





























Hadeeth Cards
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अबू हुरैरा (रज़ियल्लाहु अन्हु) से रिवायत है कि नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फ़रमाया : “अल्लाह ने सृष्टियों की रचना की। जब उसने इस कार्य को पूरा कर लिया, तो रहिम (रिश्ता) खड़ा हुआ और रहमान के तहबंद बाँदने के स्थान को पकड़ लिया। अल्लाह ने उससे कहाः यह क्या है? उसने कहा : यह संबंध विच्छेद करने वाले से तेरी शरण माँगने वाले का खड़ा होना है। अल्लाह ने कहा : क्या तू इस बात से प्रसन्न नहीं है कि जो तुझे जोड़े, मैं उसे जोड़ूँ और तुझे काटे में उसे काटूँ? उसने कहा : अवश्य ही, ऐ मेरे रब। अल्लाह ने कहा : “तो ऐसा ही होगा।” अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने (आगे) फ़रमाया : यदि तुम चाहो, तो यह आयत पढ़ सकते हो : “फिर यदि तुम विमुख हो गए, तो दूर नहीं कि तुम धरती में उपद्रव करोगे तथा अपने रिश्तों को तोड़ोगे।” बुख़ारी की एक रिवायत में है : अल्लाह ने फ़रमाया : “जिसने तुझे जोड़ा, मैंने उसे जो़ड़ दिया और जिसने तुझे तोड़ा, मैंने उसे तोड़ दिया।"
इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है।"अल्लाह ने सृष्टियों की रचना की। जब उसने इस कार्य को पूरा कर लिया" यानी सृष्टियों की रचना का कार्य संपन्न हो गया। यह इस बात का प्रमाण है कि सृष्टियों की रचना का कार्य एक निर्धारित समय में संपन्न हो गया। यह सत्य है कि अल्लाह के पास असीम क्षमता है और एक कार्य में व्यस्तता उसे दूसरे कार्य से नहीं रोकती, लेकिन उसने अपनी हिकमत के तहत इसे एक निर्धारित समय सीमा के अंदर संपन्न कर लिया। इससे प्रमाणित होता है कि अल्लाह के कार्य उसकी चाहत और इरादे से जुड़े हुए हैं। जब वह किसी कार्य के करने का इरादा करता है, तो कर डालता है। आपके शब्द "पूरा कर लिया" का यह अर्थ नहीं है कि उसने सारी चीज़ों की रचना का कार्य संपन्न कर लिया। क्योंकि उसकी सृष्टियाँ एक के बाद एक वजूद में आती रहती हैं। यह अलग बात है कि वह उनसे पहले से अवगत होता है, उनसे संबंधित विवरणों का निर्धारण कर दिया होता है और उन्हें लिख चुका होता है। फिर जब वह चाहता है, तो उनका अस्तित्व सामने आता है। आपने फ़रमाया : "तो रहिम (खूनी रिश्ता) खड़ा हुआ और रहमान के तहबंद बाँधने के स्थान को पकड़ लिया। अल्लाह ने उससे कहाः यह क्या है?" यहाँ रहिम यानी खूनी रिश्ते से जो कार्य संबंद्ध किए गए हैं, जैसे खड़ा होना और कहना आदि, हदीस के ज़ाहिर से अंदाज़ा होता है कि उनसे उनका वास्तविक अर्थ ही मुराद है। यहाँ यह कहा जा सकता है कि खूनी रिश्ता अर्थ की दृष्टि से लोगों से जुड़ी हुई वस्तु है, लेकिन उसका उत्तर यह है कि अल्लाह के सामर्थ्य को इन्सानी अक़्ल के तराज़ू में तोला नहीं जा सकता। दरअसल यह हदीस अल्लाह के गुणों वाली हदीसों में से एक है, जिनके बारे में उलेमा ने स्पष्ट रूप से कहा है कि उन्हें उसी तरह ग्रहण कर लिया जाएगा, जिस तरह वह आई हुई हैं। उन्होंने उन लोगों का खंडन भी किया है, जो इनके आशय को मानने से इनकार करते हैं। लेकिन इस हदीस का यह मतलब भी नहीं है कि अल्लाह के उसी प्रकार के चमड़े, लीनेन और कपास आदि से बने हुए तहबंद और चादर जैसे कपड़े हुआ करते हैं, जिस प्रकार के कपड़े लोग पहनते हैं। अल्लाह तआला का फ़रमान है : "उसके जैसी कोई चीज़ नहीं है और वह सुनने वाला और देखने वाला है।" आपने फ़रमाया कि खूनी रिश्ते ने कहा : "यह संबंध विच्छेद करने वाले से तेरी शरण माँगने वाले का खड़ा होना है।" यह एक बहुत बड़े उद्देश्य के लिए खड़ा होना है, और सच्चाई यह है कि जो अल्लाह की शरण में चला गया, वह सबसे बड़े शरण देने वाले की शरण में चला गया। यह हदीस रिश्तेदारों के साथ अच्छा व्यवहार करने के महत्व को दर्शाती है और रिश्तेदारी का लिहाज़ न करने को एक बहुत बड़े गुनाह के रूप में चिह्नित करती है। इस हदीस में आए हुए शब्द 'القطيعة' का अर्थ है, रिश्ता जोड़कर न रखना। जबकि रिश्ता जोड़कर रखने से मुराद है, रिश्तेदारों के साथ अच्छा व्यवहार करना, उनसे प्रेम रखना, उनसे निकटता बनाए रखना, उनका सहयोग करना, उन्हें कष्ट से बचाना और उन्हें ऐसी चीज़ें देने का प्रयास करना जो उनके लिए दुनिया एवं आख़िरत में लाभकारी हों। आपने फ़रमाया : "अल्लाह ने कहा : क्या तू इस बात से प्रसन्न नहीं है कि जो तुझे जोड़े, उसे मैं जोड़ूँ और तुझे काटे उसे मैं काटूँ? उसने कहा : अवश्य ही, ऐ मेरे रब। अल्लाह ने कहा : तो ऐसा ही होगा।" अतः जो अपने रिश्तेदारों से संबंध जोड़कर रखेगा, अल्लाह उससे संबंध रखेगा और जिससे अल्लाह संबंध रखेगा, वह दुनिया एवं आख़िरत की हर भलाई तथा सौभाग्य प्राप्त करेगा और उसे फ़िरदौस यानी जन्नत के सबसे ऊपरी भाग में अपने पालनहार की निकटता प्राप्त होगी। क्योंकि जोड़ने का अंत यहीं पर आकर होगा और उसे अपने पालनहार के चेहरे को देखने का शुभ अवसर प्राप्त होगा। इसके विपरीत जो अपने रिश्तेदारों से संबंध तोड़कर रखेगा, अल्लाह उससे संबंध तोड़ लेगा और जिससे अल्लाह संबंध तोड़ ले, वह अल्लाह के श्त्रु तथा धुतकारे हुए शैतान के साथ हर भलाई एवं सौभाग्य से कटा हुआ रहेगा।
