





























Hadeeth Cards
Da'wa cards that highlight great meanings from the noble prophetic hadiths in a simple style and attractive display that helps the Muslim to have a deeper understanding of his religion in an easy way
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अबू हुरैरा -रज़ियल्लाहु अन्हु- से रिवायत है कि अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने फ़रमाया : “अल्लाह के सौ से एक कम निन्यानवे नाम हैं। जिसने उनको याद किया तथा उनके तक़ाज़ों पर अमल किया, वह जन्नत में दाख़िल होगा।”
इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है।इस हदीस में इस बात का उल्लेख है कि अल्लाह के सुन्दर नामों में निन्यानवे नाम ऐसे हैं, जो उनको याद करेगा, उनपर विश्वास रखेगा और उसके तक़ाज़ों पर अमल करेगा, उसके लिए जन्नत है। इन नामों में से किसी की भी क़सम खाना जायज़ है और इन नामों की क़सम खाने से क़सम स्थापित हो जाती है। चुनांचे वह क़सम, जिसे तोड़ने पर कफ़्फ़ारा वाजिब होता है, वह क़सम है, जो अल्लाह की, रहमान एवं रहीम की या उसके किसी गुण, जैसे उसके चेहरे, महानता, प्रताप एवं प्रतिष्ठा की खाई जाए।
आइशा रज़ियल्लाहु अनहा का वर्णन है, वह कहती हैं : मैंने कहा : ऐ अल्लाह के रसूल! इब्न-ए-जुदआन जाहिलियत के ज़माने में रिश्ते-नातों का ख़्याल रखता था और निर्धनों को खाना खिलाता था। क्या यह बातें उसके लिए लाभकारी सिद्ध होंगी? आपने कहा : "इन कामों का उसे कोई लाभ नहीं मिलेगा। उसने कभी यह नहीं कहा : ऐ मेरे रब! प्रतिफल के दिन मेरे गुनाह माफ़ कर देना।"
इसे मुस्लिम ने रिवायत किया हैइब्ने-ए-जुदआन इस्लाम से पहले क़ुरैश का एक सरदार था। उसने कई अच्छे काम किए थे। जैसे रिश्ते-नातों का ख़याल रखता था और निर्धनों को खाना खिलाता था। वह इस तरह के कई अन्य काम भी किया करता था, जिनकी प्रेरणा खुद इस्लाम ने भी दी है। आपने उसके बारे में बताया कि यह काम आख़िरत में उसके लिए कुछ लाभकारी नहीं होंगे। इसका कारण यह है कि उसका अल्लाह पर विश्वास नहीं था और उसने कभी नहीं कहा था कि ऐ मेरे रब! क़यामत के दिन मेरे गुनाहों को माफ़ कर देना।
ज़ैद बिन ख़ालिद जुहनी रज़ियल्लाहु अनहु से वर्णित है, वह कहते हैं : हुदैबिया में रात में बारिश होने के बाद अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने हमें लेकर फ़ज्र की नमाज़ अदा की। सलाम फेरने के बाद लोगों की ओर मुंह करके फ़रमाया : “क्या तुम्हें मालूम है कि तुम्हारे रब ने क्या कहा?” लोगों ने कहा : अल्लाह और उसके रसूल बेहतर जानते हैं। (आपने फ़रमाया कि अल्लाह ने) फ़रमाया : “मेरे बंदों में से कुछ ने मुझपर ईमान लाने वाले और कुछ ने कुफ़्र करने वाले बनकर सुबह की। जिसने कहा कि अल्लाह की कृपा व रहमत से हमपर बारिश हुई तो वह मुझपर ईमान लाने वाला और नक्षत्रों को नकारने वाला है और जिसने कहा कि अमुक-अमुक नक्षत्रों के कारण हमपर बारिश हुई तो वह मेरे साथ कुफ़्र करने वाला और नक्षत्रों पर ईमान लाने वाला ठहरा।”
इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया हैअल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने हुदैबिया के स्थान पर सुबह की नमाज़ पढ़ी। हुदैबिया मक्का के निकट एक बस्ती का नाम है। उस दिन रात को बारिश हुई थी। जब आपने नमाज़ पूरी कर ली और सलाम फेरा तो लोगों की ओर मुँह किया और उनसे पूछा : क्या तुम जानते हो कि तुम्हारे सर्वशक्तिमान एवं महान रब ने क्या कहा है? लोगों ने उत्तर दिया : अल्लाह और उसका रसूल बेहतर जानते हैं। यह सुन आपने कहा : अल्लाह ने बताया है कि वर्षा होते समय लोग दो प्रकार में बँट जाते हैं। कुछ लोग अल्लाह पर विश्वास रखते हैं और कुछ लोग उसके प्रति अविश्वास व्यक्त करते हैं। ऐसे में जिसने कहा कि हमें अल्लाह के अनुग्रह और उसकी दया से बारिश