





























Hadeeth Cards
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बुरैदा रज़ियल्लाहु अनहु से रिवायत है, वह कहते हैं कि अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने फ़रमाया है : "जिसने अमानत की क़सम खाई, वह हममें से नहीं है।"
इस ह़दीस़ को अबू दावूद और अह़मद ने रिवायत किया हैअल्लाह के नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने अमानत की क़सम खाने से मना और सावधान किया है तथा बताया है कि ऐसा करने वाला हम में से नहीं है।
अबू हुरैरा -रज़ियल्लाहु अनहु- का वर्णन है, वह कहते हैं : हम कुछ लोग अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- के आस-पास बैठे हुए थे, तथा हमारे साथ अबू बक्र एवं उमर -रज़ियल्लाहु अनहुमा- भी उपस्थित थे। इसी बीच, अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- हमारे बीच से उठकर चले गए और इतनी देर कर दी कि हमें भय होने लगा कि कहीं आप हमसे रोक दिए गए न हों। अतः, हम घबराकर उठे और हम उठ गए, सबसे पहला व्यक्ति मैं ही था, जो घबराया। मैं अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- की तलाश में निकल पड़ा, यहाँ तक कि अंसार के बनू नज्जार क़बीले के एक बाग में जा पहुँचा, मैं द्वार की तलाश में बाग के चारों ओर चक्कर लगाता रहा, लेकिन द्वार न मिल सका, अचानक एक छोटी-सी नाली दिखी, जो बाहर के एक कुएँ से बाग के अंदर जा रही थी, अतः, मैंने अपने शरीर को समेटा और (नाली से अंदर प्रवेश करके) अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- के यहाँ जा पहुँचा। (मुझे देखकर) आपने फ़रमाया : "अबू हुरैरा!" मैंने कहा : हाँ, ऐ अल्लाह के रसूल! आपने फ़रमाया : "यहाँ क्या कर रहे हो?" मैंने कहा : आप हमारे बीच उपस्थित थे, इसी बीच आप निकल गए और वापस आने में देर कर दी, अतः हमें भय हुआ कि कहीं आपको हमसे रोक न लिया गया हो।, हम घबराकर उठे, सबसे पहले मुझे ही घबराहट हुई थी, अतः, मैं इस बाग के पास पहुँच गया, यहाँ (एक नाली से) अपने शरीर को इस तरह समेटकर अंदर आया, जैसे लोमड़ी अपने शरीर को समेटती है, और लोग भी मेरे पीछे-पीछे आ रहे हैं। यह सुन आपने मुझे अपने दोनों जूते प्रदान करते हुए फ़रमाया : "ऐ अबू हुरैरा! मेरे इन दो जूतों को लेकर जाओ और इस बाग के बाहर जिससे भी भेंट हो, जो दिल के यक़ीन के साथ इस बात की गवाही देता हो कि अल्लाह के सिवा कोई सत्य पूज्य नहीं है, उसे जन्नत का शुभ समाचार सुना दो।" (मैं वापस होने लगा,) तो सबसे पहले मेरी मुलाक़ात उमर से हुई। उन्होंने मुझसे पूछा : ऐ अबू हुरैरा! ये जूते कैसे हैं? मैंने उत्तर दिया : ये दोनों जूते अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- के हैं, मुझे आपने अपने इन दोनों जूतों के साथ इस काम के लिए भेजा है कि जो व्यक्ति मुझे हार्दिक विश्वास के साथ इस बात की गवाही देता हुआ मिले कि अल्लाह के अतिरिक्त कोई सत्य पूज्य नहीं है, उसे मैं जन्नत का सुसमाचार सुना दूँ। यह सुन उमर -रज़ियल्लाहु अनहु- ने मेरे सीने पर इस ज़ोर से मुक्का मारा कि मैं नितंब के बल पर गिर पड़ा। उन्होंने कहा : अबू हुरैरा तुम वापस