Hadeeth Cards
Da'wa cards that highlight great meanings from the noble prophetic hadiths in a simple style and attractive display that helps the Muslim to have a deeper understanding of his religion in an easy way






























Da'wa cards that highlight great meanings from the noble prophetic hadiths in a simple style and attractive display that helps the Muslim to have a deeper understanding of his religion in an easy way
अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम बता रहे हैं कि क़यामत के दिन मोमिन के पलड़े में उसके कथनों एवं कर्मों में सबसे ज़्यादा वज़नी वस्तु होगी, अच्छा आचरण। अच्छे आचरण का अर्थ है, हँसकर मिलना, तकलीफ देने से बचना और भला करना। अल्लाह बुरा काम करने वाले, बुरी बात कहने वाले और बद-ज़बानी करने वाले इन्सान से नफ़रत करता है।
यह हदीस माता-पिता के अधिकार के महत्व का प्रमाण है। इसी तरह उनके कष्ट एवं उन्हें भला-बुरा कहने का कारण बनना महा पाप है। फिर जब उन्हें गाली दिलवाने तथा उनकी लानत का कारण बनना महा पाप है, तो उन्हें प्रत्यक्ष रूप से लानत करना अधिक घृणित है। जब आपने यह बताया कि उन्हें बुरा-भला कहना महा पाप है, तो उपस्थित लोगों ने इसपर आश्चर्य व्यक्त किया। क्योंकि उन्हें यह समझ में नहीं आ रहा था कि कोई प्रत्यक्ष रूप से अपने माता-पिता को कैसे गाली दे सकता है? तो आपने स्पष्ट किया कि ऐसा माता-पिता को गाली देने का कारण बनने के द्वारा होगा कि जब कोई किसी के पिता अथवा माता को गाली देगा, तो वह उसके पिता अथवा माता को गाली देगा।
इस हदीस में उस व्यक्ति को बड़ी कठोर चेतावनी दी गई है, जो लोगों की बात चुपके से सुने और वे इस बात को पसंद न करते हों कि उनकी बात सुनी जाए। दरअसल यह इनसान के अंदर पाया जाने वाला एक बुरा आचरण है, जो कि महा पाप है। फिर, क़यामत के दिन इनसान को उसी प्रकार का बदला मिलेगा, जिस प्रकार का उसका कर्म रहा हो। यही कारण है कि उसके कानों में सीसा पिघलाकर डाला जाएगा। फिर इस बात से कोई फ़र्क़ नहीं पड़ता कि सुनने वाला सही उद्देश्य से सुने या बिना किसी उद्देश्य के। क्योंकि कुछ लोगों को यह बात पसंद नहीं होती कि उनकी बात कोई सुने। यद्यपि उनकी बात में कोई दोष, खराबी या किसी के प्रति कोई बदज़ुबानी न हो।
"क्या अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- के सहाबा में मुसाफ़हे का चलन था?" यानी जब वे मुलाक़ात के समय सलाम करते थे, तो क्या उसके बाद प्रेम में वृद्धि के लिए तथा सम्मानस्वरूप एक-दूसरे से मुसाफ़हा भी करते थे? याद रहे कि मुसाफ़हा दाहिने हाथ से होता है और जब दो व्यक्ति मुसाफ़हा करते हैं, तो अलग होने से पहले दोनों को क्षमा कर दिया जाता है। यह हदीस मुलाक़ात के समय मुसाफ़हा की फ़ज़ीलत बताती है। याद रहे कि मुसाफ़हा की फ़ज़ीलत उस समय है, जब इनसान एक-दूसरे से बात करने या फिर इस तरह के किसी और उद्देश्य से मिले। जहाँ तक बाज़ार में चलते हुए होने वाली मुलाक़ात की बात है, तो सहाबा उस समय मुसाफ़हा नहीं करते थे। यानी जब कोई बाज़ार में किसी के पास से गुज़रे, तो उसे सलाम कर देना ही काफ़ी है।
