





























Hadeeth Cards
Da'wa cards that highlight great meanings from the noble prophetic hadiths in a simple style and attractive display that helps the Muslim to have a deeper understanding of his religion in an easy way
All
अली रज़ियल्लाहु अनहु से रिवायत है, वह कहते हैं : मैं एक ऐसा व्यक्ति था कि जब अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम से कोई हदीस सुनता, तो उससे अल्लाह मुझे जितना फ़ायदा पहुँचाना चाहता, पहुँचाता। और जब आपका कोई साथी मुझे कोई हदीस सुनाता, तो मैं उसे क़सम खाने को कहता। जब वह मेरे कहने पर क़सम खा लेता, तो मैं उसकी बात की पुष्टि करता। मुझे अबू बक्र रज़ियल्लाहु अनहु ने बताया है और उन्होंने सच कहा है कि मैंने अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम को कहते हुए सुना है : "कोई भी बंदा जब कोई गुनाह करता है, फिर खड़े होकर पवित्रता अरजन करता है, फिर नमाज़ पढ़ता है, फिर अल्लाह से क्षमा याचना करता है, तो अल्लाह उसे क्षमा कर देता है।" फिर आपने यह आयत पढ़ी : {وَالَّذِينَ إِذَا فَعَلُوا فَاحِشَةً أَوْ ظَلَمُوا أَنْفُسَهُمْ ذَكَرُوا اللهَ فَاسْتَغْفَرُوا لِذُنُوبِهِمْ} "और जब कभी वे कोई बड़ा पाप कर जाएँ अथवा अपने ऊपर अत्याचार कर लें, तो अल्लाह को याद करते हैं, फिर अपने पापों के लिए क्षमा माँगते हैं।" [सूरा आल-ए-इमरान: 135]
इसे अबू दावूद ने, तिर्मिज़ी ने तथा नसई ने अल-कुबरा में इसी प्रकार इब्न-ए-माजह ने और अह़मद ने रिवायत किया हैअल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने बताया कि जब कोई बंदा कोई गुनाह करता है, फिर अच्छी तरह वज़ू करता है, फिर खड़े होकर अपने इस गुनाह से तौबा करने की नीयत से दो रकात नमाज़ पढ़ता है और फिर अल्लाह से क्षमा माँगता है, तो अल्लाह उसे क्षमा कर देता है। फिर अल्लाह के नबी सल्ल्ललाहु अलैहि व सल्लम ने यह आयत पढ़ी : "और जब कभी वे कोई बड़ा पाप कर जाएँ अथवा अपने ऊपर अत्याचार कर लें, तो अल्लाह को याद करते हैं, फिर अपने पापों के लिए क्षमा माँगते हैं -तथा अल्लाह के सिवा कौन है, जो पापों को क्षमा करे?- और अपने किए पर जान-बूझ कर अड़े नहीं रहते।" [सूरा आल-ए-इमरान: 135]
अबू उमामा बाहिली रज़ियल्लाहु अनहु का वर्णन है, वह कहते हैं : एक व्यक्ति अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के पास आया और पूछा : ऐसे व्यक्ति के बारे में आपकी क्या राय है, जो जिहाद में प्रतिफल एवं शोहरत दोनों की चाहत में शरीक होता है? उसे क्या मिलेगा? अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने जवाब दिया : "उसे कुछ नहीं मिलेगा।" उसने अपना सवाल तीन बार दोहराया और अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने हर बार कह दिया कि "उसे कुछ नहीं मिलेगा।" फिर फ़रमाया : "अल्लाह ग्रहण उसी कार्य को करता है, जो विशुद्ध रूप से उसी के लिए उसी की प्रसन्नता की प्राप्ति के लिए किया गया हो।"