जाओ। चुनांचे मैं अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- के पास वापस चला गया। मैं घबराया हुआ और रोने जेसी सूरत बनाकर खड़ा हो गया। पीछे-पीछे उमर भी पहुँच गए। (मुझे देख) आपने पूछा "अबू हुरैरा! बात क्या है?" मैंने उत्तर दिया : मेरी मुलाक़ात उमर से हुई और मैंने उन्हें वह बात सुनाई, जिसके साथ आपने मुझे भेजा था, तो उन्होंने मेरे सीने पर ऐसा मुक्का मार दिया कि मैं नितंब के बल जा गिरा। उसके बाद उन्होंने मुझे लौट जाने के लिए कहा। यह सुन अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने पूछा : "ऐ उमर! तुमने इस तरह का काम क्यों किया?" उन्होंने उत्तर दिया : ऐ अल्लाह के रसूल! आपर मेरे माता-पिता क़ुर्बान हों, क्या आपने अबू हुरैरा को अपने दोनों जूतों के साथ इस काम के लिए भेजा था कि जो व्यक्ति उन्हें हार्दिक विश्वास के साथ इस बात की गवाही देते हुए मिल जाए कि अल्लाह के अतिरिक्त कोई सत्य पूज्य नहीं है, उसे वह जन्नत का सुसमाचार सुना दें? आपने उत्तर दिया : "हाँ!" उन्होंने कहा : आप ऐसा न करें। क्योंकि मुझे डर है कि लोग इसी पर भरोसा करके बैठ जाएँगे। आप उन्हें अमल करने दीजिए। यह सुन अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने फ़रमाया : "ठीक है, उन्हें (अपने हाल पर) रहने दो।"
इसे मुस्लिम ने रिवायत किया हैअल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- अपने कुछ साथियों के साथ बैठे हुए थे। सभा में अबू बक्र और उमर -रज़ियल्लाहु अनहुमा- जैसे सहाबा भी मौजूद थे। इसी बीच आप उठकर कहीं चले गए और देर तक वापस नहीं आए, तो सहाबा के अंदर यह आशंका पैदा हो गई कि कहीं आपके साथ कोई अनहोनी न घट गई हो। दुश्मनों ने आपको गिरफ़्तार न कर लिया हो या कुछ और न घटित हुआ हो। ऐसे में सहाबा घबराए और इधर-उधर ढूँढने निकल पड़े। सबसे पहले अबू हुरैरा -रज़ियल्लाहु अनहु-घबराए हुए निकले। वह ढूँढते हुए बनू नज्जार के एक बाग़ तक पहुँचे और इस आशा में बाग़ के चारों ओर चक्कर लगाने लगे कि शायद कोई खुला द्वार मिल जाए, द्वार तो नहीं मिला, अल्बत्ता एक छोटी-सी नाली मिली, जिससे पानी अंदर जाता था। वह अपने शरीर को समेटकर नाली से अंदर गए और देखा कि वहाँ अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- मौजूद हैं। उन्हें देख आपने पूछा : अबू हुरैरा तुम? जवाब दिया : जी मैं। पूछा : तुम यहाँ क्या कर रहे हो? जवाब दिया : आप हमारे साथ मौजूद थे। फिर निकल गए और देर तक वापस नहीं आए, तो हमें यह आशंका सताने लगी कि कहीं आपको हमसे रोक न लिया गया हो और हमारे अन्दर डर पैदा हुआ। इसलिए हम आपको ढूँढने निकल पड़े। सबसे पहले मैं ही डर कर निकला। मैं इस बाग़ के पास आया और लौमड़ी की तरह शरीर को समेटकर अंदर दाख़िल हुआ। अन्य लोग भी मेरे पीछे-पीछे आ रहे हैं। यह सुन अल्लाह के नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने उनको उनके सच्चे होने की निशानी के तौर पर अपने दोनों जूते दे दिए और उनसे कह दिया कि मेरे इन दोनों जूतों को लेकर जाओ और इस बाग़ के बाहर जिसे भी हार्दिक विश्वास के साथ इस बात की गवाही देते हुए पाओ कि अल्लाह के सिवा कोई सत्य पूज्य