मिली और इस तरह उसने बारिश देने वाला अल्लाह को माना, वह अल्लाह पर विश्वास रखने वाला है और नक्षत्रों के प्रति अविश्वास व्यक्त करने वाला है। इसके विपरीत जिसने कहा कि हमें अमुक नक्षत्र के कारण बारिश मिली, वह अल्लाह के प्रति अविश्वास व्यक्त करने वाला और नक्षत्र पर विश्वास रखने वाला है। याद रहे कि इस तरह से नक्षत्र की ओर बारिश की निस्बत करना छोटा कुफ़्र है, क्योंकि अल्लाह ने नक्षत्र को बारिश का शरई एवं सांसारिक सबब नहीं बनाया है। लेकिन जिसने बारिश होने आदि लौकिक घटनाओं का संबंध यह समझकर नक्षत्रों के निकलने या डूबने की से जोड़ा कि यही वास्तविक कारक हैं, तो वह बड़ा कुफ़्र करने वाला है।
अबू हुरैरा रज़ियल्लाहु अनहु का वर्णन है, वह कहते हैं : अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के कुछ साथी आपके पास आए और आपसे पूछा : हम अपने दिलों में ऐसी बातें पाते हैं, जिनको बोलना हमें बहुत बड़ा (गुनाह) लगता है। यह सुन आपने कहा : "क्या तुम सचमुच ऐसा महसूस करते हो?" उन्होंने कहा : अवश्य महसूस करते हैं। आपने कहा : "यही स्पष्ट ईमान है।"
इसे मुस्लिम ने रिवायत किया हैअल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के साथियों का एक समूह आपके पास आया और पूछा कि वे अपने दिलों में कुछ ऐसी भयानक बातें पाते हैं, जो इतनी गलत तथा घृणित होती हैं कि वे उन्हें बयान नहीं कर सकते। यह सुनकर अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फ़रमाया : तुम्हारे दिल में पाई जाने वाली यही बात तो स्पष्ट ईमान और विश्वास है, जो तुम्हें शैतान द्वारा दिल के अंदर डाली गई बात को न मानने और उसे बोलने से बचने की प्रेरणा देता है तथा उसी के कारण तुम्हारे दिलों में यह बात बहुत बड़ी मालूम होती है। तुम्हारे अंदर इस प्रकार के भाव का पाया जाना इस बात का प्रमाण है कि शैतान तुमपर हावी नहीं है। अगर वह तुमपर हावी हो जाता, तो तुम्हें इस तरह का ख़याल विचलित न करता।
अब्दुल्लाह बिन अब्बास रज़ियल्लाहु अन्हुमा से वर्णित है, वह कहते हैं : एकि व्यक्ति अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- के पास आया और कहने लगा : ऐ अल्लाह के रसूल! हम में से एक व्यक्ति अपने दिल में ऐसी बातें पाता है (वह इशारे में बात कर रहा था) कि कोयला बन जाना उनको बोलने से अधिक प्रिय लगता है। यह सुन अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फ़रमाया : अल्लाह सबसे बड़ा है। अल्लाह सबसे बड़ा है। सारी प्रशंसा अल्लाह की है, जिसने शैतान के फ़रेब को बुरे ख़याल की ओर फेर दिया।"
इसे अबू दावूद ने तथा नसई ने अल-कुबरा में रिवायत किया हैएक व्यक्ति अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के पास आया और कहा : ऐ अल्लाह के रसूल! हम में से किसी-किसी के दिल में ऐसी बातें आजाती हैं, जिसके बारे में बात करना इतना कठिन है कि राख बन जाना उसे बोलने से प्रिय लगता है। यह सुन अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने दो बार अल्लाहु अकबर कहा और अल्लाह की प्रशंसा की कि उसने शैतान के षडयंत्र को बुरे ख़याल तक ही सीमित रख दिया।
अबू हुरैरा रज़ियल्लाहु अनहु बयान करते हैं कि अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फ़रमाया : "शैतान तुम में से किसी व्यक्ति के पास आता है और कहता है : इस चीज़ को किसने पैदा किया? इस चीज़ को किसने पैदा किया? यहाँ तक कि वह कहता है : तेरे रब को किसने पैदा किया? जब इस हद तक पहुँच जाए, तो अल्लाह की शरण माँगे और इस तरह की बातें सोचना बंद कर दे।"
इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया हैअल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम उन प्रश्नों का अचूक इलाज बता रहे हैं, जो शैतान ईमान वालों के दिलों में डालता है। मसलन शैतान कहता है कि अमुक चीज़ को किसने बनाया? अमुक चीज़ को किसने बनाया? आकाश को किसने बनाया? धरती को किसने बनाया? जवाब में एक ईमान वाला व्यक्ति दीनी, प्राकृतिक और तार्किक जवाब देते हुए कहेगा कि अल्लाह। लेकिन शैतान इतने तक ही नहीं रुकता, बल्कि आगे बढ़ते हुए कहता है कि तुम्हारे रब को किसने पैदा किया? जब शैतान इस हद तक पहुँच जाता है, तो एक ईमान वाला व्यक्ति इससे बचाव के लिए तीन कार्य करता है : अल्लाह पर ईमान लाना। शैतान से अल्लाह की शरण माँगना। इस तरह के बुरे ख़यालों को आने देने से बचना।
अनस बिन मालिक रज़ियल्लाहु अनहु का वर्णन है, वह कहते हैं कि अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फ़रमाया : "अल्लाह किसी मोमिन के द्वारा किए गए किसी अच्छे काम के महत्व को घटाता नहीं है। मोमिन को उसके अच्छे काम के बदले में दुनिया में नेमतें प्रदान की जाती हैं और आख़िरत में प्रतिफल दिया जाता है। जबकि काफ़िर को उसके द्वारा अल्लाह के लिए किए गए अच्छे कामों के बदले में दुनिया में आजीविका प्रदान कर दी जाती है, यहाँ तक कि जब वह आख़िरत की ओर प्रस्थान करता है, उसके पास कोई अच्छा काम नहीं होता, जिसका उसे बदला दिया जाए।"
इसे मुस्लिम ने रिवायत किया हैअल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ईमान वालों पर अल्लाह के महान अनुग्रह और काफ़िरों के साथ उसके न्याय को बयान कर रहे हैं। जहाँ तक मोमिन की बात है, तो उसके अच्छे कर्म का सवाब देने में कोई कमी नहीं की जाती, बल्कि उसके बदले में उसे दुनिया में नेकी प्रदान की जाती है और आख़िरत के लिए भी प्रतिफल एकत्र करके रख दिया जाता है। कभी-कभी ऐसा भी होता है कि पूरे बदले को आख़िरत के लिए सुरक्षित रख दिया जाता है। जबकि इसके विपरीत काफ़िर को उसके द्वारा किए गए अच्छे कामों का बदला दुनिया ही में दे दिया जाता है। यहाँ तक कि जब आख़िरत के लिए परस्थान करता है तो वहाँ उसको देने के लिए कोई सवाब (प्रतिफल) नहीं बचता है। क्योंकि किसी भी अच्छे कार्य के प्रतिफल को दोनों लोकों में प्राप्त करने के लिए ईमान वाला होना अनिवार्य है।
हकीम बिन हिज़ाम रज़ियल्लाहु अनहु का वर्णन है, वह कहते हैं : मैंने कहा : ऐ अल्लाह के रसूल! जाहिलियत के ज़माने में इबादत की नीयत से जो सदक़ा देता था या गुलाम आज़ाद करता था और रिश्तेदारों के साथ अच्छा बर्ताव करता था, आप बताएँ कि उनका कोई सवाब होगा? नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फ़रमाया : "तुम अपनी पिछली नेकियों के साथ मुसलमान हुए हो।"
इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया हैअल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम बता रहे हैं कि काफ़िर जब मुसलमान हो जाता है, तो इस्लाम ग्रहण करने से पहले किए गए उसके अच्छे कामों, जैसे सदक़ा करना, गुलाम आज़ाद करना और रिश्तेदारों के साथ अच्छा बर्ताव करना आदि का उसे बदला दिया जाएगा।
अब्दुल्लाह बिन उमर रज़ियल्लाहु अनहुमा का वर्णन है कि अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फ़रमाया : "मुनाफ़िक़ की मिसाल दो रेवड़ों के बीच चक्कर लगाने वाली बकरी की जैसी है, जो एक बार इस रेवड़ की ओर जाती है, तो एक बार उस रेवड़ की ओर।"
इसे मुस्लिम ने रिवायत किया हैअल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम बता रहे हैं कि मुनाफ़िक़ का हाल दुविधा में पड़ी हुई बकरी की तरह है, जिसे पता न हो कि दो रेवड़ों में से किसके साथ रहना है? कभी इस रेवड़ की ओर जाती हो, तो कभी उस रेवड़ की ओर। बिल्कुल इसी तरह मुनाफ़िक़ ईमान और कुफ़्र के विषय में दुविधा में पड़े होते हैं। न तो ईमान वालों के साथ अंदर और बाहर दोनों तरह से होते हैं और न काफ़िरों के साथ अंदर और बाहर दोनों तरह से होते हैं। वैसे तो ज़ाहिरी तौर पर ईमान वालों के साथ होते हैं, लेकिन मन में असमंजस की स्थिति होती है। कभी मुसलमानों की ओर झुक जाते हैं और कभी काफ़िरों की ओर।