Hadeeth Cards
Da'wa cards that highlight great meanings from the noble prophetic hadiths in a simple style and attractive display that helps the Muslim to have a deeper understanding of his religion in an easy way






























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अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम बता रहे हैं कि कोई मुसलमान संपूर्ण ईमान वाला उसी समय हो सकता है, जब वह अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के प्रेम को अपनी माता, पिता, बेटा, बेटी और अन्य सभी लोगों के प्रेम से आगे रखे। यह प्रेम बंदे से चाहता है कि वह उसके आदेशों का पालन करे, उसके पक्ष में खड़ा हो और उसकी अवज्ञा से दूर रहे।
अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम बता रहे हैं कि इन महत्वपूर्ण शब्दों द्वारा अल्लाह का ज़िक्र करना दुनिया और उसकी सारी चीज़ों से बेहतर है। ये शब्द इस प्रकार हैं : "सुबहानल्लाह" : इन शब्दों द्वारा तमाम कमियों से अल्लाह की पाकी बयान की जाती है। "अल-हम्दु लिल्लाह" : अल्लाह की यह प्रशंसा कि वह अपने सारे गुणों में संपूर्ण है। साथ में उससे मोहब्बत तथा उसका सम्मान भी हो। "ला इलाहा इल्लल्लाह" : अल्लाह के सिवा कोई सच्चा पूज्य नहीं है। "अल्लाहु अकबर" : अल्लाह हर चीज़ से बड़ा तथा शक्तिशाली है।
उमर रज़ियल्लाहु अनहु बता रहे हैं कि अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने उनको ऐसा काम करने तथा ऐसी बात कहने से मना किया है, जिसके लिए बिना ज़रूरत मशक़्क़त उठानी पड़े।
अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम की पत्नी उम्म-ए-सलमा रज़ियल्लाहु अनहा के बेटे उमर बिन अबू सलमा रज़ियल्लाहु अनहु, जो कि अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम की परवरिश में थे, वह कहते हैं कि खाते समय उनका हाथ बर्तन के चारों ओर घूमा करता था और जहाँ-तहाँ से खाना उठा लिया करता था, इसलिए अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने उनको खाने के तीन आदाब सिखाए : पहला यह कि खाने से पहले बिस्मिल्लाह कहना चाहिए। दूसरा यह कि दाएँ हाथ से खाना चाहिए। और तीसरा यह कि खाना सामने से खाना चाहिए।
अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम इस बात का आदेश दे रहे हैं कि मुसलमान अपने दाएँ हाथ से खाए और पिए, जबकि इस बात से मना कर रहे हैं कि कोई अपने बाएँ हाथ से खाए और पिए। ऐसा इसलिए कि बाएँ हाथ से खाने और पीने का काम शैतान करता है।
अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के चचा अब्बास बिन अब्दुल मुत्तलिब ने आपसे कोई ऐसी दुआ सिखाने का आग्रह किया, जो वह अल्लाह से माँगा करें। तो आपने सिखाया कि वह अल्लाह से विपत्तियों तथा दीन, दुनिया और आख़िरत की कमियों से सुरक्षा माँगा करें। अब्बास रज़ियल्लाहु अनहु कहते हैं कि कुछ दिनों बाद वह दोबारा उपस्थित हुए और कोई ऐसी दुआ सिखाने का अनुरोध किया, जो अल्लाह से माँगा करें, तो अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने उनसे अपनापन दिखाते हुए फ़रमाया : ऐ अब्बास! ऐ अल्लाह के रसूल के चचा जान! अल्लाह से हर बुराई से छुटकारे, हर अच्छाई की प्राप्ति और दुनिया एवं आख़िरत के फ़ायदे के लिए आफ़ियत माँगा करें।
अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने पुरुषों को हर प्रकार के रेश्मी वस्त्र पहनने से मना किया है। इसी तरह पुरुषों एवं स्त्रियों दोनों को सोने और चाँदी के बर्तनों में खाने और पीने से मना किया है। साथ ही बताया कि यह चीज़ें क़यामत के दिन विशेष रूप से ईमान वालों को नसीब होंगी। क्योंकि वे दुनिया में उनसे अल्लाह के आदेश का पालन करते हुए बचते रहे हैं। जबकि अविश्वासियों को आख़िरत में यह चीज़ें नसीब नहीं होंगी। क्योंकि वे सांसारिक जीवन में अल्लाह के आदेश की अवहेलना करते हुए इन चीज़ों का उपभोग कर लेते हैं।
अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने बताया है कि जिस पुरुष व्यक्ति ने दुनिया में रेशमी वस्त्र पहना और तौबा किए बिना मर गया, वह दंड स्वरूप आख़िरत में उसे पहनने से वंचित रखा जाएगा।
मुआविया बिन अबू सुफ़यान रज़ियल्लाहु अनहुमा मस्जिद में मौजूद लोगों की एक सभा के पास पहुँचे और सभा में मौजूद लोगों से पूछा कि वह किस उद्देश्य से बैठे हुए हैं? लोगों ने जवाब दिया : हम अल्लाह का ज़िक्र करने के लिए बैठे हुए हैं। तब उन्होंने उनको क़सम खाने को कहा कि क्या वाक़ई उनके बैठने और एकत्र होने का उद्देश्य अल्लाह के ज़िक्र के सिवा कुछ और नहीं है? जब उन्होंने क़सम खा ली, तो फ़रमाया : मैंने तुम लोगों को क़सम खाने को इसलिए नहीं कहा कि मैं तुम्हें झूठा समझता हूँ और तुम्हारे सच्चे होने में मुझे संदेह है। फिर उन्होंने बताया कि अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के यहाँ उनको क्या स्थान प्राप्त था। बताया कि उनको आपसे जो निकटता प्राप्त थी, वह किसी और को नहीं थी। क्योंकि उनकी बहन उम्म-ए-हबीबा रज़ियल्लाहु अनहा अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम की पत्नी थीं और खुद वह वह्य लिखने वाले सहाबा में शामिल थे। इसके बावजूद उन्होंने आपसे बहुत कम हदीसें नक़ल की हैं। फिर उन्होंने बताया कि अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम एक दिन घर से निकले, तो देखा कि कुछ सहाबा मस्जिद में बैठकर अल्लाह का ज़िक्र और इस्लाम की राह दिखाने पर उसकी प्रशंसा कर रहे हैं। तब आपने उनसे बैठने का उद्देश्य पूछा और क़सम भी खाने को कहा, जैसा कि मुआविया रज़ियल्लाहु अनहु ने किया था। फिर आपने अपने साथियों को बैठने का सबब पूछने और क़सम खाने को कहने का कारण भी बता दिया। बताया कि आपके पास जिबरील अलैहिस्सलाम आए थे और बता रहे थे कि अल्लाह फ़रिश्तों के सामने उनपर अभिमान एव फ़ख़्र कर रहा है, उनकी फ़ज़ीलत बता रहा है, उनकी प्रशंसा कर रहा है और फ़रिश्तों को उनका अच्छा अमल दिखा रहा है।