नहीं है, उसे जन्नती होने का सुसमाचर सुना दो। अबू हुरैरा -रज़ियल्लाहु अनहु- निकले, तो सबसे पहले उमर -रज़ियल्लाहु अनहु- मिले। उन्होंने पूछा : अबू हुरैरा! ये दोनों जूते कैसे हैं? उत्तर दिया : ये दोनों जूते अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- के हैं। आपने मुझे अपने दोनों जूतों के साथ इस काम के लिए भेजा है कि जो व्यक्ति मुझे हार्दिक विश्वास के साथ इस बात की गवाही देता हुआ मिले कि अल्लाह के अतिरिक्त कोई सत्य पूज्य नहीं है, उसे मैं जन्नत का सुसमाचार सुना दूँ। इतना सुनकर उमर -रज़ियल्लाहु अनहु- ने अबू हुरैरा -रज़ियल्लाहु अनहु- के सीने पर ऐसा मुक्का मारा कि वह नितंब के बल पर जा गिरे। साथ ही उन्होंने वापस जाने को भी कह दिया। अबू हुरैरा -रज़ियल्लाहु अनहु- का कहना है कि उनकी बात सुनकर मैं अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- की तरफ लौट पड़ा। मैं घबराया हुआ था, चेहरे का रंग बदला हुआ था, रोने जैसा लग रहा था। मेरे पीछे-पीछे उमर -रज़ियल्लाहु अनहु- भी चल पड़े। मुझे देख आपने पूछा : अबू हुरैरा, बात क्या है? मैंने कहा : मेरी मुलाक़ात उमर -रज़ियल्लाहु अनहु- से हुई और मैंने उनको वह सूचना दी, जिसके साथ आपने मुझे भेजा था, तो उन्होंने मुझे इस तरह मुक्का रसीद कर दिया कि मैं नितंब के बल गिर पड़ा। फिर उन्होंने मुझे वापस लौट जाने को कहा। यह सुन आपने उमर -रज़ियल्लाहु अनहु- से पूछा : तुमने इस तरह का काम क्यों किया? उमर -रज़ियल्लाहु अनहु- ने जवाब दिया : ऐ अल्लाह के रसूल! मेरे माँ बाप आपपर फ़िदा हों, क्या आपने अबू हुरैरा को अपने दोनों जूते देकर इस काम के लिए भेजा था कि जो व्यक्ति हार्दिक विश्वास के साथ इस बात की गवाही दे कि अल्लाह के सिवा कोई सत्य पूज्य नहीं है, उसे वह जन्नत का सुसमाचार सुना दें? जवाब दिया : हाँ, मैंने ऐसा किया है। उमर -रज़ियल्लाहु अनहु- ने कहा : आप ऐसा न करें। मुझे इस बात की आशंका है कि लोग इस वाक्य को कहने भर पर स्वयं को समेट लेंगे और अमल पर ध्यान नहीं देंगे। इसलिए लोगों को अमल करने दें। उनकी बात सुन अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने फ़रमाया : तब उन्हें अमल करने दो।
अब्दुल्लाह बिन अम्र रज़ियल्लाहु अनहुमा का वर्णन है कि अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फ़रमाया : "मुसलमान वह है, जिसकी ज़बान और हाथ से मुसलमान सुरक्षित रहें और मुहाजिर वह है, जो अल्लाह की मना की हुई चीज़ें छोड़ दे।"
इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया हैअल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने बताया है कि पूरा मुसलमान वह है, जिसकी ज़बान से मुसलमान सुरक्षित रहें कि वह किसी को गाली न दे, किसी पर धिक्कार न करे, किसी की ग़ीबत न करे और किसी को भाषा द्वारा कोई कष्ट न दे। इसी तरह उसके हाथ से मुसलमान सुरक्षित रहें। मसलन वह न किसी पर अत्याचार करे और न किसी का माल हड़पे। जबकि असल हिजरत करने वाला वह है, जो अल्लाह की हराम की हुई चीज़ें छोड़ दे।
