पिरमाण में अल्लाह उनके लिए नेकियाँ लिख देता है। उसके बाद अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- से गधों के बारे में पूछा गया कि क्या इस विषय में गधों का हुक्म घोड़ों की तरह है? आपने उत्तर दिया कि मेरे पास गधों के बारे में कोई निर्देश नहीं आया है। अलबत्ता, यह अद्भुत एवं सारगर्भित आयत मौजूद है, जिसके दायरे में हर प्रकार की नेकियाँ और गुनाह आ जाते हैं, आयत का अर्थ है : जिसने कण भर भी नेकी की होगी, वह उसको देख लेगा, तथा जिसने कण भर भी बुराई की होगी, वह उसे देख लेगा। [सूरा ज़लज़ला : 8] यानी जिसने अच्छे इरादे से गधा पाला होगा, वह उसका सवाब सामने देखेगा और जिसने बुरे इरादे से गधा पाला होगा, वह उसकी सज़ा सामने देखेगा। इस आयत के दायरे में हर प्रकार के कार्य आ जाते हैं।
अदी बिन हातिम रज़ियल्लाहु अनहु का वर्णन है, वह कहते हैं कि अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फ़रमाया है : ''तुममें से हर एक के साथ अल्लाह बात करेगा, इस तरह कि उसके और उसके रब के बीच कोई अनुवादक न होगा। वह अपने दायीं ओर देखेगा तो अपने भेजे हुए अमल को देखेगा और बायीं ओर देखेगा तो अपने आगे भेजे हुए अमल को पाएगा और अपने सामने देखेगा तो आग ही आग पाएगा। आग से डरो, चाहे एक खजूर के टुकड़े द्वारा क्यों न हो।''
इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया हैअल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम हमें बता रहे हैं कि क़यामत के दिन हर मोमिन सर्वशक्तिमान अल्लाह के सामने अकेला खड़ा होगा और अल्लाह उससे सीधे बात करेगा। दोनों के बीच अनुवाद करने के लिए कोई अनुवादक नहीं होगा। वह घबराहट में बाएँ और दाएँ देखेगा कि शायद अपने सामने मौजूद जहन्नम मुक्ति का कोई रास्ता मिल जाए। परन्तु यदि वह दाएँ देखेगा, तो उसे अपने द्वारा भेजे गए अच्छे कर्मों के अतिरिक्त कुछ भी दिखाई नहीं देगा। और जब बाएँ देखेगा, तो उसे अपने द्वारा आगे भेजे गए बुरे कर्मों के अलावा कुछ भी दिखाई नहीं देगा। जब वह अपने सामने देखेगा, तो उसे आग के सिवा कुछ नहीं दिखेगा, और वह उससे बच भी नहीं पाएगा, क्योंकि उसे पुल-सिरात से गुज़रना ही होगा। इसके बाद अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फ़रमाया : "दान और अच्छे कर्मों द्वारा अपने और नरक के बीच एक बाधा बनाओ।" भले ही दान छोटा जैसे आधा खजूर ही क्यों न हो।
उक़बा बिन आमिर जुहनी रज़ियल्लाहु अन्हु का वर्णन है कि : अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के पास दस लोगों का एक गिरूह आया, जिनमें से नौ लोगों से आपने बैअत ली, जबकि एक व्यक्ति से बैअत नहीं ली, अतः उन्होंने पूछा : ऐ अल्लाह के रसूल! आपने नौ लोगों से बैअत ली और एक व्यक्ति से बैअत नहीं ली! आपने उत्तर दिया : "उसने तावीज़ बाँध रखा है।" अतः उस व्यक्ति ने अपना हाथ अंदर डाला और उसे काट दिया। तब जाकर आपने उससे बैअत ली और फ़रमाया : "जिसने तावीज़ लटकाया, उसने शिर्क किया।"
इसे अह़मद ने रिवायत किया हैअल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के पास लोगों का एक समूह आया। कुल दस लोग थे। आपने उनमें से नौ लोगों से इस्लाम का पालन करने और आपका अनुसरण करने की बैअत ली और दसवें को छोड़ दिया। इसका कारण पूछा गया, तो फ़रमाया : उसने तावीज़ बाँध रखा है। तावीज़ दरअसल उन मनका आदि को कहते हैं, जिनको बुरी नज़र या नुक़सान से बचने के लिए बाँधा या लटकाया जाता है। तब उस व्यक्ति ने तावीज़ की जगह पर हाथ डाला और उसे काटकर फेंक दिया। इसके बाद अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने उससे बैअत ली और तावीज़ से सावधान करते हुए और उसका हुक्म समझाते हुए फ़रमाया : "जिसने तावीज़ लटकाया, उसने शिर्क किया।"
रुवैफ़े कहते हैं कि मुझसे अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फ़रमायाः "ऐ रुवैफ़े, हो सकता है कि तुम्हें लंबी आयु मिले। लोगों को बता देना कि जो अपनी दाढ़ी में गिरह लगाएगा, ताँत गले में डालेगा या किसी पशु के गोबर अथवा हड्डी से इस्तिंजा करेगा, मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) उससे बरी हैं।"
