





























Hadeeth Cards
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अबू सईद -रज़ियल्लाहु अनहु- का वर्णन है कि अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने फ़रमाया है : "जब जनाज़ा रख दिया जाता है और लोग उसे अपने कंधों पर उठा लेते हैं, तो यदि वह सदाचारी होता है तो कहता है कि मुझे ले चलो। और अगर सदाचारी नहीं होता, तो कहता है कि हाय मेरा विनाश, लोग मुझे कहाँ ले जा रहे हैं? उसकी आवाज़ इन्सान को छोड़कर हर चीज़ सुनती है। इन्सान अगर सुन ले, तो बेहोश हो जाए।"
इसे बुख़ारी ने रिवायत किया हैनबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- बता रहे हैं कि जब जनाज़े को चारपाई पर रख दिया जाता है और लोग उसे अपने कंधों पर उठा लेते हैं, ऐसे में अगर वह सदाचारी होता है तो कहता है; मुझे आगे ले चलो उस नेमत की ओर जिसे वह अपने सामने देख रहा है। लेकिन अगर सदाचारी नहीं होता, तो भयानक आवाज़ में कहता है कि हाय मेरा मिनाश, ये लोग मुझे कहाँ ले जा रहे हैं? क्योंकि उसे सामने यातना दिख रही होती है। उसकी इस आवाज़ को इन्सान को छोड़ हर कोई सुनता है। उसकी आवाज़ इतनी भयानक होती है कि अगर इन्सान सुन ले, तो बेहोश हो जाए।
मिक़दाद बिन असवद -रज़ियल्लाहु अनहु- का वर्णन है, वह कहते हैं कि मैंने अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- को यह फ़रमाते हुए सुना है : ''क़यामत के दिन सूरज को सृष्टि से इतना निकट कर दिया जाएगा कि वह एक मील की दूरी पर होगा।'' सुलैम बिन आमिर कहते हैं : अल्लाह की क़सम! मुझे नहीं मालूम, मील का क्या मतलब है? ज़मीन की दूरी या वह लकड़ी जिससे आँखों में सुरमा लगाया जता है? आप आगे फ़रमाते हैं : ''लोग अपने अमल के अनुसार पसीने में डूबे होंगे। कुछ लोग अपने टखनों तक पसीना में डूबे होंगे, कुछ लोग अपने घुटनों तक पसीना में डूबे होंगे, कुछ लोग अपनी कमर तक पसीना में डूबे होंगे तो कुछ लोगों को पसीना लगाम लगाए हुए होगा।'' वर्णनकर्ता कहते हैं : यह बात कहते समय अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने अपने मुँह की ओर इशारा करके दिखाया।
इसे मुस्लिम ने रिवायत किया हैअल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने बताया कि क़यामत के दिन सूरज को सृष्टि से इतना निकट कर दिया जाएगा कि वह उनके सरों से एक मील की दूरी पर होगा। ताबेई सलीम बिन आमिर कहते हैं : अल्लाह की क़सम, मुझे नहीं पता कि यहाँ मील से तात्पर्य जमीन पर तय की गई दूरी से है या आँखों में सुर्मा लगाने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले उपकरण मील से। फ़रमाया : लोग उस दिन अपने-अपने कर्मों के अनुसार पसीने में डूबे हुए होंगे। किसी का पसीना टखनों तक होगा, किसी का पसीना घुटनों तक होगा, किसी का पसीना कमर तक होगा और किसी का पसीना मुँह तक होगा, जो उसे बात करने नहीं देगा। वर्णनकर्ता कहते हैं : मुँह तक पसीना होने की बात कहते समय अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने अपने मुँह की ओर इशारा करके दिखाया।
अबू बुरदा बिन अबू मूसा से -रज़ियल्लाहु अनहु- से रिवायत है, वह कहते हैं : अबू मूसा -रज़ियल्लाहु अनहु- बहुत ज़्यादा बीमार हो गए। और (बीमारी इतनी सख़्त थी कि) बेहोश हो गए। उनका सर उनके घर की एक औरत की गोद में था, (जो ऊँची आवाज़ में रो रही थी) और वह (बेहोशी के कारण) उसे कोई जवाब न दे सके। अतः जब होश में आए, तो फ़रमाया : मैं उन तमाम लोगों से अपने बरी होने का एलान करता हूँ, जिनसे अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने बरी होने का एलान किया है। अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने मुसीबत के समय चीख़-चीख़ कर रोने वाली, बाल मुँडवाने वाली और कपड़े फाड़ने वाली औरतों से अपने बरी होने का एलान किया है।
इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया हैअबू बुरदा रज़ियल्लाहु अनहु बयान करते हैं कि उनके पिता अबू मूसा अश'अरी रज़ियल्लाहु अनहु एक बार बहुत बीमार हो गए। बीमारी इतनी सख़्त थी कि वह बेहोश हो गए। उस समय उनका सर उनके घर की किसी महिला की गोद में था, जो उनकी बीमारी देखकर चीख़-चीख़कर रोने लगी। लेकिन, बेहोशी के कारण वह उसे कुछ कह नहीं सके। जब होश में आए, तो फ़रमाया : मैं उन तमाम लोगों से बरी होने का ऐलान करता हूँ, जिनसे ख़ुद अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने बरी होने की बात कही है। अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने निम्नलिखित स्त्रियों से बरी होने का इज़हार किया है : सालिक़ा : मुसीबत के समय चीख़-चीख़कर रोने वाली स्त्री। हालिक़ा : मुसीबत के मसय बाल मुड़वाने वाली स्त्री। शाक़्क़ा : मुसीबत के समय कपड़े फाड़ने वाली स्त्री। कारण यह है कि ये अज्ञानता काल के कार्य हैं। इस्लाम का आदेश यह है कि मुसीबतों के समय सब्र से काम लिया जाए और अल्लाह से प्रतिफल की आशा रखी जाए।
अबू हुरैरा -रज़ियल्लाहु अनहु- का वर्णन है कि अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने फ़रमाया है : "एक मुसलमन के दूसरे मुसलमान पर छह अधिकार हैं।" पूछा गया : ऐ अल्लाह के रसूल! वो क्या हैं? फ़रमाया : "जब उससे मिलो तो सलाम करो, जब वह आमंत्रण दे तो उसका आमंत्रण स्वीकार करो, जब तुमसे शुभचिंतन की आशा रखे तो उसका शुभचिंतक बनो, जब छींकने के बाद अल्लाह की प्रशंसा करे तो 'यरहमुकल्लाह' कहो, जब बीमार हो तो उसका हाल जानने जाओ और जब मर जाए तो उसके जनाज़े में शामिल हो।"
इसे मुस्लिम ने रिवायत किया हैअल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने बयान फ़रमाया है कि एक मुसलमान के दूसरे मुसलमान पर जो अधिकार हैं, उनमें निम्नलिखित छह चीज़ें शामिल हैं : 1- मुलाक़ात होने पर अस्सलामु अलैकुम कहकर सलाम करना। उत्तर में सामने वाला व्यक्ति व अलैकुमुस्सलाम कहेगा। 2- वलीमा आदि दावत में शामिल होने का निमंत्रण मिलने पर उसे ग्रहण करना। 3- सलाह माँगे जाने पर उचित सलाह देना। चापलूसी एवं धोखा न करना। 4- जब कोई छींके और अल-हम्दु लिल्लाह कहे, तो उसके उत्तर में यरहमुकल्लाह कहना। इसके बाद छींकने वाला व्यक्ति यहदीकुमुल्लाह व युसलिह बालकुम कहे। 5- बीमार होने पर उसका हाल जानने के लिए जाना। 6- मृत्यु हो जाने पर उसके जनाज़े की नमाज़ पढ़ना और दफ़न का कार्य सम्पूर्ण हो जाने तक उसके जनाज़े के साथ रहना।
मुसलमानों की माता आइशा -रज़ियल्लाहु अनहा- का वर्णन है, वह कहती हैं : अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने उस बीमारी के दौरान, जिससे आप ठीक न हो सके, फ़रमाया : "यहूदियों तथा ईसाइयों पर अल्लाह की धिक्कार हो। उन लोगों ने नबियों की क़ब्रों को मस्जिद बना लिया।" वह कहती हैं : यदि ऐसा न होता, तो आपको बाहर दफ़न किया जाता। किन्तु यह भय लगा रहा कि कहीं आपकी क़ब्र को मस्जिद न बना लिया जाए।
इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया हैमुसलमानों की माता आइशा -रज़ियल्लाहु अनहा- बताती हैं कि अल्लाह के नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने अपनी उस बीमारी में, जो विकट रूप धारण कर चुकी थी और जिसमें आपकी मृत्यु हो गई, फ़रमाया : अल्लाह की धिक्कार हो यहूदियों एवं ईसाइयों पर तथा अल्लाह उन्हें अपनी दया से दूर रखे, क्योंकि उन्होंने अपने नबियों की क़ब्रों को मस्जिद बना लिया। यहाँ यह याद रहे कि मस्जिद बनाने का मतलब एक तो क़ब्र के ऊपर मस्जिद का निर्माण कर लेना है और दूसरा उनके पास या उनकी ओर मुँह करके नमाज़ पढ़ना है। इसके बाद आइशा -रज़ियल्लाहु अनहा- ने कहा : यदि अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने इस तरह से मना एवं सावधान न किया होता और सहाबा को इस बात की आशंका न होती कि अल्लाह के नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- की क़ब्र के साथ भी वही कुछ हो सकता है, जो यहूदियों एवं ईसाइयों ने अपने नबियों की क़ब्रों के साथ किया, तो आपको बाहर दफ़न किया जाता।
तथा अबू सईद खुदरी -रज़ियल्लाहु अनहु- का वर्णन है, वह कहते हैं : अली बिन अबू तालिब -रज़ियल्लाहु अनहु- ने नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- के पास यमन से सोने का एक अपरिशोधित टुकड़ा भेजा, जो चर्मशोधन की प्रक्रिया से गुज़रे हुए एक चमड़े में लिपटा हुआ था। वर्णनकर्ता का बयान है कि नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने उसे चार व्यक्तियों के बीच बाँट दिया। वह चार व्यक्ति थे : उयैना बिन बद्र, अक़रा बिन हाबिस, ज़ैद अल-ख़ैल और चौथे व्यक्ति थे अलक़मा या आमिर बिन तुफ़ैल। यह देखकर आपके एक साथी ने कहा : इन लोगों की तुलना में हम इस धन के कहीं अधिक हक़दार थे। वर्णनकर्ता कहते हैं कि जब इसकी सूचना नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- को मिली तो आपने फ़रमाया : "क्या तुम मुझे विश्वासपात्र नहीं समझते, जबकि मैं उसका विश्वासपात्र हूँ, जो आकाश के ऊपर है तथा मेरे पास सुबह-शाम ऊपर की सूचना आती है?" वर्णनकर्ता कहते हैं कि इतना सुनने के बाद एक व्यक्ति, जिसकी आँखें धँसी हुई थीं, गालों की हड्डियाँ उभरी हुई थीं, कपाल निकला हुआ था, दाढ़ी घनी थी, सिर मुंडा हुआ था और लुंगी टखनों से ऊपर थी, खड़ा होकर बोला : ऐ अल्लाह के रसूल! आप अल्लाह से डरिए! आपने कहा : "तेरा बुरा हो, क्या मैं धरती के ऊपर अल्लाह से सबसे अधिक डरने वाला व्यक्ति नहीं हूँ?" वर्णनकर्ता का कहना है कि फिर वह जाने लगा तो ख़ालिद बिन वलीद -रज़ियल्लाहु अन्हु- ने कहा : ऐ अल्लाह के रसूल! क्या मैं उसकी गर्दन न उड़ा दूँ? आपने फ़रमाया : "नहीं, हो सकता है कि वह नमाज़ पढ़ता हो।" ख़ालिद -रज़ियल्लाहु अनहु- ने कहा : बहुत-से नमाज़ी ऐसे हैं जो कहते कुछ हैं और दिल में कुछ और रखते हैं। आपने फ़रमाया : "मुझे लोगों के दिल चीर करके और उनके पेट फ़ाड़ कर के देखने का आदेश नहीं दिया गया है।" फिर उसे जाता देखकर फ़रमाया : "इसकी नस्ल से ऐसे लोग निकलेंगे जो अल्लाह की किताब तो फर्राटे से पढ़ेंगे, लेकिन वह उनके गले से नीचे नहीं उतरेगी। वह इस्लाम से ऐसे निकल जाएँगे जैसे तीर शिकार को चीरते हुए तेज़ी से निकल जाता है।" मैं समझता हूँ कि आपने यह भी कहा था : "अगर वो लोग मुझे मिल जाएँ, तो मैं उन्हें उसी तरह कत्ल करूँगा, जैसे समूद समुदाय के लोग मारे गए थे।"
इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया हैअली बिन अबू तालिब -रज़ियल्लाहु अनहु- ने नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- के पास यमन से सोने का एक अपरिशोधित टुकड़ा भेजा, जो चर्मशोधन की प्रक्रिया से गुज़रे हुए एक चमड़े में लिपटा हुआ था। वर्णनकर्ता आगे कहते हैं : अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने उसे निम्नलिखित चार लोगों के बीच बाँट दिया : उयैना बिन बद्र फ़ज़ारी, अक़रा बिन हाबिस हंज़ली, ज़ैद अल-ख़ैल नबहानी तथा अलक़मा बिन उलासा आमिरी। यह देख आपके साथियों में से एक व्यक्ति ने कहा : हम लोग इन लोगों की तुलना में इस धन के अधिक हक़दार थे। वर्णनकर्ता का कहना है : जब इसकी सूचना अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- को मिली, तो आपने कहा : "क्या तुम मुझे विश्वासपात्र नहीं समझते, जबकि मैं उसका विश्वासपात्र हूँ, जो आकाश में है तथा मेरे पास सुबह-शाम आकाश की सूचना आती है?" वर्णनकर्ता का कहना है कि इतना सुनने के बाद एक व्यक्ति, जिसकी आँखें धँसी हुई थीं, गालों की हड्डियाँ उभरी हुई थीं, कपाल निकला हुआ था, दाढ़ी घनी थी और अधिक लंबी नहीं थी, सिर मुंडा हुआ था और अपनी लुंगी को उठाए हुए था, खड़ा होकर बोला : ऐ अल्लाह के रसूल! आप अल्लाह से डरिए। यह सुन आपने कहा : "तेरा बुरा हो, क्या मैं धरती के ऊपर अल्लाह से सबसे अधिक डरने वाला व्यक्ति नहीं हूँ?" वर्णनकर्ता का कहना है कि फिर वह व्यक्ति जाने लगा तो ख़ालिद बिन वलीद -रज़ियल्लाहु अन्हु- कहने लगे : ऐ अल्लाह के रसूल! क्या मैं उसकी गर्दन न उड़ा दूँ? आपने फ़रमाया : नहीं, ऐसा नहीं करना है। हो सकता है कि वह नमाज़ पढ़ता हो। यह सुन ख़ालिद -रज़ियल्लाहु अनहु- ने कहा : बहुत-से नमाज़ी ऐसे मिल जाएँगे, जो कहते कुछ हैं और दिल में कुछ और रखते हैं। इसपर आपने कहा : मुझे लोगों के दिल चीर करके और उनके पेट फ़ाड़ कर के देखने का आदेश नहीं दिया गया है। मुझे केवल उनके प्रत्यक्ष व्यवहार को देखने का आदेश दिया गया है। वर्णनकर्ता कहते हैं : फिर आपने उसे जाता हुआ देखकर फ़रमाया : इसकी, इसके साथियों की या इसके क़बीले की नस्ल से ऐसे लोग निकलेंगे, जो अल्लाह की किताब तो बहुत महारत के साथ सुंदर आवाज़ में पढ़ेंगे, उनकी ज़बानें पवित्र क़ुरआन की तिलावत से हमेशा तर रहेंगी, लेकिन क़ुरआन उनके गले से नीचे नहीं उतरेगा कि उनके अंतरात्मा तक पहुँचकर उसका शुद्धिकरण करे। अल्लाह उनके इस कर्म को न तो ऊपर जाने देगा और न ग्रहण करेगा। वह लोग इस्लाम से ऐसे निकल जाएँगे जैसे तीर शिकार को चीरते हुए तेज़ी के साथ और चुपके से निकल जाता है। मुझे तो यह भी लगता है कि आपने कहा था : अगर मुझे वे मुसलमानों के विरुद्ध तलवार लेकर विद्रोह करके निकलते हुए मिल गए, तो मैं उनकी भीषण हत्या करूँगा, जैसे समूद जाति के साथ किया गया था।
अबू हुरैरा -रज़ियल्लाहु अनहु- का वर्णन है कि अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने फ़रमाया है : ''तुम में से जो सबसे कम दर्जे का जन्नती होगा (वो भी ऐसा होगा कि अल्लाह) उससे कहेगा : (जो चाहो) तमन्ना करो। चुनांचे वह बहुत सारी चीज़ों की तमन्ना करेगा। फिर अल्लाह उससे कहेगा : क्या तुमने तमन्ना कर ली? वह कहेगा : हाँ। तब अल्लाह उससे फ़रमाएगा : तुम्हारे लिए वो सारी चीज़ें हैं, जिनकी तमन्ना तुमने की है और उनके साथ उनके समान और भी चीज़ें हैं।''