अबू सईद ख़ुदरी (रज़ियल्लाहु अन्हु) से रिवायत है कि अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फ़रमाया : “पुल सिरात को जहन्नम के ऊपर रखा जाएगा, जिसपर ऐसे काँटे लगे होंगे, जैसे सादान पौधे में होते हैं। फिर लोग उससे होकर गुज़रेंगे, तो कोई सही-सलामत नजात पा जाएगा, कोई खरोंच के साथ पार हो जाएगा और कोई रोक दिया जाएगा और मुँह के बल जहन्नम में गिरा दिया जाएगा। फिर जब अल्लाह सर्वशक्तिमान एवं महान अल्लाह बंदों के बीच निर्णय से फ़ारिग़ हो जाएगा, तो ईमान वाले कुछ ऐसे लोगों को नहीं पाएँगे, जो दुनिया में उनके साथ रहते थे और उनकी तरह नमाज़ पढ़ते थे, उनकी तरह ज़कात देते थे, उनकी तरह रोज़े रखते थे और उनकी तरह ही हज तथा जिहाद करते थे। यह देख वे कहेंगे : ऐ हमारे रब! तेरे कुछ बंदे, जो दुनिया में हमारे साथ थे और हमारी तरह नमाज़ पढ़ते थे, हमारी तरह ज़कात देते थे, हमारी तरह रोज़ा रखते एवं हमारी ही तरह हज और जिहाद करते थे, क्या बात है कि आज हम उन्हें देख नहीं पा रहे हैं? अल्लाह फ़रमाएगा : जहन्नम जाकर देखो, उनमें से जो तुम्हें वहाँ दिखें, उन्हें निकाल लाओ। फ़रमाया : चुनांचे वे उन्हें देखेंगे कि अपने कर्मों के मुताबिक़ आग में हैं। किसी के क़दमों तक आग है तो किसी की आधी पिंडली तक। किसी के घुटनों तक है तो किसी की छाती तक। किसी की कमर तक है तो किसी की गरदन तक और अभी चेहरों तक नहीं पहुँची है। चुनांचे वे उन्हें वहाँ से निकाल लाएँगे और फिर उन्हें आब-ए-हयात में डाला जाएगा।” किसी ने पूछाा : ऐ अल्लाह के रसूल! हयात क्या है? आपने फ़रमाया : “जन्नत वालों का स्नान, जिसके बाद वे ऐसे उग आएँगे, जैसे पौधे उग आते हैं।” और एक बार फ़रमाया : “उसमें वे ऐसे उग आएँगे, जैसे सैलाब के झाग में घास उगती है। फिर नबीगण हर उस व्यक्ति के लिए सिफ़ारिश करेंगे, जो शुद्ध मन से यह गवाही देता था कि अल्लाह के सिवा कोई सत्य पूज्य नहीं है और उन्हें वहाँ से निकाल लाएँगे।” नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फ़रमाया : “फिर अल्लाह जहन्नम वालों पर दया करेगा और जिसके दिल में राय के दाने के बराबर भी ईमान होगा, उसे उससे निकाल लेगा।”
इसे इब्ने माजा ने रिवायत किया है । - इसे अह़मद ने रिवायत किया है।क़यामत के दिन सर्वशक्तिमान एवं महान अल्लाह जहन्नम के बीचों-बीच पुलसिरात को रख देगा। पुलसिरात पर बड़े कठोर काँटे लगे होंगे। फिर लोगों को उसके ऊपर से गुज़रने का आदेश दिया जाएगा, तो कुछ लोग उससे सही-सलामत गुज़र जाएँगे और उन्हें आग छूएगी तक नहीं, और ज़ख़्मी होकर ही सही, मगर पार निकल जाएँगे, जबकि कुछ जहन्नम में जा गिरेंगे। जब सर्वशक्तिमान एवं महान अल्लाह की ओर से बंदों का हिसाब लेने का काम पूरा हो जाएगा और जन्नत के हक़दार लोग जन्नत में तथा जहन्नम के हक़दार लोग जहन्नम में चले जाएँगे, तो जन्नत में जाने वाले मोमिनों को वहाँ कुछ ऐसे लोग दिखाई नहीं देंगे, जो दुनिया में उनके साथ नमाज़ पढ़ते थे, ज़कात देते थे, रोज़ा रखते थे, हज करते थे और जिहाद करते थे। अतः सर्वशक्तिमान एवं महान अल्लाह से कहेंगे : क्या बात है कि हम जन्नत के अंदर इन लोगों को अपने साथ नहीं देखते, जबकि वे दुनिया में हमारे साथ नमाज़ पढ़ते थे, ज़कात देते थे, रोज़ा रखते थे, हज करते थे और जिहाद करते थे? अल्लाह उनसे कहेगा : तुम जहन्नम चले जाओ, यदि वहाँ तुम्हें उनमें से कोई मिले, तो उसे वहाँ से निकाल लाओ। जब वहाँ जाएँगे, तो उनको अपने-अपने कर्म के अनुसार आग में फँसे हुए पाएँगे। किसी के दोनों क़दमों तक आग होगी, किसी की आधी पिंडली तक आग होगी, किसी के दोनों घुटनों तक आग होगी, किसी के आधे शरीर तक आग होगी, किसी की छाती तक आगी होगी और किसी की गरदन तक आग होगी। लेकिन आग किसी के चेहरे तक नहीं पहुँचेगी। तब यह लोग उनके बारे में सिफ़ारिश करेंगे। अतः उन्हें जहन्नम से निकाला जाएगा और उस जीवनदायी पानी में डाला जाएगा, जिसमें डुबकी लगाने वाला जीवित हो जाता है। अतः वे उसी तरह उग उठेंगे, जैसे उस स्थान में पौधे उग आते हैं, जहाँ से सैलाब गुज़रा हो। फिर नबीगण, हर उस व्यक्ति के बारे में, जो सच्चे दिल से अल्लाह के अतिरिक्त कोई सत्य पूज्य न होने की गवाही देता था, सिफारिश करेंगे। अतः इस प्रकार के लोगों को भी जहन्नम से निकाल लिया जाएगा। फिर जहन्नम में मौजूद लोगों पर अल्लाह की दया होगी और वह जहन्नम से हर उस व्यक्ति को निकाल बाहर करेगा, जिसके दिल में कण भर भी ईमान होगा।
अबू सईद ख़ुदरी (रज़ियल्लाहु अन्हु) से रिवायत है कि नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फ़रमाया : “(क़यामत के दिन) हमारा रब अपनी पिंडली खोलेगा, तो सभी मोमिन मर्द और औरतें सजदे में गिर पड़ेंगे। लेकिन, हर वह व्यक्ति ख़ड़ा रह जाएगा, जो दुनिया में दिखावे और शोहरत के लिए सजदा करता था। वह सजदा करने जाएगा, तो उसकी पीठ एक ही हड्डी की तरह सख्त बन जाएगी।”
इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है।पवित्र एवं उच्च अल्लाह क़यामत के दिन अपनी सम्मानित पिंडली खोगेला, तो सारे मोमिन, पुरुष हों कि स्त्री, सजदे में गिर पड़ेंगे। लेकिन मुनाफ़िक़ लोग, जो दुनिया में लोगों को दिखाने के लिए सजदे किया करते थे, उन्हें सजदे से रोक दिया जाएगा और उनकी पीठ को रीढ़ की हड्डियों के विभिन्न टुकड़ों में से एक टुकड़ा बना दिया जाएगा। वे न झुक सकेंगे और न सजदा कर सकेंगे। क्योंकि दुनिया में वे अल्लाह के लिए नहीं, बल्कि सांसारिक उद्देश्यों के तहत सजदे किया करते थे। ज्ञात हो कि यहाँ पिंडली का अर्थ भीषणता और बेचैनी आदि बयान करना उचित नहीं है। उसे अल्लाह के एक गुण के रूप में, उसकी कैफ़ियत बयान किए बिना, उपमा दिए बिना, उसके अर्थ के साथ छेड़छाड़ किए बिना और इस संबंध में आए हुए शब्द को अर्थविहीन बनाए बिना, मानना ज़रूरी है।