इसे नसाई ने रिवायत किया है। - इसे अबू दाऊद ने रिवायत किया है। - इसे अह़मद ने रिवायत किया है।नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने यह सूचना दी है कि इस सहाबी को लंबी आयु मिलेगी और वह ऐसे लोगों को देखेंगे, जो दाढ़ी के साथ, जिसे बढ़ाने तथा सम्मान देने का आदेश है, गैर अरब अथवा विलासिता और तरलता के लोगों का अनुसरण करते हुए खिलवाड़ करेंगे। या शिर्क के साधनों का प्रयोग करके अक़ीदा-ए-तौहीद को हानि पहुँचाएँगे और परेशानी से बचने के लिए अपने गलों में ताँत पहनेंगे अथवा अपने जानवरों को पहनाएँगे। या फिर चौपायों के गोबर और हड्डियों से इस्तिंजा (पवित्रता प्राप्त) करेंगे, जिससे नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने मना किया है। नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने अपने उस सहाबी को वसीयत की कि लोगों को यह बात पहुँचा दें कि आपने इस तरह के लोगों से ख़ुद के बेज़ार होने का एलान किया है।
आइशा (रज़ियल्लाहु अन्हा) कहती हैं कि अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फ़रमाया : “फ़रिश्ते नूर से पैदा किए गए हैं, जिन धधकती आग से पैदा किए गए हैं और आदम (अलैहिस्सलाम) उस चीज़ से पैदा किए गए हैं, जिसके बारे में तुम्हें बताया गया है।”
इसे मुस्लिम ने रिवायत किया है।अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने रचना के आरंभ के बारे में बताते हुए कहा है कि फ़रिश्ते नूर से पैदा किए गए हैं। यही कारण है कि कोई भी फ़रिश्ता अल्लाह की अवज्ञा और उसकी इबादत से अभिमान नहीं करता। जिन्न आग से पैदा किए गए हैं। अतः उनमें से बहुतों के अंदर क्रोध, अशिष्टता और सरकशी पाई जाती है। जबकि आदम उस चीज़ से पैदा किए गए हैं, जिसका उल्लेख तुम्हारे लिए कर दिया गया है। यानी खनखनाती ठीकरी जैसे सूखे गारे से। क्योंकि मिट्टी गारा बनी और गारा ठीकरा। उसी से आदम -अलैहिस्सलाम- पैदा किए गए।
अबू उमामा (रज़ियल्लाहु अन्हु) से रिवायत है कि नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फ़रमाया : “मेरे रब ने मुझे वचन दिया है कि वह मेरी उम्मत के सत्तर हज़ार लोगों को बिना किसी हिसाब-किताब और अज़ाब के जन्नत में दाख़िल करेगा। उनमें से प्रत्येक हज़ार के साथ और सत्तर हज़ार तथा मेरे रब के लप से तीन लप भर लोग होंगे।”
इसे इब्ने माजा ने रिवायत किया है । - इसे तिर्मिज़ी ने रिवायत किया है। - इसे अह़मद ने रिवायत किया है।इस हदीस में अल्लाह के नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- हमें बता रहे हैं कि सर्वशक्तिमान एवं महान अल्लाह इस उम्मत के सत्तर हज़ार लोगों को बिना हिसाब-किताब और यातना के जन्नत में प्रवेश करने का सौभाग्य प्रदान करेगा। फिर इन सत्तर हज़ार में से हर हज़ार के साथ अतिरिक्त सत्तर हज़ार लोगों को दाख़िल करेगा। फिर अल्लाह अपने सम्मानित हाथ से तीन लप भर लोगों को लेगा और जन्नत में दाख़िल कर देगा।
अब्दुल्लाह बिन अब्बास (रज़ियल्लाहु अन्हुमा) से रिवायत है कि नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फ़रमाया : “रहिम (रिश्ता) रहमान के 'हुजज़ा' (तहबंद बाँधने के स्थान) को पकड़े हुआ है। जो उसे जोड़ेगा, रहमान उसे ज़ोड़ेगा और जो उसे तोड़ेगा, रहमान उसे तोड़ेगा।”
इसे अह़मद ने रिवायत किया है।रहिम' यानी खूनी रिश्ते का सर्वशक्तिमान एवं महान अल्लाह से संबंध है। क्योंकि उसका नाम अल्लाह के नाम 'रहमान' से लिया गया है। मूल रूप से यह हदीस अल्लाह के गुणों वाली हदीसों में से एक है, जिनके बारे में विद्वानों ने स्पष्ट रूप से कहा है कि उन्हें उसी तरह मान लिया जाना चाहिए, जिस तरह वह आई हुई हैं। उन्होंने इन हदीसों के आशय का इनकार करने वालों का खंडन भी किया है। 'हुजज़ा' यानी तहबंद बाँधने की जगह भी अल्लाह के उन गुणों में से एक है, जिनपर विश्वास रखना वाजिब है और उनके अर्थ के साथ छेड़छाड़, इस संदर्भ में प्रयुक्त शब्द को अर्थविहीन बनाना, उनकी कैफ़ियत बयान करना और उपमा देना जायज़ नहीं है। हम इस बात पर ईमान रखेंगे कि रहिम यानी खूनी रिश्ता रहमान के हुजज़ा को पकड़े हुए है और अल्लाह उसे जोड़ता है जो खूनी रिश्ता जोड़े और उसे काटता है जो यह रिश्ता काटे। फिर जिसे अल्लाह काट दे, वह कटा हुआ और अल्लाह के दुश्मन शैतान के साथ होता है, जिसे सारी सृष्टि भी जोड़ना तथा लाभान्वित करना चाहे, तो उसका कुछ भला होने वाला नहीं है।