Hadeeth Cards
Da'wa cards that highlight great meanings from the noble prophetic hadiths in a simple style and attractive display that helps the Muslim to have a deeper understanding of his religion in an easy way






























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इस हदीस में खाने-पीने के शिष्टाचारों में से एक शिष्टाटार का बयान है। वह है, जिस बर्तन में खाना खाया या पिया जा रहा हो, उसमें साँस लेना या फूँक मारना। बर्तन में साँस लेने से मना इसलिए किया गया है कि इसके कई नुक़सान हैं। जैसे बर्तन का गंदा हो जाना और एक व्यक्ति के साँस लेने के बाद दूसरे को उससे पीने से घिन आना आदि। जैसा कि एक ही समय साँस लेने और पीने से दम भी घुट सकता है। अतः कुछ पीते समय बर्तन के बाहर तीन बार साँस लेना चाहिए। यह बात हदीस में आई है और यह अधिक अच्छा भी है। इस हदीस में खाने-पीने की चीज़ों में फूँक मारने से भी मना किया गया है। चाहे कारण कुछ भी हो। जैसे खाने का गर्म होना या कोई वस्तु हटाना आदि। यह मनाही इसलिए आई है, ताकि खाने-पीने की चीज़ों को थूक और मुँह की बदबू आदि की गंदगी से बचाया जा सके।
इस हदीस का अर्थ यह है कि जब तुममें से कोई किसी को शिष्ट बनाने, दंड देने, हद लागू करने या किसी झगड़े आदि के कारण मारे, तो चेहरे पर न मारे और इससे हर हाल में बचे। चाहे मामला शरई हद लागू करने ही का क्यों न हो। क्योंकि इन्सान का चेहरा उसके शरीर का सबसे प्रतिष्ठित अंग है और उसी से इन्सान किसी से आमने-सामने होता है। उसपर मारने से उसका कोई अंग नष्ट भी हो सकता है अथवा उसे कोई भी नुक़सान हो सकता है। इसलिए उसपर मारने से बचना ज़रूरी है। चेहरे पर मारना हराम है, चाहे मारना अपने आप में सही हो या ग़लत।
इस हदीस में है कि एक व्यक्ति यमन से आया कि अल्लाह के नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- से जिहाद की अनुमति तलब करे। आपने उसके माता-पिता के बारे में पूछा और यह जानना चाहा कि उसने उनकी अनुमति ली है या नहीं, तो पता चला कि उसने उनकी अनुमति नहीं ली है। अतः आपने उसे आदेश दिया कि अपने माता-पिता के पास वापस चला जाए, उनके साथ अच्छा व्यवहार करे और उनकी सेवा करे। इस हदीस से मालूम हुआ कि जिहाद के लिए माता-पिता की अनुमति लेना आवश्यक है।
यह हदीस प्रशासनिक पदों तथा शरई दृष्टिकोण से उनके समान समझे जाने वाले अन्य पदों, जैसे न्यायिक ज़िम्मेवारियों के महत्व तथा आख़िरत में सामने आने वाली उनके प्रभावों से अवगत करती है। साथ ही उन्हें तलब करने और उनकी इच्छा रखने से सावधान करती है। ज्ञात हो कि यह चेतावनी उसके लिए है, जो इन पदों की योग्यता न रखने के बावजूद इन्हें प्राप्त करने की इच्छा रखता हो और अपने प्रयास से इन्हें प्राप्त करता हो। इसके विपरीत यदि कोई इनकी योग्यता रखता हो, इन्हें प्राप्त करने के लिए प्रयास न करता हो और इन्हें ग्रहण करने के बाद न्याय से काम लेता हो, तो इन्हें संभालने में अल्लाह की ओर से उसकी सहायता की जाएगी, जैसा कि अन्य हदीसों में उल्लिखित है। इस हदीस में प्रशासनिक पद के बारे में कहा गया है कि वह अच्छी दूध पिलाने वाली है, क्योंकि उससे धन, पद एवं आदेश लागू होने के रूप में कई लाभ होते हैं और बुरी दूध छुड़ाने वाली है, क्योंकि क़यामत के दिन उसके बड़े कड़वे नतीजे सामने आएँगे और उसके कारण इन्सान को शर्मिंदगियों का सामना करना पड़ेगा।