अब्दुल्लाह बिन अम्र बिन आस रज़ियल्लाहु अनहुमा से रिवायत है कि अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम जब मस्जिद में प्रवेश करते, तो फ़रमाया करते :«أعوذ بالله العظيم، وبوجهه الكريم، وسلطانه القديم، من الشيطان الرَّجِيم» (मैं महान अल्लाह की, उसके सम्मानित चेहरे की और उसकी सनातन सत्ता की शरण माँगता हूँ, धिक्कारे हुए शैतान से।) पूछा गया : बस इतना ही ? मैंने कहा : हाँ। आपने फ़रमाया : जब (मस्जिद में प्रवेश करने वाला) व्यक्ति यह दुआ पढ़ता है तो शैतान कहता है : आज यह सारा दिन मुझसे सुक्षित हो गया।
इसे अबू दावूद ने रिवायत किया हैअल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम जब मस्जिद में प्रवेश करते, तो कहते : मैं अल्लाह और उसकी विशेषताओं की शरण में आता हूँ। तथा उसके दाता चेहरे की शरण में आता हूँ। तथा उसके प्रभुत्व, शक्ति और प्रकोप की शरण में आता हूँ, जो अनादि एवं अनंत है। अल्लाह की रहमत (दया) से दूर किए गए और निकाले गए शैतान से। अर्थात : ऐ अल्लाह! मुझे शैतान के द्वारा डाले गए बुरे ख़्यालों एवं भटकाने के प्रयासों से सुरक्षित रख। क्योंकि यही इन्सान की गुमराही का सबब हैं। अब्दुल्लाह बिन अम्र रज़ियल्लाहु अनहुमा से पूछा गया : इतना ही? यानी क्या अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने बस इतना ही कहा है? उत्तर दिया : हाँ। जब मस्जिद में प्रवेश करने वाला व्यक्ति यह दुआ पढ़ लेता है, तो शैतान कहता है : इस प्रवेश करने वाले ने स्वयं को मुझसे दिनभर और रातभर के लिए सुरक्षित कर लिया।
मुग़ीरा बिन शोबा (रज़ियल्लाहु अन्हु) से मरफ़ूअन रिवायत है कि साद बिन उबादा (रज़ियल्लाहु अन्हु) ने कहा : यदि मैंने अपनी पत्नी के साथ किसी को देख लिया, तो तलवार की धार से फ़ौरन उसकी गरदन उड़ा दूँगा। यह बात अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) को पहुँची, तो आपने फ़रमाया : “क्या तुम्हें साद की ग़ैरत पर आश्चर्य हो रहा है? अल्लाह की क़सम! मैं उससे भी अधिक ग़ैरत वाला हूँ और अल्लाह मुझसे भी अधिक गैरत वाला है। अल्लाह की ग़ैरत के कारण ही उसने अश्लील कामों को हराम किया है। जो दिखाकर किए जाएँ उन्हें भी और जो छिपाकर किए जाएँ उन्हें भी। अल्लाह से अधिक ग़ैरत वाला कोई नहीं है और उससे अधिक क्षमायाचना को पसंद करने वाला कोई नहीं है। यही कारण है कि अल्लाह ने रसूलों को शुभ समाचार देने वाले और सावधान करने वाले बनाकर भेजा है। अल्लाह से अधिक प्रशंसा भी किसी को पसंद नहीं है। यही कारण है कि उसने जन्नत का वचन दिया है।”
इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है।साद बिन उबादा -रज़ियल्लाहु अनहु- ने फ़रमाया कि यदि मैंने किसी को अपनी पत्नी के साथ देख लिया, तो तलवार की धार से उसकी गरदन उड़ा दूँगा। यानी अविलंब उसका वध कर दूँगा। अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने भी उनकी इस बात का मौन समर्थन किया और बताया कि आप साद से अधिक ग़ैरतमंद हैं और अल्लाह आपसे भी अधिक ग़ैरतमंद है। यहाँ यह याद रहे कि अल्लाह की ग़ैरत उसके अन्य गुणों ही की तरह उसी के साथ खास है। उसकी ग़ैरत सृष्टि की ग़ैरत की जैसी नहीं, बल्कि क्रोध एवं प्रसन्नता जैसे उसके अन्य गुणों ही की तरह, जिनमें उसका कोई साझी नहीं होता, यह उसकी महानता के अनुरूप है। हदीस में आए हुए 'شخص' शब्द का असल अर्थ है, ऊँचा होना और ज़ाहिर होना। चूँकि अल्लाह हर चीज़ से ज़ाहिर, महान और बड़ा है, इसलिए इस शब्द को अल्लाह के लिए प्रयोग करने में अह्ल-ए-सुन्नत के यहाँ, जो अल्लाह और उसके रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- के कथन के अनुसार चलते हैं, कोई बुराई नहीं है। फिर अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने फ़रमाया : "अल्लाह की ग़ैरत के कारण ही उसने अश्लील कामों को हराम किया है। जो दिखाकर किए जाएँ उन्हें भी और जो छिपाकर किए जाएँ उन्हें भी।" यानी अल्लाह की इसी ग़ैरत का प्रभाव है कि उसने अपने बंदों को अश्लील कामों के निकट जाने से मना किया है। अश्लील कामों से मुराद ऐसे काम हैं, जो किसी भी पवित्र आत्मा एवं स्वस्थ विवेक पर भारी पड़ें। उदाहरण के तौर पर व्यभिचार को ले सकते हैं। हदीस में आए हुए शब्द 'ज़ाहिर' से मुराद वह कार्य है, जिसे खुल्लम-खुल्ला किया जाए और जो शरीर के अंगों द्वारा किया जाए, यद्यपि चुपके से ही क्यों न हो। जबकि 'बातिन' के अंदर भेद और दिल की बातें शामिल हैं। फिर फ़रमाया : "अल्लाह से अधिक क्षमायाचना को पसंद करने वाला भी कोई नहीं है। यही कारण है कि अल्लाह ने रसूलों को शुभ समाचार देने वाले और सावधान करने वाले बनाकर भेजा है।" इसका अर्थ यह है कि अल्लाह ने दंडित करने से पहले रसूलों को इसलिए प्रेषित किया, ताकि अपनी सृष्टि को सावधान कर दे और बिना चेतावनी दिए दंड देने के आरोप से स्वयं को बरी कर ले। कुछ इसी तरह की बात इस आयत में भी कही गई है : "रसूल शुभ समाचार देने वाले