Hadeeth Cards
Da'wa cards that highlight great meanings from the noble prophetic hadiths in a simple style and attractive display that helps the Muslim to have a deeper understanding of his religion in an easy way






























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अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने बताया है कि जन्नत में केवल ईमान वाले ही प्रवेश करेंगे, जबकि ईमान के संपूर्ण होने और मुस्लिम समाज के सठीक होने के लिए ज़रूरी है कि लोग एक-दूसरे से मोहब्बत रखें। फिर अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने मोहब्बत आम करने वाली सबसे उत्तम चीज़ बताई। वह चीज़ यह है कि मुसलमानों के बीच सलाम आम किया जाए।
अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने एक भयावह आवाज़ सुनी। ऐसा लगा कि कोई चीज़ ऊपर से नीचे गिरी हो। अपने पास मौजूद सहाबा से उस आवाज़ के बारे में पूछा, तो उन्होंने जवाब दिया कि अल्लाह और उसके रसूल को बेहतर मालूम है। अतः आपने उनसे कहा : जो आवाज़ तुमने सुनी, दरअसल वह एक पत्थर के गिरने की आवाज़ है, जो सत्तर साल पहले जहन्नम के किनारे से उसके अंदर डाला गया था और अब जाकर उसकी तह तक पहुँचा है, जिसकी आवाज़ तुम्हें सुनाई दी।
अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने एक व्यक्ति को बाएँ हाथ से खाना खाते हुए देखा और उसे दाएँ हाथ से खाना खाने का आदेश दिया, तो उसने अभिमान के कारण यह झूठी बात कही कि वह दाहिने हाथ से खाने के शक्ती नहीं रखता। अतः अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने उसके हक़ में बद-दुआ कर दी कि वह कभी दाएँ हाथ से खाना खा न सके और अल्लाह ने अपने नबी की बद-दुआ क़बूल कर ली और उसका दायाँ हाथ बेकार हो गया। चुनांचे वह व्यक्ति फिर कभी अपना हाथ खाने या पीने के लिए अपने मुँह तक ले न जा सका।
इस हदीस में अल्लाह के नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने ज़बान की विनाशता एवं विध्वंसता से सावधान करते हुए बताया है कि एक व्यक्ति ने क़सम खाकर कहा कि अल्लाह अमुक पापी व्यक्ति को क्षमा नहीं करेगा। दरअसल, उसके दिल में यह बात बैठी हुई थी कि अल्लाह के निकट उसे एक विशेष स्थान प्राप्त है और इस पापी की कोई हैसियत नहीं है। इसलिए, एक तरह से उसने अल्लाह के चारों ओर अपने आदेश का घेरा डाल दिया और उसे अपनी बात का पाबंद बनाने का प्रयास किया। चूँकि यह अल्लाह को राह दिखाने का प्रयास और उसके साथ अशिष्टता थी, इसलिए अल्लाह ने उस आदमी के हक़ में दुनिया एवं आखिरत की नाकामी और नामुरादी लिख दी।
यह हदीस बता रही है कि क्यों आदम के एक बेटे को, उसके बाद बहाए जाने वाले हर रक्त के गुनाह का एक भाग उठाना पड़ता है? कहा जाता है कि क़ाबील ने अपने भाई हाबील का द्वेषपूर्ण तरीक़े से वध कर दिया था और वही दोनों भाई आदम की संतान के पहले हत्यारे और पहले हत्या की भेंट चढ़ने वाले थे। चूँकि क़ाबील ने ही किसी की जान लेने की प्रथा की शुरूआत की थी, इसलिए वह अपने बाद बहाए जाने वाले हर रक्त के गुनाह के एक भाग का भागीदार होगा। क्योंकि उसके बाद रक्त बहाने वाला हर व्यक्ति उसी का अनुसरण कर रहा होता है।
अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने हमें बताया है कि कुछ लोग ऐसे भी हैं, जो कोई बात करते समय यह नहीं सोचते कि जो बात वह करने जा रहे हैं, अच्छी है या बुरी? इसका नतीजा यह होता है कि इस तरह बिना सोचे-सझते बात करने वाले अवैध गतिविधियों में पड़ जाते हैं और स्वयं को जहन्नम की यातना के भागीदार बना लेते हैं और कभी-कभी जहन्नम की इतना गहराई में चले जाते हैं, जो सूर्योंदय तथा सूर्यास्त के बीच की दूरी से भी अधिक है।
अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने इस हदीस में बताया है कि जब कोई व्यक्ति घर से निकलते समय कहता है : "باسم الله، توكلت على الله، لا حول ولا قوة إلا بالله" तो एक फ़रिश्ता उसे पुकार कर कहता है कि ऐ अल्लाह के बंदे! तुझे सत्य का मार्ग दिखा दिया गया, तुझे चिंता से मुक्त कर दिया गया और तुझे शत्रुओं से सुरक्षित कर दिया गया। यह सुन उसके साथ लगाया हुआ फ़रिश्ता उससे दूर हो जाता है। अतः एक दूसरा शैतान उस शैतान से कहता है : तुम भला एक ऐसे व्यक्ति को पथभ्रष्ट कैसे कर सकते हो, जिसे सत्य का मार्ग दिखा दिया गया, चिंताओं से मुक्त कर दिया गया और सभी शैतानों से सुरक्षित कर दिया गया? उसके इन शब्दों को पढ़ लेने के बाद तुम्हारी अब दाल नहीं गलने वाली।
अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने 10 हिजरी को हज्जतुलवदा के अवसर पर अरफ़ा के दिन ख़ुतबा दिया। इस हज को हज्जतुलवदा इसलिए कहा जाता है कि इस अवसर पर अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने लोगों को अलवदा कहा। इस अवसर पर आपने तमाम लोगों को आदेश दिया कि अपने रब से डरें, जिसका तरीक़ा यह है कि उसके आदेशों का पालन किया जाए और उसकी मना की हुई चीज़ों से दूर रहा जाए। पाँच वक़्त की नमाज़े पढ़ें, जिन्हें अल्लाह ने दिन एवं रात में फ़र्ज़ किया है। रमज़ान महीने के रोज़े रखें। अपने धन की ज़कात हक़दारों को दें और उसमें कंजूसी न करें। अपने शासकों की बात मानें, जब तक उनका आदेश अल्लाह की अवज्ञा पर आधारित न हो। जिसने इन कामों को किया, उसका प्रतिफल जन्नत में प्रवेश की प्राप्ति है।
अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम इस बात की प्रेरणा दे रहे हैं कि एक मुसलमान जब भी अपने भाई से मिले तो उसे सलाम करे। यहाँ तक कि अगर दोनों साथ चल रहे हों और इसी दौरान बीच में पेड़, दीवार या कोई बड़ा पत्थर आ जाए, तो दोबारा मिलते समय फिर से उसे सलाम करे।