मुग़ीरा बिन शोबा (रज़ियल्लाहु अनहु) कहते हैं कि अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फ़रमाया: मूसा (अलैहिस्सलाम) ने अपने रब से पूछा: जन्नत में सबसे निचले दरजे वाला व्यक्ति कौन होगा? अल्लाह ने कहा: वह ऐसा व्यक्ति होगा, जो जन्नतियों के जन्नत में प्रवेश कर जाने के बाद आएगा। उससे कहा जाएगा: जन्नत में प्रवेश कर जाओ। वह कहेगा: मैं जन्नत में भला कैसे प्रवेश करूँ, जबकि लोगों ने अपने- अपने स्थान ग्रहण कर लिए हैं और अपने- अपने हिस्से की नीमतें प्राप्त कर ली हैं? उससे कहा जाएगा: क्या तुम इस बात पर राज़ी हो कि तुम्हें दुनिया के बादशाहों में से किसी बादशाह के बराबर प्राप्त हो? वह कहेगा: ऐ मेरे रब! मैं राज़ी हो गया। अब अल्लाह कहेगा: यह तो तेरे लिए है ही, लेकिन साथ में इसके दस गुना भी है तथा तेरे लिए वह सब कुछ है, जिसकी तेरे दिल में इच्छा जागे और जो तेरी आँख को अच्छा लगे। वह कहेगा: ऐ मेरे रब! मैं राज़ी हो गया। मूसा (अलैहिस्सलाम) ने कहा: ऐ मेरे रब! फिर सबसे ऊँचे दरजे का जन्नती कौन होगा? अल्लाह ने कहा: सबसे ऊँचे दरजे के जन्नती वह लोग होंगे, जिनका चयन ख़ुद मैंने किया, जिनके सम्मान का पौधा मैंने अपने हाथों से लगाया और उनके इस सम्मान के ऊपर अपनी मुहर लगा दी। उन्हें ऐसी चीज़ें प्राप्त होंगी, जिन्हें न किसी आँख ने देखा है, न किसी कान ने सुना है और न किसी इनसान के दिल में उनका ख़्याल आया है। तथा अब्दुल्लाह बिन मसऊद (रज़ियल्लाहु अनहु) से वर्णित है कि अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फ़रमाया: मैं उस व्यक्ति को अच्छी तरह जानता हूँ, जो अंत में जहन्नम से निकलेगा और अंत में जन्नत के अंदर प्रवेश करेगा। वह चूतड़ों के बल घिसटता हुआ जहन्नम से निकलेगा। सर्वशक्तिमान अल्लाह उससे कहेगा: जाओ और जन्नत में प्रवेश कर जाओ। वह जन्नत के पास जाएगा, लेकिन उसे ऐसा लगेगा कि जन्नत भरी हुई है। अतः, लौट आएगा और कहेगा: ऐ मेरे रब! मैंने पाया कि जन्नत भरी हुई है। सर्वशक्तिमान अल्लाह कहेगा: जाओ और जन्नत में दाख़िल हो जाओ। वह जाएगा, लेकिन उसे फिर लगेगा कि जन्नत भरी हुई है। अतः, फिर लौट आएगा और कहेगा: ऐ मेरे रब! मैंने उसे भरा हुआ पाया है। तब सर्वशक्तिमान अल्लाह कहेगा: जाओ, जन्नत में प्रवेश कर जाओ, तुम्हारे लिए दुनिया के जैसा और उसके दस गुना है या तुम्हारे लिए दुनिया के दस गुना है। वह कहेगा: क्या तू मेरे साथ मज़ाक़ कर रहा है या मेरी हँसी उड़ा रहा है, जबकि तू सच्चा बादशाह है? वर्णनकर्ता कहते हैं: मैंने देखा कि अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) हँस पड़े, यहाँ तक कि आपके दाढ़ के दाँत प्रकट हो गए। तब आपने फ़रमाया: यह सबसे कम दरजे का जन्नती होगा।
इसे मुस्लिम ने रिवायत किया है। - इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है।अल्लाह की दानशीलता तथा अपार अनुकंपा का वर्णन एवं जन्नत वालों की प्रतिष्ठा का उल्लेख। इसमें बताया गया है कि जन्नत की निचली श्रेणी में स्थान पाने वाले व्यक्ति को भी दुनिया के किसी बादशाह से हज़ारों गुना अधिक नेमतें प्राप्त होंगी।