इसे मुस्लिम ने रिवायत किया हैअल्लाह के नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- बता रहे हैं कि जन्नत के अंदर प्रवेश करने वाले लोगों में सबसे कम दर्जे वाले व्यक्ति की भी यह शान होगी कि अल्लाह उससे तमन्ना करने को कहेगा और जब वह सारी तमन्नाएँ सामने रख देगा और उसकी कोई आरज़ू बाक़ी नहीं रहेगी, तो अल्लाह उससे पूछेगा : तूने सारी तमन्नाएँ कर लीं? जवाब देगा : जी, कर ली। यह सुन अल्लाह उससे कहेगा : तुम्हारे लिए वो सारी चीज़ें हैं, जिनकी तमन्ना तुमने की है और उनके साथ उनके समान और भी चीज़ें हैं।
अबू हुरैरा -रज़ियल्लाहु अनहु- का वर्णन है कि अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- के पास मांस लाया गया और बाज़ू का मांस उठाकर आपके सामने रखा गया, क्योंकि बाज़ू का मांस आपको पसंद था। चुनांच आपने अपने दांत से काटकर एक बार खाया और उसके बाद फ़रमाया : “क़यामत के दिन मैं लोगों का सरदार रहूँगा। क्या तुम जानते हो ऐसा क्यों होगा? अल्लाह अगले तथा पिछले सब लोगों को एक बड़े तथा समतल मैदान में जमा करेगा, जहाँ आवाज़ देने वाले की आवाज़ सब को पहुँच सकेगी और देखने वाला सब को देख सकेगा और सूरज बहुत नज़दीक होगा। लोगों को असहनीय कष्ट एवं पीड़ा का सामना होगा। अतः, लोग आपस में कहेंगे : क्या तुम नहीं देखते कि कैसी तकलीफ़ में पड़ चुके हो? तुम किसी ऐसे व्यक्ति की तलाश क्यों नहीं करते, जो तुम्हारे रब के सामने तुम्हारी सिफ़ाश कर सके? फिर आपस में एक-दूसरे से कहेंगे कि आदम -अलैहिस्सलाम- के पास चलो। अतः, वे आदम -अलैहिस्सलाम- के पास आएँगे और कहेंगे : आप इन्सानों के पिता हैं, अल्लाह ने आपको अपने हाथों से बनाया, फिर आपके अंदर रूह फूँकी, फरिश्तों को सजदा करने का आदेश दिया, तो उन्होंने आपको सजदा किया। आप हमारे लिए अपने रब के पास सिफ़ारिश कर दें। क्या आप नहीं देखते कि हम कैसी तकलीफ़ में हैं? क्या आप नहीं देखते कि हमारा कष्ट कितना बढ़ चुका है? आदम -अलैहिस्सलाम- कहेंगे : आज मेरा रब बहुत गुस्से में है। ऐसा गुस्सा न कभी पहले किया था और न बाद में करेगा। मुझे उसने एक पेड़ के फल से मना किया था, लेकिन मैंने खा लिया था। मुझे अपनी चिंता सता रही है। मुझे अपनी चिंता सता रही है। मुझे अपनी चिंता सता रही है। तुम किसी दूसरे के पास जाओ। तुम नूह -अलैहिस्सलाम- के पास जाओ। लोग नूह -अलैहिस्सलाम- के पास आएँगे और कहेंगे : ऐ नूह, आप प्रथम रसूल बनकर ज़मीन पर आए और अल्लाह ने आपको अपना शुक्रगुज़ार बंदा कहा है। आप हमारे लिए अपने पालनहार के पास सिफ़ारिश कर दें। क्या आप नहीं देखते कि हम कैसी तकलीफ़ में हैं? वह कहेंगे : आज मेरा रब बहुत गुस्से में है। न इससे पहले कभी ऐसे गुस्से में था और न बाद में कभी ऐसे गुस्से में होगा। दरअसल, मुझे एक दुआ का अधिकार था, जो मैंने अपनी जाति के विरुद्ध कर डाली है। मुझे अपनी चिंता सता रही है। मुझे अपनी चिंता सता रही है। मुझे अपनी चिंता सता रही है। मेरे सिवा तुम किसी और के पास जाओ। तुम इब्राहीम -अलैहिस्सलाम- के पास जाओ। यह सुनकर सब लोग इब्राहीम -अलैहिस्सलाम- के पास आएँगे और कहेंगे : ऐ इब्राहीम! आप अल्लाह के नबी और तमाम अहले ज़मीन में से उसके दोस्त हैं। आप रब के पास हमारी सिफारिश करें। क्या आप नहीं देखते कि हमें कैसी तकलीफ़ हो रही है? लेकिन वह भी उनसे कहेंगे : आज मेरा रब बहुत गुस्से में है। न इससे पहले कभी इतना गुस्सा हुआ और न बाद में होगा। मैंने (दुनिया में) तीन झूठी बातें कही थीं। मुझे अपनी चिंता सता रही है। मुझे अपनी चिंता सता रही है। मुझे अपनी चिंता सता रही है। मेरे सिवा तुम किसी और के पास जाओ। अच्छा, तुम मूसा -अलैहिस्सलाम- के पास जाओ। फिर लोग मूसा -अलैहिस्सलाम- के पास जाएँगे और कहेंगे : ऐ मूसा ! आप अल्लाह के रसूल हैं। अल्लाह ने आपको, अपने साथ बात करने का सौभाग्य प्रदान करके और रसूल बनाकर, अन्य लोगों की तुलना में श्रेष्ठता प्रदान की है। आज आप अल्लाह के सामने हमारी सिफ़ारिश करें। क्या आप नहीं देखते कि हम किस प्रकार के कष्ट में हैं? मूसा -अलैहिस्सलाम- कहेंगे : आज तो मेरा रब बहुत गुस्से में है। इतना गुस्सा न कभी हुआ था और न कभी होगा। दरअसल, मैंने एक ऐसे व्यक्ति का वध कर दिया था, जिसके वध का मुझे आदेश न था। मुझे अपनी चिंता सता रही है। मुझे अपनी चिंता सता रही है। मुझे अपनी चिंता सता रही है। तुम किसी और के पास जाओ। तुम ईसा -अलैहिस्सलाम- के पास जाओ। चुनाँचे सब लोग ईसा -अलैहिस्सलाम- के पास जाएँगे और कहेंगे : ऐ ईसा! आप अल्लाह के रसूल और वह शब्द हैं, जो उसने मरयम -अलैहिस्सलाम- की तरफ़ भेजा था। आप उसकी ओर से प्रेषित रूह हैं और आपने गोद में लोगों से बात की थी। आप हमारे लिए सिफारिश करें। आप देखें कि हम किस मुसीबत में हैं? ईसा -अलैहिस्सलाम- कहेंगे कि आज मेरा परवरदिगार बहुत गुस्से में है। इतना गुस्सा वह न कभी हुआ था और न कभी में होगा। ईसा -अलैहिस्सलाम- किसी गुनाह का ज़िक्र नहीं करेंगे। अलबत्ता, यह ज़रूर कहेंगे : मुझे अपनी चिंता सता रही है। मुझे अपनी चिंता सता रही है। मुझे अपनी चिंता सता रही है। मेरे अलावा किसी और के पास जाओ। तुम लोग मुहम्मद -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- के पास जाओ। लोग मुहम्मद -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- के पास जाएँगे और कहेंगे : ऐ मुहम्मद! आप अल्लाह के रसूल और अंतिम नबी हैं। अल्लाह ने आपके अगले तथा पिछले सब गुनाह माफ़ कर दिए हैं। आप अल्लाह से हमारी सिफारिश फरमाएँ। क्या आप नहीं देखते कि हम कैसे कष्ट में हैं? अतः मैं चल पड़ूँगा और अर्श के नीचे जाकर अपने सर्वशक्तिमान एवं महान रब के सामने सजदे में गिर जाऊँगा। फिर अल्लाह अपनी प्रशंसा तथा स्तुति की ऐसी-ऐसी बातें मेरे दिल मे डाल देगा, जो मुझसे पहले किसी के दिल में डाली नहीं गई होंगी। चुनाँचे मैं उसी के अनुसार अल्लाह की प्रशंसा व स्तुति करूँगा। फिर कहा जाएगा : ऐ मुहम्मद! अपना सर उठाओ। तुम माँगो, तुम्हें दिया जाएगा तथा सिफ़ारिश करो, तुम्हारी सिफ़ारिश ग्रहण की जाएगी। अतः, मैं सर उठाऊँगा और कहूँगा : ऐ मेरे रब! मेरी उम्मत पर रहम फ़रमा। ऐ मेरे रब! मेरी उम्मत पर रहम फ़रमा। ऐ मेरे रब! मेरी उम्मत पर रहम फ़रमा। चुनाँचे कहा जाएगा : ऐ मुहम्मद! अपनी उम्मत के उन लोगों को, जिनका हिसाब नहीं होगा, जन्नत के दाएँ दरवाज़े से दाख़िल करो। जबकि वे अन्य लोगों के साथ, दूसरे दरवाज़ों से भी जन्नत में प्रवेश कर सकते हैं।” फिर आपने फरमाया : “क़सम है उस ज़ात की जिसके हाथ में मेरी जान है! जन्नत के दरवाज़ों के दो पाटों के बीच की दूरी मक्का और हिमयर -या मक्का और बुसरा- के बीच की दूरी के बराबर है।”
इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया हैअल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम अपने साथियों के साथ एक निमंत्रण में शरीक हुए। वहाँ आपके साथ बकरी का बाज़ू रखा गया। क्योंकि आपको बकरी के बाज़ू का मांस बहुत पसंद था। चुनांचे आपने अपने दाँत से एक बार उसे काटकर खाया और उसके बाद फ़रमाया : मैं क़यामत के दिन आदम की संतानों का सरदार रहूँगा। आपने यह बात अल्लाह के अनुग्रह का आभार व्यक्त करने के लिए कही। उसके बाद पूछा : क्या तुम जानते हो कि यह कैसे होगा? फ़रमाया : क़यामत के दिन सभी लोग एक विशाल, सपाट भूमि पर एकत्र किए जाएँगे। लोग इस तरह एकत्र होंगे कि एक पुकारने वाला सब को अपनी आवाज़ सुना सकेगा। अर्थात्, कोई बात करे, तो सब तक आवाज़ पहुँच जाएगी। भूमि इतनी सपाट होगी कि एक देखने वाला सब को देख सकेगा। कोई उसकी नज़र से छुपा नहीं रहेगा। दूसरे शब्दों में कहें तो कोई ऐसी वस्तु नहीं होगी, जो किसी को देखने वालों की नज़रों से छुपा सके। सूरज (का हाल यह होगा कि) सृष्टियों से एक मील निकट आ जाएगा। चुनांचे लोगों को असहनीय कष्ट एवं पीड़ा का सामना होगा। अतः सिफ़ारिश द्वारा उससे छुटकारा पाना चाहेंगे। ऐसे में अल्लाह ईमान वालों के दिलों में यह बात डालेगा कि वे मानव पिता आदम अलैहिस्सलाम के पास जाएँ। चुनांचे लोग उनके पास जाएँगे और उनकी फ़ज़ीलत बयान करेंगे, ताकि वह अल्लाह के यहाँ उनके लिए सिफ़ारिश कर दें। लोग उनसे कहेंगे : आप मानव पिता हैं। अल्लाह ने आपको अपने हाथ से पैदा किया है, अपने फ़रिश्तों से सजदा कराया है, हर वस्तु का नाम सिखाया है और आपके अंदर अपनी ओर से रूह फूँकी है। लेकिन वह असमर्थता व्यक्त कर देंगे और कहेंगे : मेरा पालनहार आज इतना क्रोधित है कि न इससे पहले कभी इतना क्रोधित था और न इसके बाद रहेगा। फिर वह उनसे होने वाले गुनाह का ज़िक्र करेंगे। गुनाह यह था कि अल्लाह ने उन्हें एक पेड़ के फल को खाने से मना किया था, लेकिन उन्होंने खा लिया था। वह कहेंगे : ख़ुद मुझे ही सिफ़ारिश की आवश्यकता है। तुम किसी और के पास चले जाओ। तुम नूह अलैहिस्सलाम के पास चले जाओ। चुनांचे लोग नूह अलैहिस्सलाम के पास जाएँगे और कहेंगे : आप इस धरा पर बसने वालों की ओर अल्लाह के भेजे हुए पहले रसूल हैं। अल्लाह ने आपको आभारी बंदे का नाम दिया है। लेकिन वह भी असमर्थता व्यक्त कर देंगे और कहेंगे : मेरा पालनहार आज इतना क्रोधित है कि न इससे पहले कभी इतना क्रोधित था और न इसके बाद रहेगा। दरअसल उन्हें एक दुआ करने का अधिकार दिया गया था, जो उन्होंने ख़ुद अपनी जाति के विरुद्ध कर डाली थी। अतः ख़ुद उन्हें ही सिफ़ारिश की ज़रूरत है। वह कहेंगे कि तुम किसी और के पास चले जाओ। तुम इब्राहीम अलैहिस्सलाम के पास चले जाओ। चुनांचे लोग इब्राहीम अलैहिस्सलाम के पास जाएँगे और कहेंगे : आप इस धरा पर अल्लाह के मित्र हैं। अतः अपने पालनहार के यहाँ हमारी सिफ़ारिश कर दें। क्या आप देखते नहीं कि हम किस हाल में हैं? लेकिन इब्राहीम अलैहिस्सलाम उनसे कहेंगे : मेरा पालनहार आज इतना क्रोधित है कि न इससे पहले कभी उतना क्रोधित था और न इसके बाद रहेगा। दरअसल मैंने तीन झूठ बोले थे। तीन झूठ से उनकी मुराद एक बार 'मैं बीमार हूँ कहना', एक बार 'यह काम उनमें से सबसे बड़े बुत ने किया है' कहना और एक बार शासक के फ़ितने से बचने के लिए अपनी पत्नी सारा से यह कहना है कि उसे बता देना कि मैं तुम्हारा भाई हूँ। सच्चाई यह है कि ये तीनों वाक्य सांकेतिक शब्दों में बात करने की श्रेणी में आते हैं, लेकिन चूँकि वे देखने में झूठ जैसे लगते थे, इसलिए उन्होंने उनके डर से ख़ुद को सिफ़ारिश करने के योग्य नहीं समझा। क्योंकि जो अल्लाह के बारे में ज्ञान और उसकी निकटता अधिक रखता है, वह उससे डरता भी ज़्यादा है। वह कह देंगे कि मुझे ख़ुद ही सिफ़ारिश की ज़रूरत है, इसलिए तुम किसी और के पास जाओ। तुम मूसा अलैहिस्सलाम के पास जाओ। चुनांचे लोग मूसा अलैहिस्सलाम के पास जाएँगे और कहेंगे : ऐ मूसा! आप अल्लाह के रसूल