एक व्यक्ति अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के पास आया और कहने लगा कि ऐ अल्लाह के रसूल! मैंने हर तरह के गुनाह किए हैं और कोई छोटा-बड़ा गुनाह नहीं छोड़ा है। ऐसे में क्या मुझे क्षमा प्राप्त हो सकती है? यह सुन आपने उससे पूछा कि क्या तुम इस बात की गवाही नहीं देते कि अल्लाह के सिवा कोई सत्य पूज्य नहीं है और मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम अल्लाह के रसूल हैं?: आपने अपने इस प्रश्न को तीन बार दोहराया। चुनांचे उसने उत्तर दिया कि अवश्य ही मैं इसकी गवाही देता हूँ। उत्तर सुनने के बाद अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने उनको दोनों गवाहियों की फ़ज़ीलत बताई और यह स्पष्ट कर दिया कि इससे गुनाह मिटा दिए जाते हैं और तौबा पहले किए हुए सारे गुनाहों को ख़त्म कर देती है।
अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने इस उद्देश्य से ज्ञान अर्जित करने से मना किया है कि उलेमा से बहस की जाए और बताया जाए कि मैं भी तुम्हारे जैसा आलिम हूँ अथवा अज्ञान तथा नादान लोगों से बहस की जाए। इस नीयत से भी ज्ञान अर्जित करने से मना किया है कि सभाओं में आगे बैठने का अवसर मिले। जिसने ऐसा किया वह अपनी रियाकारी (दिखावा) के कारण जहन्नम का हक़दार होगा।
अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने बताया है कि अल्लाह ने इस्लाम का उदाहरण एक ऐसे सीधे रास्ते से दिया है, जिसमें कहीं कोई टेढ़ापन नहीं है, इस रास्ते के दोनों तरफ दो दीवारें हैं, जो उसे दोनों तरफ़ से घेरी हुई हैं, इन दोनों दीवारों से मुराद अल्लाह की सीमाएँ हैं, इन दोनों दीवारों पर बीच-बीच में खुले द्वार हैं, जिनसे मुराद अल्लाह की हराम की हुई चीज़ें हैं, उन द्वारों पर पर्दे लटके हुए हैं, जो रास्ते से गुज़रने वाले को पता होने नहीं देते कि अंदर क्या है, रास्ते के आरंभ में एक पुकारने वाला है, जो लोगों का मार्गदर्शन करते हुए कहता है : रास्ते पर सीधे चलते रहो और इधर-उधर न भटको। यह पुकारने वाला अल्लाह की किताब है। एक और पुकारने वाला रास्ते के ऊपर नियुक्त है। रास्ते में चलने वाला जब भी किसी द्वार पर लटके पर्दे को थोड़ा-बहुत हटाना चाहता है, तो यह पुकारने वाला उसे डाँटता है और कहता है : तेरा बुरा हो, इसे न खोल। अगर इसे खोलेगा, तो इसमें घुस जाएगा और इसमें प्रवेश करने से खुद को रोक न सकेगा। यह पुकारने वाला हर मुसलमान के दिल में मौजूद अल्लाह का उपदेश देने वाला है।
अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम बता रहे हैं कि नमाज़ में तीन आयतों का पढ़ना इस बात से उत्तम है कि आदमी तीन मोटी-मोटी और बड़ी-बड़ी गाभिन ऊँटनियाँ अपने घर में पाए।
इस हदीस में अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम बता रहे हैं कि खुले तौर पर क़ुरआन पढ़ने वाला खुले तौर पर सदक़ा करने वाले की तरह है। जबकि छुपाकर क़ुरआन पढ़ने वाला छुपाकर सदक़ा करने वाले की तरह है।