और सचेत करने वाले बनाकर भेजे गए हैं, ताकि रसूलों के पश्चात लोगों के पास अल्लाह के मुक़ाबले में अपने निर्दोष होने का कोई तर्क न रहे।" उसके बाद आपने फ़रमाया : "अल्लाह से अधिक प्रशंसा भी किसी को पसंद नहीं है। यही कारण है कि उसने जन्नत का वचन दिया है।" ऐसा उसकी असीम संपूर्णता के कारण है। क्योंकि अल्लाह इस बात को पसंद करता है कि उसके बंदे उसके अनुग्रह एवं उसकी दानशीलता पर उसकी प्रशंसा करें। इसी के लिए उसने बंदों को लाभान्वित होने को हर प्रकार की नेमत दी है और उनकी प्राप्ति पर शुक्र अदा करने से प्रसन्न भी होता है। लेकिन वे चाहे उसकी जितनी भी प्रशंसा करें, उसके गुणगान का हक़ अदा नहीं कर सकते। यही कारण है कि उसने स्वयं अपनी प्रशंसा की है और जन्नत का वचन दिया है, ताकि उसके बंदे उससे खूब माँगें, उसकी प्रशंसा करें और इस राह में जहाँ तक हो सके आगे बढ़ते रहें, क्योंकि अल्लाह का अंतिम पुरस्कार जन्नत ही है।
अबू मूसा अशअरी (रज़ियल्लाहु अन्हु) से रिवायत है कि नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फ़रमाया : “कोई भी व्यक्ति अथवा कोई भी वस्तु अल्लाह से अधिक किसी ऐसी कष्टदायक बात पर सब्र करने वाली नहीं है, जो उसे सुनाई दे। लोग अल्लाह की संतान होने की बात करते हैं, लेकिन इसके बावजूद अल्लाह उन्हें सुख-शांति और रोज़ी देता है।”
इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है।अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने फ़रमाया : "कोई भी व्यक्ति अल्लाह से अधिक सब्र करने वाला अथवा कोई भी वस्तु अल्लाह से अधिक सब्र करने वाली नहीं है।" यानी अल्लाह हर किसी से ज़्यादा सब्र करने वाला है। उसका एक नाम है 'अस-सबूर' है। यानी ऐसी हस्ती जो अवज्ञाकारियों को दंडित करने में जल्दबाज़ी से काम नहीं लेती। यह उसके एक और नाम 'अल-हलीम' (सहनशील) के अर्थ से निकट है। लेकिन 'अल-हलीम' के अंदर दंड से सुरक्षा का अर्थ अधिक पाया जाता है। आपने आगे फ़रमाया : "किसी कष्टदायक बात पर, जो उसे सुनाई दे।" यहाँ प्रयुक्त शब्द 'الأذى' का अर्थ है ऐसी बुराई और अप्रिय बात, जो बहुत महत्व एवं प्रभाव न रखती हो। अल्लाह ने स्वयं कहा है कि उसके बंदे उसकी हानि नहीं कर सकते। उसका फ़रमान है : "(हे नबी!) आपको वे काफ़िर उदासीन न करें, जो कुफ़्र में अग्रसर हैं। वे अल्लाह को कोई हानि नहीं पहुँचा सकेंगे।" तथा एक हदीस-ए-क़ुदसी में है : "ऐ मेरे बंदो! तुम मेरी हानि करने की स्थिति में नहीं पहुँच सकते कि मेरी हानि करो और मुझे लाभ पहुँचाने की स्थिति में भी नहीं जा सकते कि मुझे लाभ पहुँचाओ।" यहाँ यह स्पष्ट कर दिया गया है कि सृष्टि अल्लाह की हानि नहीं कर सकती, लेकिन उसे कष्ट दे सकती है। फ़रमाया : "लोग अल्लाह की संतान होने की बात करते हैं" यानी आदम की संतान अल्लाह को कष्ट देने का काम ऐसी बातों को उससे संबद्ध करने के माध्यम से करती है, जिनसे वह पाक है। जैसे उसके बेटा, समकक्ष एवं उपासना में साझी होने का दावा करना। यह ऐसी बातें हैं, जिनसे वह पवित्र है। आगे फ़रमाया : "लेकिन इसके बावजूद अल्लाह उन्हें सुख-शांति और रोज़ी देता है।" यानी अल्लाह कुव्यवहार का बदला उपकार से देता है। बंदे उसके साथ कुव्यवहार करते हुए उसकी कमी दिखाते हैं, उसे बुरा-भला कहते हैं, उसके बारे में ऐसी बात करते हैं जिससे वह पवित्र है, उसके रसूलों को झुठलाते हैं, उसके आदेश की मुख़ालफ़त करते हैं और उसकी मना की हुई बातों में संलिप्त होते हैं, लेकिन वह उनके साथ उपकार करते हुए उन्हें स्वस्थ रखता है, बीमारियों से शिफ़ा देता है, दिन-रात विपत्तियों से सुरक्षित रखता है और आकाश एवं धरती की सारी चीजो़ं की सेवा लेकर उन्हें रोज़ी देता। यह उच्चतम कोटि का धैर्य, सहनशीलता और उपकार है।
अबू सईद खुदरी (रज़ियल्लाहु अन्हु) से रिवायत है, वह कहते हैं कि हमने कहा : ऐ अल्लाह के रसूल! क्या हम क़यामत के दिन अपने रब को देख सकेंगे? आपने कहा : “जब आसमान साफ हो तो क्या सूरज और चाँद को देखने में तुम्हें कोई कठिनाई होती है?” हमने कहा : नहीं। आपने फ़रमाया : “उस दिन तुम्हें अपने रब को देखने में इससे अधिक कठिनाई नहीं होगी।” फिर फ़रमाया : “आवाज़ देने वाला आवाज़ देगा : जो गिरोह (दुनिया में) जिसकी इबादत करता था, वह उसी के साथ जाए। अतः, सलीब वाले अपनी सलीब के साथ, बुत परस्त अपने बुतों के साथ और (झूठे) माबूदों वाले अपने माबूदों के साथ हो जाएँगे और केवल वही लोग शेष रह जाएँगे, जो अल्लाह की इबादत करते थे, चाहे वे नेक हों या गुनहगार। इसी तरह कुछ बचेखुचे किताब वाले भी शेष रह जाएँगे। फिर जहन्नम को इस हाल में लाया जाएगा जैसे कि वह सराब हो और यहूदियों से कहा जाएगा : तुम किसकी इबादत करते थे? वे कहेंगे : हम अल्लाह के बेटे उज़ैर की पूजा करते थे। उनसे कहा जाएगा : तुम झूठ बोलते हो। अल्लाह की न तो पत्नी है और न पुत्र। अच्छा यह बताओ कि तुम चाहते क्या हो? वे कहेंगे : हम चाहते हैं कि तू हमें पानी पिलाए। कहा जाएगा : पी लो। चुनांचे, जब वे पानी पीने के लिए बढ़ेंगे, तो जहन्नम में गिर पड़ेंगे। फिर ईसाइयों से कहा जाएगा : तुम किसकी इबादत किया करते थे? उत्तर देंगे : हम अल्लाह के बेटे मसीह की इबादत करते थे। कहा जाएगा : तुम झूठ बोलते हो। अल्लाह की न पत्नी है और न बेटा। अच्छा, अब तुम क्या चाहते