यह हदीस इस बात का प्रमाण है कि तसबीह सर्वशक्तिमान एवं महान अल्लाह के निकट सबसे प्रिय वाणी है, क्योंकि तसबीह का अर्थ है अल्लाह को उन तमाम उपमाओं, समानताओं, कमियों एवं अनुचित बातों से पवित्र घोषित करना, जो उसके योग्य नहीं हैं। कहने वाले का यह कहना "अपनी प्रशंसा के साथ" दरअसल इस बात का एतराफ़ है कि तसबीह भी पवित्र अल्लाह की प्रशंसा के कारण संभव हो सकी, अतः यह भी उसी का एहसान है। इसका एक अन्य अर्थ हो सकता है : मैं उसकी पवित्रता उसकी प्रशंसा के साथ बयान करता हूँ, क्योंकि उसी ने मुझे पवित्रता बयान करने का सुयोग प्रदान किया है। अतः (سبحان الله وبحمده) अल्लाह के निकट सबसे प्रिय वाणी है, क्योंकि उसके अंदर अल्लाह की पाकी का भी बयान है और उसकी प्रशंसा भी है।
अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने इस बात से सावधान किया है कि किसी के सामने आप सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम का नाम, कुनयत या ज़िक्र आए और वह आपपर दरूद न भेजे। आपने कहा : वह व्यक्ति पूर्ण रूप से कंजूस है, जिसके सामने मेरा ज़िक्र हो और वह मुझपर दरूद न भेजे। इसके कई कारण हैं : 1- उसने एक ऐसी चीज़ खर्च करने में कंजूसी दिखाई, जिसमें ज़रा भी घाटा नहीं है। उसमें न माल खर्च होता है और न मेहनत लगती है। 2- उसने खुद को अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम पर दरूद भेजने के प्रतिफल से वंचित कर लिया। उसने आपपर दरूद न भेजकर एक ऐसे हक़ की अदायगी में कंजूसी दिखाई, जो इस संबंध में आए हुए आदेश के अनुपालन और प्रतिफल की प्राप्ति के लिए उसे अदा करना था। 3- अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम पर दरूद भेजना हमारे ऊपर आपके अधिकारों में से एक अधिकार की अदायगी है। क्योंकि आपने हमें शिक्षा दी, हमारा मार्गदर्शन किया, हमें अल्लाह की ओर बुलाया और हमारे लिए वह्य (प्रकाशना) और एक भव्य शरीयत ले आए। अतः अल्लाह के पश्चात् आप ही हमारे मार्गदर्शन का सबब हैं। अतः जो आपपर दरूद नहीं भेजता, वह आपके प्रति कंजूसी कर रहा है और अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम का एक छोटा सा हक अदा करने में भी कंजूसी कर रहा है।
अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम खाना खाने वाले को अल्लाह की प्रशंसा करने की प्रेरणा दे रहे हैं। क्योंकि अल्लाह के दिए हुए सुयोग एवं मदद के बिना इन्सान के पास न भोजन प्राप्त करने की शक्ति है और न खाने की क्षमता। उसके बाद अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने यह दुआ करने वाले को सुसमाचार सुनाया है कि अल्लाह उसके पिछले छोटे गुनाहों को माफ़ कर देता है।
जिसे अल्लाह का भय हो, वह गुनाहों से दूर रहे और अल्लाह की इबादत में लगा रहे। क्योंकि अल्लाह के पास जो सामान है, वह बड़ा महंगा है। वह सामान दरअसल जन्नत है, जिसका मूल्य जान तथा धन खर्च करना ही हो सकता है।
इस हदीस में अल्लाह के नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने अपने पालनहार की क़सम खाते हुए कहा है कि यदि तुम लोग गुनाह न करो, तो अल्लाह तुम्हारा विनाश कर दे और ऐसे लोगों को ले आए, जो गुनाह करने के बाद सच्ची नीयत और पूरे विश्वास के साथ अल्लाह से क्षमा माँगें, ताकि अल्लाह उन्हें माफ़ कर दे।