इसे नसई ने रिवायत किया हैएक व्यक्ति अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के पास किसी ऐसे व्यक्ति के बारे में पूछने आया, जो जिहाद में अल्लाह के यहाँ प्रितफल प्राप्त करने और लोगों की प्रशंसा बटोरने के लिए शामिल होता हो। दरअसल वह जानना चाहता था कि ऐसे व्यक्ति को अल्लाह के यहाँ प्रतिफल मिलेगा या नहीं? चुनांचे अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने उत्तर दिया कि उसे अल्लाह के यहाँ कोई प्रतिफल नहीं मिलेगा। क्योंकि उसने अपनी नीयत में अल्लाह के सिवा को शामिल कर लिया। उस व्यक्ति ने अपना यह सवाल अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के सामने तीन बार रखा और आपने हर बार यही जवाब दिया कि उसे कोई प्रतिफल नहीं मिलेगा। उसके बाद अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने अल्लाह के यहाँ किसी कार्य के ग्रहण होने या न होने के संबंध में एक सिद्धांत बता दिया। सिद्धांत यह है कि अल्लाह केवल उसी कार्य को ग्रहण करता है, जिसे विशुद्ध रूप से उसके लिए और उसकी प्रसन्नता प्राप्त करने के लिए किया गया हो तथा उसमें किसी को साझी न बनाया गया हो।
अबू हुरैरा -रज़ियल्लाहु अनहु- का वर्णन है, वह कहते हैं कि अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने फ़रमाया : “आदमी के अच्छे मुसलमान होने की एक निशानी यह है कि वह बेमतलब की चीज़ों को छोड़ दे।”
इस ह़दीस़ को तिर्मिज़ी आदि ने रिवायत किया हैअल्लाह के नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने बयान फ़रमाया है कि एक मुसलमान के संपूर्ण मुसलमान तथा मोमिन होने का एक चिह्न यह है कि वह ऐसी बातों एवं कार्यों से दूर रहे, जो उससे सरोकार न रखते हों, उसके मतलब के न हों और उसके लिए लाभदायक न हों। या फिर ऐसे सांसारिक एवं धार्मिक चीज़ों से दूर रहे, जो उससे सरोकार न रखते हों। क्योंकि बिना सरोकार की चीज़ों में व्यस्तता सरोकार की चीज़ों से दूर कर सकती है या ऐसी चीज़ों की ओर ले जा सकती है, जिनसे बचना ज़रूरी है, क्योंकि क़यामत के दिन इन्सान से उसके अपने कर्मों के बारे में पूछा जाएगा।
अब्दुल्लाह बिन मसऊद रज़ियल्लाहु अनहु का वर्णन है, वह कहते हैं कि अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फ़रमाया : "मोमिन ताना देने वाला, लानत करने वाला, बदज़ुबान और अनर्गल बकने वाला नहीं होता।"
इसे तिर्मिज़ी ने रिवायत किया हैअल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने यहाँ बताया है कि एक संपूर्ण ईमान वाले मोमिन को शोभा नहीं देता कि किसी की नस्ल पर लांछन लगाए, बहुत ज़्यादा गाली-गलौज और लानत करे तथा हया-शर्म उतार फेंककर बद-ज़ुबानी करता फिरे।
अबू हुरैरा -रज़ियल्लाहु अनहु- का वर्णन है, वह कहते हैं कि मैंने अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- को कहते हुए सुना है : "बूढ़े व्यक्ति का दिल हमेशा दो चीज़ों में जवान रहता है। दुनिया से प्रेम और लम्बी-लम्बी आशाओं में।"