हो? उत्तर देंगे : हम चाहते हैं कि तू हमें पानी पिला दे। उनसे कहा जाएगा : ठीक है, पी लो। लेकिन जब पानी पीने के लिए बढ़ेंगे, तो जहन्नम में गिर पड़ेंगे। यहाँ तक कि केवल अल्लाह की इबादत करने वाले नेक और गुनहगार लोग बाक़ी रह जाएँगे। अतः, उनसे कहा जाएगा : तुम यहाँ क्यों रुके हुए हो, जबकि सब लोग जा चुके हैं? वे कहेंगे : हम उनसे उस समय अलग हो गए थे, जब हमें उनकी आज से कहीं अधिक ज़रूरत थी। हमने एक एलान करने वाले को यह एलान करते सुना कि जो गिरोह (दुनिया में) जिसकी इबादत करता था, वह उसके साथ चला जाए और इस समय हम अपने रब की प्रतीक्षा में हैं। आप (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फ़रमाया : तब सर्वशक्तिमान अल्लाह उनके सामने उससे भिन्न रूप में आएगा, जिस रूप में पहली बार उन लोगों ने उसे देखा था। अल्लाह कहेगा : मैं तुम्हारा रब हूँ। वे भी कहेंगे : अवश्य ही तू हमारा रब है। उस समय उससे केवल नबीगण ही बात करेंगे। अल्लाह कहेगा : क्या तुम्हारे और उसके बीच कोई निशानी है, जिसके माध्यम से तुम उसे पहचान सको? वे कहेंगे : हाँ! पिंडली। तब वह अपनी पिंडली खोलेगा, चुनांचे सारे मोमिन सजदे में गिर जाएँगे और केवल वही लोग शेष रह जाएँगे, जो (दुनिया में) दिखावे तथा शोहरत के सजदा करते थे। वे भी अन्य लोगों की तरह सजदा करने जाएँगे, लेकिन उनकी पीठ एक ही हड्डी की तरह बन जाएगी। फिर पुलसिरात को लाया जाएगा और जहन्नम के ऊपर रखा जाएगा।” हमने कहा : ऐ अल्लाह के रसूल! यह पुलसिरात क्या है? आपने कहा : “फिसलने और गिरने लायक़ एक पुल, जिसमें अंकुश और बड़े-बड़े और मुड़े हुए काँटे लगे होंगे, जो नज्द की सादान झाड़ी के काँटों की तरह होंगे। मोमिन उसपर से पलक झपकने की तरह, बिजली की रफ़तार से, हवा की चाल से, उम्दा घोड़े की रफ़तार से और ऊँट की रफ़तार से गुज़र जाएँगे। चुनांचे, कोई सुरक्षित गुज़र जाएगा, कोई खरोंच के साथ पार हो जागा और कोई जहन्नम में जा गिरेगा। यहाँ तक कि अंतिम व्यक्ति घिसटते हुए पार होगा। तुम लोग आज किसी हक़ के लिए जिस तरह मुझसे मुतालबा करते हो, उस दिन ईमान वाले सर्वशक्तिमान अल्लाह से उससे भी अधिक ज़ोर-शोर से मुतालबा करेंगे। फिर जब देखेंगे कि उनको मुक्ति मिल गई है, तो अपने भाइयों के बारे में कहेंगे : ऐ हमारे रब! हमारे भाइयों को मुक्ति प्रदान कीजिए, जो हमारे साथ नमाज़ पढ़ते थे, हमारे साथ रोज़ा रखते थे और हमारे साथ काम करते थे। उच्च एवं महान अल्लाह कहेगा : जाओ और जिसके दिल में राई के दाने के बराबर भी ईमान पाओ, उसे निकाल लाओ। अल्लाह उनके चेहरों को जहन्नम की आग पर हराम कर देगा। वे उनके पास आएँगे, तो कोई अपने क़दमों तक आग में फँसा होगा और कोई आधी पिंडली तक। जिन्हें वे पहचान पाएँगे, उन्हें निकाल लेंगे। फिर लौटकर जाएँगे, तो अल्लाह कहेगा : फिर जाओ और जिसके दिल में राई के दाने के समान भी ईमान पाओ, उसे निकाल लो। वे जाएँगे और जिन्हें पहाचन सकेंगे, उन्हें निकाल लाएँगे।” अबू सईद ख़ुदरी (रज़ियल्लाहु अन्हु) कहते हैं : यदि तुम्हें मेरी बात सच्ची न लगे, तो यह आयत पढ़ो : {निस्संदेह अल्लाह तनिक भी किसी पर अत्याचार नहीं करता तथा यदि कोई नेकी होती है, तो उसे अल्लाह बढ़ाता है।} फिर नबी, फरिश्ते और मोमिन सिफ़ारिश करेंगे तथा सर्वशक्तिमान अल्लाह कहेगा : अब मेरी सिफ़ारिश शेष रह गई है। चुनांचे जहन्नम से एक मुट्ठी उठाएगा और ऐसे लोगों को निकालेगा, जो जल चुके होंगे। फिर उन्हें जन्नत के सामने वाली नहर में डाला जाएगा, जिसे आब-ए-हयात कहा जाता है। वे उसके दोनों किनारों पर इस प्रकार उग उठेंगे, जैसे सैलाब के झाग में पौधे उग आते हैं। तुमने किसी चट्टान के किनारे और पेड़ के किनारे पौधों को उगते देखा होगा। उनका जो भाग सूर्य की ओर होता है, वह हरा होता है और जो साए की ओर होता है, वह सफ़ेद होता है। चुनांचे वे ऐसे निकलेंगे, जैसे मोती हों। फिर उनकी गरदनों पर मुहरें लगा दी जाएँगी और वे जन्नत में प्रवेश करेंगे। उन्हें देख जन्नत वाले कहेंग : ये दयावान अल्लाह के द्वारा मुक्त किए हुए लोग हैं। अल्लाह ने इन्हें इनके द्वारा किए गए किसी कार्य और इनके द्वारा आगे भेजी गई किसी भलाई के बिना ही जन्नत में दाख़िल किया है। उनसे कहा जाएगा : तुम्हारे लिए वह है, जो तुम देख रहे हो और उसके साथ उसके समान भी।"
इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है।अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- के कुछ साथियों ने आपसे पूछा कि क्या क़यामत के दिन हम अपने पालनहार को देख सकेंगे? तो आपने उनको उत्तर दिया कि हाँ, तुम क़यामत के दिन अपने पालनहार को उसी तरह देख सकोगे, जैसे दोपहर के समय सूरज को और चौदहवीं की रात में चाँद को देखते हो। न भीड़-भाड़ होगी, न टकराव। याद रहे कि यहाँ तशबीह स्पष्टता तथा संदेह, कठिनाई और टकराव न होने में दी गई है। यहाँ समानता एक देखने की दूसरे देखने से बताई गई है, एक देखी जाने वाली चीज़ की दूसरी देखी जाने वाली चीज़ से नहीं। ज्ञात हो कि यह देखना उस देखने से भिन्न है, जिसका सौभाग्य अल्लाह के वलियों को जन्नत में सम्मान के रूप में प्राप्त होगा। यह दरअसल इस बात का अंतर करने के लिए है कि किसने अल्लाह की इबादत की और किसने उसके अतिरिक्त किसी और की इबादत की। फिर अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने बताया कि क़यामत के दिन एक पुकारने वाला पुकारेगा कि जो अल्लाह के अतिरिक्त किसी और की इबादत करता था, वह उसके साथ हो जाए। एक अन्य सहीह रिवायत में है कि स्वयं पवित्र अल्लाह ही पुकारेगा। अतः जो लोग अल्लाह को छोड़ बुतों की पूजा करते थे उन्हें एकत्र किया जाएगा और जहन्नम की आग में डाल दिया जाएगा। अब केवल वही लोग बचेंगे जो अल्लाह की इबादत करते थे, चाहे आज्ञाकारी हों या अवज्ञाकारी। इसी तरह बचे-खुचे यहूदी एवं ईसाई भी रह जाएँगे। जबकि अधिकतर, बल्कि समूचे यहूदियों एवं ईसाइयों को उनके बुतों के साथ जहन्नम में डाल दिया जाएगा। फिर जहन्नम को लोगों के सामने लाया जाएगा, जो सराब (मरीचिका) की तरह दिखाई देगी। चुनांचे यहूदियों को लाया जाएगा और उनसे कहा जाएगा कि तुम किसकी इबादत करते थे? उत्तर देंगे कि हम अल्लाह के बेटे उज़ैर की इबादत करते थे। इसपर उनसे कहा जाएगा : तुम्हारी यह बात झूठी है कि उज़ैर अल्लाह के बेटे हैं। अल्लाह की न तो पत्नी है और न संतान। फिर उनसे कहा जाएगा कि तुम चाहते क्या हो? उत्तर देंगे कि हम पानी पीना चाहते हैं। उस दिन इतनी बेचैनियों एवं भयावह कठिनाइयों का सामना होगा कि उन्हें सबसे पहले पानी ही की तलब होगी। चूँकि जहन्नम को उनके सामने इस तरह लाया जाएगा कि वह पानी की तरह दिखाई पड़ेगी, इसलिए उनसे कहा जाएगा कि तुम जिसे पानी समझते हो उसके पास जाओ और पी लो। जाएँगे, तो उन्हें जहन्नम मिलेगी, जो इतनी तेज़ जल रही होगी और उससे इतनी भीषण लपटें उठ रही होंगी कि मानो उसका एक भाग दूसरे भाग को तोड़ रहा हो। यहूदियों के बाद इसी तरह की बात ईसाइयों से भी की जाएगी।यहाँ तक कि जब केवल एक अल्लाह की इबादत करने वाले, आज्ञाकारी हों कि अवज्ञारी, ही रह जाएँगे, तो उनसे कहा जाएगा कि जब सब लोग जा चुके हैं, तो तुम यहाँ क्यों खड़े हो? वे उत्तर देंगे : हम तो लोगों से दुनिया ही में अलग हो गए थे और आज उनसे अलग होने की ज़रूरत और अधिक है। उन लोगों ने अल्लाह की अवज्ञा और उसके आदेश की अवहेलना की, तो अल्लाह की प्रसन्नता की प्राप्ति के लिए उनसे घृणा करते हुए और अपने पालनहार के आज्ञापालन को प्राथमिकता देते हुए हमने उनसे दुश्मनी कर ली। इस समय हम अपने पालनहार की प्रतीक्षा में हैं, जिसकी हम दुनिया में इबादत किया करते थे। चुनांचे अल्लाह उनके सामने उससे भिन्न रूप से आएगा, जिस रूप में उन लोगों ने उसे पहली बार देखा था। यहाँ इस बात का स्पष्ट उल्लेख है कि उन लोगों ने अल्लाह को एक ऐसे रूप में देखा था, जिस रूप में वे उसे पहचानते थे। इस रूप की गलत-सलत व्याख्या करना उचित नहीं है। बल्कि उसकी कैफ़ियत बताए बिना, उसकी उपमा दिए बिना, उसके अर्थ के साथ छेड़-छाड़ किए बिना और प्रयुक्त शब्द को अर्थविहीन बनाए बिना उसपर ईमान रखना ज़रूरी है। जब अल्लाह सामने आएगा, तो उनसे कहेगा : मैं तुम्हारा पालनहार हूँ। इससे प्रसन्न होकर वे कहेंगे : सचमुच तुम हमारे पालनहार हो। उस समय पवित्र अल्लाह केवल नबियों से बात करेगा। उनसे कहेगा कि क्या तुम्हारे और उसके बीच कोई निशानी निर्धारित है, जिससे तुम उसे पहचान लो? वे उत्तर देंगे कि हाँ है, और वह निशानी पिंडली है। चुनांचे पवित्र अल्लाह अपनी पिंडली खोलेगा और इससे ईमान वाले उसे पहचान लेंगे तथा सजदे में गिर पड़ेंगे। लेकिन इसके विपरीत मुनाफ़िक़ लोग जो अल्लाह की इबादत दिखाने के लिए किया करते थे, सजदे से रोक दिए जाएँगे। उनकी पीठ को एक तख़्ते की भाँति बना दिया जाएगा तथा वे झुकने एवं अल्लाह की इबादत करने की क्षमता खो देंगे। उन्हें यह सज़ा इसलिए मिलेगी कि वे दुनिया में सच्चे मन से अल्लाह को सजदा नहीं करते थे। उनका सजदा सांसारिक उद्देश्यों से प्रेरित होता था। इस हदीस में अल्लाह की पिंडली होने का उल्लेख है। दरअसल यह तथा इस प्रकार की अन्य हदीसें अल्लाह तआला के इस फ़रमान की तफ़सीर हैं : "उस दिन पिंडली खोली जाएगी और उन्हें सजदा करने को कहा जाएगा, लेकिन वे सजदा नहीं कर सकेंगे।" ज्ञात हो कि यहाँ पिंडली का अर्थ कठिनाई एवं बेचैनी की भीषणता बताना उचित नहीं है। इसके साथ ही सुन्नत से भी पिंडली को साबित करना वाजिब है और आयत के बारे में यही कहना अधिक उत्तम और सही है कि इससे मुराद अल्लाह की पिंडली ही है। लेकिन हम उसकी न तो कैफ़ियत बयान करेंगे, न उपमा देंगे, न उसके अर्थ के साथ छेड़-छाड़ करेंगे और न प्रयुक्त शब्द को अर्थविहीन बनाएँगे। फिर पुल-सिरात को लाकर जहन्नम के बीचों-बीच रख दिया जाएगा। इसमें इतनी फिसलन होगी कि क़दम स्थिर नहीं रह सकेंगे। इस पुल पर अंकुश लगे होंगे, ताकि जिसे मन हो, उचक लिया जा सके। इसमें मोटे-मोटे और बड़े-बड़े काँटे भी होंगे। इस पुल से लोग अपने ईमान एवं कर्म के अनुसार गुज़रेंगे। जिसका ईमान संपूर्ण एवं कर्म सत्य तथा निष्ठा से परिपूर्ण होगा, वह जहन्नम के ऊपर से पलक झपकते गुज़र जाएगा। जबकि जिसका ईमान एवं कर्म इससे निम्न स्तर का होगा, वह अपने ईमान एवं कर्म के अनुसार गुज़रेगा, जिसका वर्णन हदीस में मौजूद है। हदीस में उसका उदाहरण बिजली तथा वायु आदि से दिया गया है। दरसअल पुल-सिरात पर गुज़रने वाले लोग चार प्रकार के होंगे : पहला : ऐसे लोग जिन्हें किसी प्रकार का कष्ट नहीं होगा। इस प्रकार के लोग भी उसपर तेज़ी से गुज़रने के मामले में अलग-अलग श्रेणियों में विभक्त होंगे, जिसका उल्लेख हदीस में