अबू हुरैरा (रज़ियल्लाहु अनहु) का वर्णन है कि सहाबा ने कहा: ऐ अल्लाह के रसूल! क्या क़यामत के दिन हम अपने रब को देख सकेंगे? आपने फ़रमाया: क्या तुम्हें दोपहर के समय सूरज को देखने में, जबकि वह बादलों में न हो, कोई कठिनाई होती है? उन्होंने उत्तर दिया कि नहीं। तो आपने फ़रमाया: क्या तुम्हें चौदहवीं की रात को, चाँद को देखने में, जबकि वह बादलों में न हो, कोई कठिनाई होती है? उन्होंने उत्तर दिया कि नहीं। तो आपने फ़रमाया: उसकी क़सम, जिसके हाथ में मेरी जान है, तुम्हें अपने रब को देखने में कोई कठिनाई नहीं होगी, जिस तरह इन दोनों में से किसी को देखने में कोई कठिनाई नहीं होती है। आपने कहा: फिर अल्लाह बंदे से मिलेगा और उससे कहेगा: ऐ फ़लाँ! क्या मैंने तुझे मान- सम्मान नहीं दिया था, सरदारी नहीं दी थी, शादी नहीं कराई थी, घोड़ों और ऊँटों को तेरे काम पर नहीं लगाया था और यह अवसर नहीं दिया था कि सरदार बनकर ग़नीमत के धन का चौथाई भाग प्राप्त करे? वह कहेगा: ज़रूर दिया था, ऐ मेरे रब! अल्लाह कहेगा: क्या तूने यह सोचा था कि तुझे मुझसे मिलना है? वह कहेगा: नहीं। अल्लाह कहेगा: जा, मैं तुझे भुलाता हूँ, जैसे तूने मुझे भुला रखा था। फिर दूसरे से मिलेगा और कहेगा: ऐ फ़लाँ! क्या मैंने तुझे मान- सम्मान नहीं दिया था, सरदारी नहीं दी थी, शादी नहीं कराई थी, घोड़ों और ऊँटों को तेरे काम पर नहीं लगाया था और यह अवसर नहीं दिया था कि सरदार बनकर ग़नीमत के धन का चौथाई भाग प्राप्त करे? वह कहेगा: ज़रूर दिया था, ऐ मेरे रब! अल्लाह कहेगा: क्या तूने यह सोचा था कि तुझे मुझसे मिलना है? वह कहेगा: नहीं। अल्लाह कहेगा: जा, मैं तुझे भुलाता हूँ, जैसे तूने मुझे भुला रखा था। फिर तीसरे से मिलेगा और इसी तरह की बात कहेगा, तो वह कहेगा: ऐ मेरे रब! मैं तुझपर, तेरी किताब पर और रसूलों पर ईमान लाया, नमाज़ पढ़ी, रोज़ा रखा और सदक़ा दिया। इस तरह वह जहाँ तक हो सकेगा, अपनी अच्छाइयाँ बयान करेगा। तब अल्लाह कहेगा: यह बात है तो ज़रा यहीं ठहरना। अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फ़रमाया: फिर उससे कहा जाएगा: अब हम तेरे विरुद्ध अपना गवाह लाते हैं। वह दिल ही दिल में सोचता रहेगा कि कौन मेरे विरुद्ध गवाही देगा? फिर उसके मुँह पर मुहर लगा दी जाएगी और उसकी रान, उसके माँस और उसकी हड्डियों से कहा जाएगा कि बोलो। तो उसकी रान, उसका माँस और उसकी हड्डियाँ उसके कर्मों के बारे में बोलने लगेंगी। ऐसा इसलिए किया जाएगा, ताकि उसका कोई बहाना बाक़ी न रहे। दरअसल यह व्यक्ति मुनाफ़िक़ होगा, जिससे अल्लाह नाराज़ होगा।
इसे मुस्लिम ने रिवायत किया है।कुछ सहाबा ने अल्लाह के नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- से पूछा कि क्या हम क़यामत के दिन अपने प्रभु को देख सकेंगे? तो आपने उनसे प्रश्न किया : "क्या तुम्हें दोपहर के समय, जब सूरज बादलों में न हो, उसे देखने में कोई कठिनाई होती है?" यानी जब सूरज बीच आकाश में हो, उसका प्रकाश चारों ओर फैला हुआ हो और आकाश में कहीं कोई बादल न हो, उस समय तुम्हें लोगों की भीड़-भाड़ की वजह से सूरज को देखने में कोई कठिनाई होती है? सहाबा ने नहीं में इसका उत्तर दिया, तो फ़रमाया : "क्या तुम्हें चौदहवीं की रात को, चाँद को देखने में, जबकि वह बादलों में न हो, कोई कठिनाई होती है?" यानी क्या पूरे चाँद