इसे बुख़ारी ने रिवायत किया हैअल्लाह के नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने बताया है कि इन्सान बूढ़ा हो जाता है और उसका शरीर कमज़ोर हो जाता है, लेकिन उसका दिल दो चीज़ों की मोहब्बत में जवान रहता है : 1- दुनिया की मोहब्बत अधिक से अधिक धन दौलत की चाहत करके। 2- लंबा जीवन, लंबी उम्र और आशाएँ।
अबू हुरैरा -रज़ियल्लाहु अनहु- का वर्णन है, वह कहते हैं कि अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने फ़रमाया है : "आनंद को समाप्त करने वाली चीज़ का ज़िक्र अधिक से अधिक करो।" यानी मौत का।
इसे तिर्मिज़ी, नसई और इब्न-ए-माजह ने रिवायत किया हैअल्लाह के नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने अधिक से अधिक मौत का ज़िक्र करने की प्रेरणा दी है, जिसका ज़िक्र आख़िरत की याद दिलाता है और आख़िरत की याद इन्सान के दिल से दुनिया के आनंद को निकाल फेंकती है। ख़ास तौर से हराम तरीक़े से प्राप्त किए गए आनंद को।
अब्दुल्लाह बिन उमर -रज़ियल्लाहु अनहुमा- का वर्णन है, वह कहते हैं : हम लोग अल्लाह के नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- के साथ हिज्र से गुज़रे, तो अल्लाह के नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने हम लोगों से फ़रमाया : "तुम ऐसे लोगों के घरों में रोते हुए प्रवेश करो, जिन्होंने अपने ऊपर अत्याचार किए हैं। कहीं ऐसा न हो कि तुम्हें भी उसी प्रकार के अज़ाब का सामना करना पड़ जाए, जिस प्रकार के अज़ाब का सामना उन्हें करना पड़ा है।" फिर अपनी सवारी को झिड़का, तेज़ हाँका और उसे पीछे छोड़ दिया।
इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया हैअल्लाह के नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- जब समूद जाति की बस्ती से गुज़रे तो फ़रमाया कि अल्लाह के अज़ाब के शिकार होने वाले लोगों, जिनहोंने अपने ऊपर अत्याचार किए थे, की बस्ती में प्रवेश करना या जाना हो, तो रोते हुए और उनके अंत से शिक्षा ग्रहण करते हुए ही जाओ। इस डर से कि कहीं ऐसा न हो कि तुम्हें भी उसी प्रकार के अज़ाब का सामना करना न पड़े, जिस प्रकार के अज़ाब का शिकार उनको होना पड़ा था। फिर आपने अपनी सवारी को झिड़का, तेज़ भगाया और वहाँ से गुज़र गए।
हुज़ैफ़ा -रज़ियल्लाहु अनहु- का वर्णन है, वह कहते हैं : हम लोग उमर -रज़ियल्लाहु अनहु- के पास मौजूद थे कि इसी दौरान उन्होंने पूछा : आपमें से किसने अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- को फ़ितनों का ज़िक्र करते हुए सुना है? कई लोगों ने कहा : हमने आपको ऐसा कहते हुए सुना है। उमर -रज़ियल्लाहु अनहु- ने कहा : शायद आप लोग परिवार और पड़ोसी का फ़ितना समझ रहे हैं? सहाबा ने कहा : जी हाँ। उमर -रज़ियल्लाहु अनहु- ने कहा : इस तरह के फ़ितने को नमाज़, रोज़ा और सदक़ा मिटा देता है। आपमें से किसने अल्लाह के नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- को उस फ़ितने का ज़िक्र करते हुए सुना है, जो समुद्र की लहरों की तरह उठेगा? हुज़ैफ़ा -रज़ियल्लाहु अनहु- कहते हैं : उनकी यह बात सुन सब लोग ख़ामोश रह गए। तब मैंने कहा : मैंने सुना है। उमर -रज़ियल्लाहु अनहु- ने कहा : शाबाश, बुहत खूब। अब हुज़ैफ़ा -रज़ियल्लाहु अनहु- ने