है। दूसरा : ऐसे लोग जो खरोंच तथा हल्के ज़ख़्म के साथ उसे पार करने में सफल हो जाएँगे। यानी उन्हें जहन्नम की लपट की तपिश सहनी होगी या सिरात पर लगे अंकुशों के ज़ख़्म सहने पड़ेंगे। तीसरा : ऐसे लोग जिन्हें ताक़त से जहन्नम में फेंक दिया जाएगा। चौथा : ऐसे लोग जो सिरात से घिसटकर पार होंगे और उनके कर्म इतने दुर्बल होंगे कि उन्हें उठाने में असमर्थ होंगे। फिर अल्लाह के रसूल -सल्ल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने फ़रमाया : "तुम लोग आज किसी हक़ का जिस तरह मुझसे मुतालबा करते हो, उस दिन ईमान वाले सर्वशक्तिमान अल्लाह से उससे भी अधिक ज़ोर-शोर से मुतालबा करेंगे।" यह दरअसल अल्लाह की असीम कृपा एवं अशेष दया का एक नमूना है कि वह अपने मोमिन बंदों को अपने उन भाइयों की क्षमा लिए सिफ़ारिश करने का अवसर देगा, जो अपने उन अपराधों के कारण जहन्नम में डाल दिए गए, जिनके द्वारा वे अपने पालनहार से टकराने का प्रयास करते थे। अल्लाह की कृपा देखिए कि इसके बावजूद वह जहन्नम की यातना तथा सिरात की भयावहता से मुक्ति प्राप्त करने वाले ईमान वालों के दिलों में यह बात डाल देगा कि वे उनकी क्षमा का मुतालबा करें और उनकी सिफ़ारिश करें। फिर, उन्हें इसकी अनुमति भी देगा। यह पवित्र एवं उच्च अल्लाह की कृपा एवं करुणा के अतिरिक्त कुछ और नहीं है। "वे कहेंगे : ऐ हमारे रब! हमारे भाइयों को मुक्ति प्रदान कीजिए, जो हमारे साथ नमाज़ पढ़ते थे, हमारे साथ रोज़ा रखते थे और हमारे साथ काम करते थे।" इसका विपरीत अर्थ यह हुआ कि जो लोग मुसलमानों के साथ नमाज़ नहीं पढ़ते और उनके साथ रोज़ा नहीं रखते, वे उनकी सिफ़ारिश नहीं करेंगे और अपने पालनहार से उनकी क्षमा का मुतालबा भी नहीं करेंगे। इससे प्रमाणित होता है कि यहाँ जिन लोगों की क्षमा मोमिनों द्वारा पाक प्रभु से माँगी जा रही है, वे मोमिन एवं एकेश्वरवादी थे, क्योंकि वे कह रहे हैं : "हमारे भाइयों को मुक्ति प्रदान कीजिए, जो हमारे साथ नमाज़ पढ़ते थे, हमारे साथ रोज़ा रखते थे।" लेकिन वे कुछ गुनाहों में संलिप्त हो गए थे, जिनके कारण उन्हें जहन्नम जाना पड़ा था। इससे इस उम्मत के दो पथभ्रष्ट संप्रदायों -खवारज एवं मुतज़िला का खंडन होता है, जो कहते हैं कि जो व्यक्ति जहन्नम में प्रवेश कर गया, वह उससे निकल नहीं सकेगा और कबीरा गुनाह करने वाला व्यक्ति जहन्नम में रहेगा। चुनांचे उनसे अल्लाह कहेगा : जाओ और जिसके दिल में दीनार के बराबर भी ईमान हो, उसे जहन्नम से निकाल लाओ। अल्लाह आग को इस बात की अनुमति नहीं देगा कि उनके चेहरों को खा सके। ये लोग उनके पास जाएँगे, तो देखेंगे कि किसी के क़दमों तक आग है और किसी की आधी पिंडली तक आग है। वे जिनको पहचान सकेंगे, उन्हें निकाल लेंगे। जब लौटकर जाएँगे, तो अल्लाह उनसे कहेगा : जाओ और जिसके दिल में आधे दीनार के बराबर भी ईमान हो, उसे भी निकाल लाओ। वे जाएँगे और जिसे पहचान सकेंगे, उसे निकाल लाएँगे। जब अल्लाह के पास पहुँचेगे, तो अल्लाह कहेगा : जाओ और जिसके दिल में कण भर भी ईमान हो, उसे भी निकाल लाओ। वे जाएँगे और जिसे पहचान सकेंगे, उसे निकाल लेंगे। इतनी हदीस सुनाने के बाद अबू सईद ख़ुदरी -रज़ियल्लाहु अनहु- ने कहा : यदि तुम्हें मेरी बात सच्ची न लग रही हो, तो यह आयत पढ़ लो : "अल्लाह कण भर भी किसी पर अत्याचार नहीं करता, यदि कुछ भलाई (किसी ने) की हो, तो (अल्लाह) उसे अधिक कर देता है।" अबू सईद ख़ुदरी -रज़ियल्लाहु अनहु- ने इस आयत को प्रमाण के तौर पर इस रूप में प्रस्तुत किया है कि बंदे के दिल में यदि कण भर भी ईमान हो, तो अल्लाह उसे अधिक करता है और उसके सबब मुक्ति प्रदान करता है। फिर फ़रमाया : "फिर नबी, फरिश्ते और मोमिन सिफ़ारिश करेंगे" यह इस बात का प्रमाण है कि यह तीन प्रकार के लोग सिफ़ारिश करेंगे। लेकिन यह जानना ज़रूरी है कि किसी भी सिफ़ारिशकर्ता की सिफ़ारिश उसी समय हो पाएगी, जब अल्लाह उसे सिफ़ारिश की अनुमति देगा, जैसा कि पीछे गुज़र चुका है कि ईमान वाले अपने पालनहार से अपने भाइयों की क्षमा माँगेंगे, तो अल्लाह उन्हें अनुमति देगा और कहेगा कि जाओ और जिसके दिल में एक दीनार के बराबर भी ईमान हो उसे निकाल लाओ। आपने कहा : "तथा सर्वशक्तिमान अल्लाह कहेगा : अब मेरी सिफ़ारिश शेष रह गई है। चुनांचे जहन्नम से एक मुट्ठी उठाएगा और ऐसे लोगों को निकालेगा, जो जल चुके होंगे।" यहाँ अल्लाह की सिफ़ारिश से मुराद उसका इन यातनाग्रस्त लोगों पर दया करना है। आपके शब्द : "एक मुट्ठी उठाएगा" से अल्लाह की मुट्ठी की सिद्धि होती है। अल्लाह की किताब और उसके रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- की सुन्नत के अंदर बहुत-से स्पष्ट प्रमाण मौजूद हैं, जिनसे अल्लाह के हाथ तथा मुट्ठी का सबूत मिलता है। लेकिन गलत अर्थ निकालने वाले और अर्थ से छेड़-छाड़ करने वाले लोग इन स्पष्ट प्रमाणों को ग्रहण नहीं करते और इनपर ईमान नहीं रखते। मगर, एक समय आएगा, जब उन्हें पता चल जाएगा कि अल्लाह और उसके रसूल की कही हई बात ही सत्य है और इस संदर्भ में वे पथभ्रष्टता के शिकार हुए हैं। अल्लाह जहन्नम से एक मुट्ठी उठाएगा और ऐसे लोगों को निकालेगा, जो जलकर कोयला हो चुके थे। आपने फ़रमाया : "फिर उन्हें जन्नत के सामने वाली नहर में डाला जाएगा, जिसे आब-ए-हयात (जीवन जल) कहा जाता है। वे उसके दोनों किनारों पर इस