की रात को, जब चाँद हर तरफ़ रोशनी बिखेर रहा हो और आकाश में कोई बादल भी न हो, उस समय तुम्हें लोगों की भीड़-भाड़ के कारण उसे देखने में कोई कष्ट होता है? इसका उत्तर भी जब सहाबा ने नहीं में दिया, तो फ़रमाया : "उसकी क़सम, जिसके हाथ में मेरी जान है, तुम्हें अपने रब को देखने में कोई कठिनाई नहीं होगी, जिस तरह इन दोनों में से किसी को देखने में कोई कठिनाई नहीं होती है।" यानी उसे स्पष्ट रूप से देखा जा सकेगा। उसे देखने में न कोई आपसी झगड़ा होगा और न संदेह कि उसके बारे में लोग एक-दूसरे का विरोध करें और एक-दूसरे को झुठलाएँ। बिल्कुल वैसे ही, जिस तरह सूरज एवं चाँद को देखने में कोई संदेह नहीं होता और कोई झगड़ा नहीं होता। इस तरह यहाँ समानता स्पष्टता के दृष्टिकोण से देखने में दिखाई गई है और बताया गया है कि दोनों स्थानों में देखना संदेह के दायरे से बाहर है। न सारी कैफ़ियतों में कोई संदेह है और न देखी जाने वाली वस्तु में। क्योंकि पवित्र अल्लाह सृष्टि की समानता से पाक है। फिर अल्लाह के नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने आख़िरत के दिन के एक दृश्य के बारे में बताया है। दृश्य यह है कि अल्लाह अपने एक बंदे से मिलेगा और उससे अपने नेमतों का एतराफ़ कराते हुए कहेगा : ऐ अमुक बंदे! क्या मैंने तुझे श्रेष्ठता प्रदान नहीं की थी, अपनी जाति का सरदार नहीं बनाया था, तुम्हारी ही जाति की पत्नी प्रदान नहीं की और फिर तुम्हें उसपर प्राबल्य प्रदान नहीं किया, तुम्हारे और उनके बीच प्रेम, दया और मोहब्बत नहीं बनाई, तुम्हारी सेवा में घोड़ों और ऊँटों को नहीं लगाया, तुम्हें अपनी जाति का प्रधान बनाकर ग़नीमत का एक चौथाई भाग देने का अधिकार नहीं दिया, जिसे अज्ञान काल के राजा अपने लिए लिया करते थे? जब बंदा इन सारी नेमतों का एतराफ़ करेगा, तो अल्लाह कहेगा : क्या तू जानता था कि तुझे मुझसे मिलना है? वह नहीं में उत्तर देगा, तो उच्च एवं महान अल्लाह फ़रमाएगा : "जा, मैं तुझे भुला देता हूँ, जिस तरह तू ने मुझे भुला रखा था।" यानी आज मैं तुझे अपनी अनुकंपा से वंचित करता हूँ, जिस तरह तू ने दुनिया में मेरी इबादत से गुरेज़ किया था। यहाँ भुलाने से मुराद जान-बूझकर छोड़ना है। जैसा कि उच्च एवं महान अल्लाह का फ़रमान है : "हमने (भी) तुम्हें भुला दिया है। चखो, सदा की यातना।" फिर अल्लाह दूसरे बंदे से मिलेगा। फिर अल्लाह के नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने उसी प्रकार के वार्तालाप का ज़िक्र किया, जिस प्रकार की वार्तालाप पहले बंदे और अल्लाह के बीच हुई थी। फिर तीसरे बंदे से मिलेगा और उससे भी इसी प्रकार की बात कहेगा, तो वह कहेगा कि ऐ मेरे पालनहार! मैं तुझपर, तेरी किताब और तेरे रसूलों पर ईमान लाया, नमाज़ पढ़ी, रोज़ा रखा और सदक़ा किया। इस तरह वह जहाँ तक उससे बन सकेगा अपनी प्रशंसा करेगा। इसपर अल्लाह कहेगा : "यह बात है तो ज़रा यहीं ठहरना।" यानी जब तूने इस प्रकार अपनी प्रशंसा की है, तो यहाँ रुके रहो, ताकि हम गवाह प्रस्तुत कर तुम्हें तुम्हारे कर्म दिखा सकें। फिर उससे कहा जाएगा : अब हम तुम्हारे विरुद्ध गवाह सामने लाने जा रहे हैं। ऐसे में बंदा अपने