कहा कि मैंने अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- को कहते हुए सुना है : "फ़ितने दिलों पर चटाई की तीलियों की तरह एक के बाद एक आते रहते हैं। ऐसे में जो दिल उन्हें अवशोषित कर लेता है उसमें एक काला निशान डाल दिया जाता है और जो दिल उन्हें अस्वीकार कर देता है, उसमें एक सफ़ेद निशान डाल दिया जाता है। इस तरह दिल दो प्रकार के हो जाते हैं। एक चिकने पत्थर की तरह सफ़ेद दिल, जिसे आकाशों तथा धरती के रहते तक कोई फ़ितना हानि नहीं पहुँचा सकता और दूसरा काला और बदरंग दिल, जो उलटा रखे हुए लोटे की भांति हो, वह न तो अच्छाई को पहचानता है और न ही बुराई का खंडन करता है, सिवाय उसके जो उसने अपनी इच्छाओं से ग्रहण किया है।" हुज़ैफ़ा कहते हैं : तथा मैंने उमर रज़ियल्लाहु अनहु को बताया कि आपके और उन फ़ितनों के बीच एक बंद द्वार है, जो तोड़ दिया जाने ही वाला है। उमर ने पूछा : क्या तोड़ दिया जाएगा, तेरा पिता न हो? क्योंकि अगर खोल दिया गया तो हो सकता है कि दोबारा बंद हो जाए। मैंने कहा : खोला नहीं बल्कि तोड़ दिया जाएगा। तथा मैंने उनको बताया कि वह द्वार एक व्यक्ति है, जो जल्द ही मार दिया जाएगा या मर जाएगा। यह कोई भ्रांति नहीं है। अबू ख़ालिद कहते हैं : मैंने साद से पूछा : ऐ अबू मालिक! (इस हदीस में आए हुए शब्द) 'असवद मुरबाद्द' का क्या अर्थ है? उन्होंने उत्तर दिया : काले रंग में सख़्त सफ़ेद रंग। मैंने पूछा : 'अल-कूज़ु मुख़ज्जियन' का क्या अर्थ है? उन्होंने उत्तर दिया : उलटा रखा हुआ।
इसे मुस्लिम ने रिवायत किया हैख़लीफ़ा उमर -रज़ियल्लाहु अनहु- अपनी सभा में थे और उनके साथ कुछ सहाबा मौजूद थे। इसी बीच उमर -रज़ियल्लाहु अनहु- ने उनसे पूछा : आपमें से किसने अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- को फ़ितनों का ज़िक्र करते हुए सुना है? कुछ सहाबा ने कहा : हमने आपको फ़ितनों का ज़िक्र करते हुए सुना है। यह सुन उमर रज़ियल्लाहु अनहु ने कहा : शायद तुम बीवी-बच्चों के कारण सामने आने वाली परीक्षा तथा फ़ितना मुराद ले रहे हो। जैसे उनका अत्यधिक प्रेम, उनके हितों की रक्षा की तीव्र इच्छा, उनमें व्यस्तता के कारण बहुत-सी भलाइयों को नज़र अंदाज़ कर देना या उनके अधिकारों को अदा करने, उन्हें संस्कार एवं शिक्षा देने में कोताही करना तथा इसी तरह अपने पड़ोसी आदि का फ़ितना। क्या तुम्हारी मुराद ये फ़ितने हैं? उन्होंने उत्तर दिया : निश्चित रूप से हमारी मुराद यही है। उमर रज़ियल्लाहु अनहु ने कहा : ये ऐसे फ़ितने हैं, जो आत्मचिंतन का तक़ाज़ा करते हैं। इनमें से कुछ गुनाह ऐसे भी हैं, जिन्हें नेकियों, जैसे नमाज़, रोज़े और सदक़े से मिटा दिए जाने की आशा है। लेकिन यह बताओ कि तुममें से किसने अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम को ऐसे फ़ितनों का ज़िक्र करते हुए सुना है, जो इतने भयावह एवं व्यापक होंगे कि लोगों को समुद्र की लहरों की तरह हिलाकर रख देंगे। उनका प्रश्न सुनकर सब लोग ख़ामोश हो गए, लेकिन हुज़ैफ़ा बिन यमान रज़ियल्लाहु अनहु ने फ़रमाया : मैंने अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम को इस तरह के फ़ितनों का ज़िक्र करते हुए सुना है। इससे उमर रज़ियल्लाहु अनहु ख़ुश हो गए और फ़रमाया : तेरे पिता के क्या कहने कि उसने तुझ जैसे संतान को जन्म दिया। ज़रा बताओ कि तुमने क्या सुना है? हुज़ैफ़ा ने कहा : अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फ़रमाया है : फ़ितने प्रकट होते रहते हैं और मानव हृदय से इस तरह चिपक जाते हैं, जिस तरह चटाई सोने वाले के पहलू में चिपक जाती है। फ़ितनों का इस तरह चिपकना हृदय को प्रभावित करता है। ये फ़ितने एक के बाद होते रहते हैं। ऐसे में फ़ितने जिस हृदय के अंदर प्रवेश कर गए और पानी की तरह अवशोषित हो गए, उसमें एक काला निशान पड़ जाता है और जिस हृदय ने उन्हें ठुकरा दिया, उसमें एक सफ़ेद निशान पड़ जाता है। फलस्वरूप हृदय दो प्रकार के हो जाते हैं : ऐसा हृदय जो ईमान का लिहाज़ रखने, हर प्रकार के दोष से सुरक्षित रहने और फ़ितनों की चपेट में न आने के कारण बिल्कुल सफ़ेद होता है, मानो जैसे एक चिकना पत्थर हो जिसमें कुछ लगा हुआ न हो। ऐसे हृदय को फ़ितने नुक़सान नहीं पहुँचा सकते, यहाँ तक कि अल्लाह से जा मिले। दूसरा ऐसा हृदय कि फ़ितनों के कारण उसका रंग बदलकर काला हो गया हो और वह झुके हुए या उलटे रखे हुए लोटे की तरह हो कि उसमें कुछ टिकता न हो। उसपर न कोई अच्छी बात असर करती हो और न हिकमत अपना प्रभाव छोड़ती हो। वह न सही का समर्थन करे और न ग़लत का खंडन करे। सिवाय उसके जिसे उसकी आत्मा पसंद करे और चाहे। हुज़ैफ़ा रज़ियल्लाहु अनहु ने उमर रज़ियल्लाहु अनहु से कहा : ये फ़ितने आपके जीवन काल में प्रकट नहीं होंगे। इनके तथा आपके बीच एक बंद द्वार है, जो बहुत जल्द तोड़ दिया जाएगा। उमर रज़ियल्लाहु अनहु ने पूछा : क्या उसे तोड़ ही दिया जाएगा? क्योंकि अगर खोल दिया जाता तो बंद कर दिए जाने की संभावना रहती। हुज़ैफ़ा रज़ियल्लाहु अनहु ने उत्तर दिया : उसे खोला नहीं, बल्कि तोड़ दिया जाएगा। और वह द्वार दरअसल एक व्यक्ति है, जिसे मार दिया जाएगा या जो मर जाएगा। एक बात यह भी याद रहे कि मैंने जो सूचना दी है, वह एक सच्ची एवं पुष्ट सूचना है। यह अह्ल-ए-किताब की किताबों से ली हुई सूचना नहीं और न ही किसी राय रखने वाले की अपनी सोच है, बल्कि अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम की हदीस है।
अब्दुल्लाह बिन अब्बास- रज़ियल्लाहु अन्हुमा- कहते हैं कि नबी- सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने फरमायाः "जब तुम में से कोई खाना खा चुके, तो अपना हाथ चाटे अथवा चटवाए बिना साफ़ किए।"
इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है।नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने खाने वाले को आदेश दिया कि खाने के पश्चात हाथ चाटे अथवा चटवाए बिना धोए। इसका कारण कई हदीसों में है कि उसे ज्ञान नहीं है कि किस खाने में बरकत है। इसी कारण नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने उंगलियों को चाटने का आदेश दिया, होसकता है बरकत उंगलियों में लगे खाने के किसी अंश में हो।