प्रकार उग उठेंगे।" यानी उन्हें जन्नत के आस-पास स्थित एक नहर में डाला जाएगा, जिसके पानी आब-ए-हयात के तौर पर जाना जाएगा। यानी ऐसा पानी जिसमें डुबकी लगाने वाला जीवित हो जाए। इसमें डाले जाने से इन लोगों के मांस, आँखें और हड्डियाँ जो आग में जल चुकी थीं, इस नदी के किनारे उग आएँगी, "जैसे सैलाब में आई हुई मट्टी में पौधे उग आते हैं। तुमने किसी चट्टान के किनारे और पेड़ के किनारे पौधों को उगते देखा होगा। उनका जो भाग सूर्य की ओर होता है, वह हरा होता है और जो साए की ओर होता है, वह सफ़ेद होता है।" इससे तात्यपर्य यह है कि उनके मांस तेज़ी से निकल आएँगे। क्योंकि सैलाब में आई हुई मट्टी में पौधे बड़ी तेज़ी से उगते हैं। यही कारण है कि उनका छाँव की ओर वाला भाग सफ़ेद होता है और धूप की ओर वाला भाग हरा होता है। क्योंकि वह कमज़ोर तथा कोमल होता है। लेकिन इससे यह लाज़िम नहीं आता कि यह लोग भी इसी प्रकार उगेंगे और उसका जन्नत की ओर वाला भाग सफ़ेद और जहन्नम की ओर वाला भाग हरा होगा। बल्कि यहाँ मुराद तेज़ी से निकलने तथा कोमलता में उन लोगों की उक्त पौधों से समानता दिखाना है। यही कारण है कि आगे फ़रमाया : "चुनांचे वे ऐसे निकलेंगे, जैसे मोती हों।" यानी उनकी त्वचा मोती की तरह साफ़-सुथरी और सुंदर होगी। आगे आपने कहा : "फिर उनकी गरदनों पर मुहरें लगा दी जाएँगी।" एक अन्य रिवायत के अनुसार इन मुहरों में लिखा रहेगा : "दयावान अल्लाह के द्वारा मुक्त किए हुए लोग" उसके बाद फ़रमाया : "और वे जन्नत में प्रवेश करेंगे। उन्हें देख जन्नत वाले कहेंग : ये दयावान अल्लाह के द्वारा मुक्त किए हुए लोग हैं। अल्लाह ने इन्हें इनके द्वारा किए गए किसी कार्य और इनके द्वारा आगे भेजी गई किसी भलाई के बिना ही जन्नत में दाख़िल किया है।" यानी उन्होंने दुनिया में कोई सत्कर्म नहीं किया था। उनकी एकमात्र पूंजी ईमान था। यानी इस बात की गवाही देना कि अल्लाह के अतिरिक्त कोई सत्य पूज्य नहीं है और रसूलों पर ईमान। आपने कहा कि फिर उनसे कहा जाएगा : " तुम्हारे लिए वह है, जो तुम देख रहे हो और उसके साथ उसके समान भी।" इससे ऐसा प्रतीत होता है कि यह लोग जन्नत के खाली स्थानों में प्रवेश करेंगे, यही कारण है कि इनसे यह बात कही जाएगी।
अनस बिन मालिक (रज़ियल्लाहु अन्हु) से रिवायत है कि नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फ़रमाया : “जहन्नम निरंतर कहता रहेगा कि क्या इससे अधिक है? यहाँ तक कि सर्वशक्तिमान अल्लाह उसमें अपना पैर रख देगा, तो कहेगा : तेरी इज़्जत की क़सम! बस काफ़ी है, बस काफ़ी है! फिर जहन्नम ख़ुद में सिमट जाएगा।”
इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है।इस हदीस-ए-क़ुदसी में अल्लाह ने बताया है कि वह जहन्नम से कहेगा कि क्या तू भर गई है? चूँकि अल्लाह ने जहन्नम को वचन दे रखा है कि वह उसे जिन्नात एवं इन्सान से भर देगा। अतः वह जिन लोगों को चाहेगा, उन लोगों को उसमें डालने का आदेश देता जाएगा और उन्हें उसमें डाला जाता रहेगा, और वह कहती जाएगी कि क्या और भी डालने के लिए कुछ है? यह सिलसिला उस समय थमेगा, जब अल्लाह उसमें अपना क़दम रख देगा और वह कहेगी कि यह मेरे लिए काफ़ी है। इसके बाद उसे समेट दिया जाएगा। याद रहे कि क़दम के बारे में यह बताना कि इससे मुराद वह लोग हैं, जिन्हें अल्लाह पहले जहन्नम की ओर भेजेगा, या फिर इसके अतिरिक्त अन्य कोई अनुचित अर्थ बताना जायज़ नहीं है। बल्कि क़दम को अल्लाह की एक विशेषता के रूप में उसके अर्थ के साथ छेड़-छाड़ किए बिना, इस शब्द को अर्थविहीन बनाए बिना, इसकी कैफ़ियत बताए बिना और उपमा दिए बिना मानना ज़रूरी है।
अबू सईद ख़ुदरी रज़ियल्लाहु अन्हु से वर्णित है, वह कहते हैं अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फ़रमाया है : “अल्लाह तआला जन्नतियों से फ़रमाएगा : ऐ जन्नत वालो! वो कहेंगे : पूरे ध्यान से हाज़िर हैं ऐ हमारे रब और सदा तेरी मेहरबानी के मोहताज हैं। अल्लाह तआला फ़रमाएगा : अब तुम राज़ी हो? वो कहेंगे : क्या अब भी ख़ुश न होंगे, जबकि तूने हमें ऐसी-ऐसी नेमतें प्रदान की हैं, जो अपनी सारी मख़लूक़ में से किसी और को नहीं दीं? फिर अल्लाह तआला इरशाद फ़रमाएगा : क्या मैं तुम्हें एक ऐसी चीज़ न दूँ, जो इन सबसे भी बढ़कर है? वो कहेंगे : ऐ अल्लाह! अब इन सबसे भी बढ़कर और कौन सी चीज़ हो सकती है? तब अल्लाह तआला फ़रमाएगा : मैं अपनी प्रसन्नता तुम्हें प्रदान करता हूँ। अब कभी मैं तुमसे नाराज़ नहीं हूँगा।”
इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया हैअल्लाह के नबी सल्लल्लम ने बताया है कि जन्नती लोग जब जन्नत में होंगे, तो अल्लाह उनसे कहेगा : ऐ जन्नतियो! वे उत्तर देंगे : हम उपस्थित हैं ऐ हमारे पालनहार! सारी भलाइयाँ तेरे ही हाथों में हैं। अल्लाह उनसे पूछेगा : क्या अब तुम ख़ुश हो? वे जवाब देंगे : हम बिलकुल खुश हैं। भला हम ख़ुश क्यों न रहें, जबकि तूने हमें वह सब कुछ दे दिया है, जो तूने अपनी किसी भी सृष्टि को नहीं दिया है। यह जवाब सुनकर अल्लाह पूछेगा : क्या मैं तुम्हें इससे बेहतर चीज़ न दूँ? जन्नती जवाब देंगे : ऐ मेरे पालनहार! इससे बेहतर चीज़ भला और क्या हो सकती है? अल्लाह कहेगा : मैं तुम्हें अपनी शाश्वत प्रसन्नता और रज़ामंदी प्रदान करता हूँ। इसके बाद मैं तुमसे कभी नाराज़ नहीं होऊँगा।