हैं। अल्लाह ने आपको रसूल बनाने के साथ बात करने का भी सम्मान प्रदान किया है। अतः आप अपने पालनहार के पास हमारे लिए सिफ़ारिश कर दें। क्या आप देखते नहीं कि हम किस अवस्था में हैं? लेकिन वह कहेंगे : मेरा पालनहार आज इतना क्रोधित है कि न इससे पहले कभी उतना क्रोधित था और न इसके बाद रहेगा। दरअसल मैंने एक व्यक्ति को मार डाला था, जिसे मारने का आदेश मुझे प्राप्त नहीं था। ख़ुद मुझे ही किसी की सिफ़ारिश की ज़रूरत है। तुम किसी और के पास चले जाओ। तुम ईसा बिन मरयम के पास चले जाओ। चुनांचे लोग ईसा अलैहिस्सलाम के पास जाएँगे और कहेंगे : आप अल्लाह के रसूल हैं, उसका शब्द हैं, जिसे उसने मरयम की ओर भेजा था और उसकी ओर से प्रेषित आत्मा हैं। आपने माँ की गोद ही में लोगों से बात की थी। क्या आप नहीं देखते कि हम किस अवस्था में हैं? लेकिन वह कहेंगे : मेरा पालनहार आज इतना क्रोधित है कि न इससे पहले कभी उतना क्रोधित था और न इसके बाद रहेगा। वह किसी गुनाह का उल्लेख नहीं करेंगे। अलबत्ता कहेंगे कि ख़ुद मुझे ही किसी की सिफ़ारिश की ज़रूरत है। तुम किसी और के पास चले जाओ। तुम मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के पास चले जाओ। चुनांचे लोग मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के पास जाएँगे और कहेंगे : आप अल्लाह के रसूल और अंतिम नबी हैं। अल्लाह ने आपके अगले तथा पिछले सभी गुनाह माफ़ कर दिए हैं। इसलिए अपने पालनहार के निकट हमारी सिफ़ारिश कर दीजिए। क्या आप देखते नहीं कि हम किस अवस्था में हैं? चुनांचे मैं चल पड़ूँगा, अर्श के नीचे पहुँचूँगा और अपने पालनहार के सामने सजदे में गिर जाऊँगा। फिर अल्लाह मुझे अपनी प्रशंसा एवं स्तुति के ऐसे-ऐसे शब्द सिखाएगा, जो मुझसे पहले किसी को नहीं सिखाए गए थे। फिर कहा जाएगा : ऐ मुहम्मद! आप सर उठाएँ। आप माँगें, आपको दिया जाएगा। आप सिफ़ारिश करें, आपकी सिफ़ारिश क़बूल की जाएगी। चुनांचे मैं सर उठाऊँगा और कहूँगा : ऐ मेरे पालनहार! मेरी उम्मत! ऐ मेरे पालनहार! मेरी उम्मत! ऐ मेरे पालनहार! मेरी उम्मत! चुनांचे आपकी सिफ़ारिश क़बूल कर ली जाएगी। तथा आपसे कहा जाएगा : ऐ मुहम्मद! आप अपनी उम्मत के ऐसे लोगों को जन्नत के दाएँ द्वार से अंदर दाख़िल करें, जिन्हें हिसाब नहीं देना है। जबकि वे दूसरे द्वारों से भी लोगों के साथ अंदर जा सकते हैं। फिर आपने कहा : उसकी क़सम, जिसके हाथ में मेरी जान है, जन्नत के दो किवाड़ों के बीच उतना फ़ासला है, जितना मक्का तथा यमन के सनआ के बीच है या जितना मक्का और शाम के बुसरा यानी हूरान नगर के बीच है।
अबू हुरैरा -रज़ियल्लाहु अनहु- का वर्णन है, वह कहते हैं : अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने औरत का वस्त्र पहनने वाले मर्द पर और मर्द का वस्त्र पहनने वाली औरत पर लानत फ़रमाई है।
इसे नसई ने अल-सुनन अल-कुबरा में तथा इब्न-ए-माजह ने समान अर्थ में एवं अह़मद ने रिवायत किया हैअल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम पर ऐसे पुरुष के लिए अल्लाह की दया से धुतकारे और दूर कर दिए जाने की बद-दुआ की है, जो महिलाओं के साथ विशेष वस्त्रों को पहनने में उनकी मुशाबहत अपनाए। यह मुशाबहत चाहे कपड़े की बनावट में हो, रंग में हो, तरीक़े में हो या पहनने और शृंगार के तरीक़े आदि में हो। इसी तरह आपने हर ऐसी महिला के लिए अल्लाह की दया से दूर कर दिए जाने की बद-दुआ की है, जो पुरुषों के विशेष वस्त्र पहनकर उनकी मुशाबहत अपनाए। यह दरअसल बड़ा गुनाह है।