मन में कहेगा कि भला मेरे विरुद्ध गवाही कौन दे सकता है? इसपर अल्लाह उसके मुँह पर मुहर लगा देगा और उसकी रान, मांस और हड्डियों से कहा जाएगा कि तुम बोलो। अतः उसकी रान, मांस और हड्डियाँ उसके कर्मों को उजागर करने लगेंगी। "ऐसा इसलिए किया जाएगा, ताकि उसका कोई बहाना बाक़ी न रहे।" यानी उसके शरीर के अंगों को बोलने की शक्ति इसलिए प्रदान की जाएगी और उनसे गुनाहों का एतराफ़ इसलिए करवाया जाएगा, ताकि उसके पास कोई बहाना न रहे। यह तीसरा बंदा मुनाफ़िक़ है, जो अल्लाह के क्रोध का अधिकारी है।
अबू हुरैरा (रज़ियल्लाहु अनहु) का वर्णन है कि अल्लाह के नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फ़रमाया: अल्लाह के निन्यानवे, एक कम सौ नाम हैं, जिसने उन्हें याद कर लिया, वह जन्नत में प्रवेश करेगा। अल्लाह एक है और वह विषम संख्या को पसंद करता है।
इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है।अल्लाह के निन्यानवे नाम ऐसे हैं कि जिसने उन्हें याद कर लिया, वह जन्नत में प्रवेश करेगा। यहाँ याद करने से मुराद ज़बानी पढ़ना है। जबकि कुछ लोगों का कहना है कि इसका अर्थ है, उनपर विश्वास रखना, उनपर अमल करना, हर एक नाम के अर्थ का अनुसरण करना और अल्लाह को उनके ज़रिए पुकारना। इस हदीस में निन्यानवे नामों को सिद्ध तो किया गया है, लेकिन इनके अतिरिक्त अन्य नामों का इनकार नहीं किया गया है। लेकिन विशेष रूप से इन नामों का उल्लेख इसलिए किया गया है कि यह सबसे मशहूर एवं स्पष्ट अर्थ वाले नाम हैं। यह हदीस वैसी ही है, जैसे आप कहें कि ज़ैद के पास सौ दिरहम हैं, जिन्हें उसने सदक़ा के लिए रखा हुआ है। इस वाक्य का मतलब यह नहीं हो सकता कि ज़ैद के पास कुल इतने ही दिरहम हैं। बल्कि इसका मतलब यह है कि उसने सदक़ा के लिए जो दिरहम रखे हुए हैं, वह इतने हैं। इस तफ़सीर का प्रमाण अब्दुल्लाह बिन मसऊद -रज़ियल्लाहु अनहु- की यह हदीस है : "मैं तुझसे हर उस नाम के वासते से माँगता हूँ, जो तेरा है। उसे तू ने अपने लिए रख लिया है, या उसे अपनी किताब में उतारा है, या अपनी किसी सृष्टि को सिखाया है या अपने पास परोक्ष के ज्ञान में छिपा रखा है।" इस हदीस में इस बात का प्रमाण है कि अल्लाह के कुछ अच्छे नाम ऐसे भी हैं, जिन्हें उसने अपनी किताब में उतारा नहीं है और जिन्हें अपनी सृष्टि से छिपा रखा है। "अल्लाह एक है" यानी वह एक है और उसका कोई साझी नहीं है। "और वह विषम संख्या को पसंद करता है।" यानी उसे बहुत-से कर्मों और बहुत-सी इबादतों पर तरजीह देता है। यही कारण है कि अल्लाह ने नमाज़ें पाँच फ़र्ज़ की हैं, तवाफ़ सात बनाए हैं, अधिकतर कर्मों को तीन बार करने को पुण्य वाला बताया है, आकाश सात पैदा किए और धरती भी सात पैदा की।
अबू हुरैरा (रज़ियल्लाहु अनहु) से रिवायत है, वह कहते हैं कि अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फ़रमाया: मदीने की गुज़रगाहों पर फरिश्ते नियुक्त हैं, यहाँ न ताऊन प्रवेश कर सकता है, न दज्जाल।
इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है।अल्लाह के नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने इस हदीस में मदीने की एक फ़ज़ीलत यह बताई है कि उसके सभी प्रवेश स्थानों एवं मार्गों में फ़रिश्ते उपस्थित रहते हैं, जो उसकी पहरेदारी करते हैं। अतः उसमें ताऊन, जो एक तेज़ी से फैलने वाली संक्रामक महामारी है और जिसके कारण बड़ी संख्या में मृत्यु होती है, प्रवेश नहीं करता और उसमें काना दज्जाल भी प्रवेश नहीं करेगा।
जाबिर बिन अब्दुल्लाह रज़ियल्लाहु अनहुमा का वर्णन है कि अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने फ़रमाया है : ''जिसने अज़ान सुनते समय यह दुआ पढ़ी : "ऐ अल्लाह! इस संपूर्ण आह्वान तथा खड़ी होने वाली नमाज़ के रब! मुहम्मद -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- को वसीला (जन्नत का सबसे ऊँचा स्थान) और श्रेष्ठतम दर्जा प्रदान कर और उन्हें वह प्रशंसनीय स्थान प्रदान कर, जिसका तूने उन्हें वचन दिया है।" उसके लिए क़यामत के दिन मेरी सिफ़ारिश अनिवार्य हो जाएगी।''
इसे बुख़ारी ने रिवायत किया हैअल्लाह के नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- बयान फ़रमा रहे हैं कि जिसने मुअज़्ज़िन की अज़ान सुनने के बाद यह दुआ पढ़ी : ऐ अल्लाह! इस संपूर्ण आह्वान के पालनहार! यानी अज़ान के इन शब्दों के पालनहार, जिनके द्वारा अल्लाह की इबादत, एकेश्वरवाद एवं मुहम्मद -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- के नबी होने की ओर बुलाया जाता है और सम्पूर्ण तथा खड़ी होने वाली नमाज़, जो हमेशा पढ़ी जाती रहेगी, के पालनहार! मुहम्मद -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- को जन्नत का वह उच्च स्थान प्रदान कर, जिसका आपके अतिरिक्त कोई और हक़दार नहीं है और इसके साथ ही अन्य लोगों के पद से बड़ा पद प्रदान कर। तथा उन्हें वह प्रशंसनीय स्थान प्रदान कर, जिसका तूने उन्हें अपने इस कथन "क़रीब है कि आपका पालनहार आपको मक़ामे महमूद पर खड़ा करे" द्वारा वचन दिया है। प्रशंसनीय स्थान से मुराद क़यामत के दिन की बड़ी सिफ़ारिश का अधिकार है। जिसने यह दुआ पढ़ी, वह अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- की सिफ़ारिश का हक़दार बन जाएगा और उसके लिए आपकी सिफ़ारिश क़यामत के दिन वाजिब हो जाएगी।
अबू सईद ख़ुदरी (रज़ियल्लाहु अन्हु) से वर्णित है कि नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फ़रमायाः "पूरी धरती मस्जिद है, सिवाय क़ब्रगाह और स्नान घर के।"
इसे इब्ने माजा ने रिवायत किया है । - इसे तिर्मिज़ी ने रिवायत किया है। - इसे अबू दाऊद ने रिवायत किया है। - इसे अह़मद ने रिवायत किया है। - इसे दारिमी ने रिवायत किया है।पूरी धरती नमाज़ पढ़ने के लिए उपयुक्त है, सिवाय उस स्थान के जहाँ मुर्दों को दफ़न किया जाता है, जिसके अंतर्गत क़ब्रिस्तान की चहारदीवारी के अंदर का पूरा क्षेत्र शामिल है और सिवाय उस स्थान के जहाँ शिफ़ा हासिल करने के लिए गर्म पानी से स्नान किया जाता है। नववी कहते हैं : "इस मसले में सारे इस्लामिक विद्वानों का मतैक्य है कि शैतान के रहने की जगहों में नमाज़ पढ़ना अप्रिय है। जैसे शराब खाने, नाइट क्लब तथा उत्पाद कर वसूली केंद्र आदि ऐसे स्थान जहाँ खुलेआम गुनाह किए जाते हों और चर्च, यहूदियों के पूजा स्थल और शौचालय अदि।"