Hadeeth Cards
Da'wa cards that highlight great meanings from the noble prophetic hadiths in a simple style and attractive display that helps the Muslim to have a deeper understanding of his religion in an easy way






























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अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम पुरुषों को सफ़ेद कपड़े पहनने तथा अपने मुर्दों को सफ़ेद कपड़े में कफ़नाने का निर्देश दे रहे हैं। क्योंकि सफ़ेद कपड़े उत्कृष्ट कपड़ों में से हैं।
नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम एक युद्ध के लिए अपने सहाबा, मुहाजिरीन और अंसार (रज़ियल्लाहु अन्हुम) के साथ यात्रा पर थे। इसी बीच, एक मुहाजिर ने एक अंसारी के पुट्ठे पर हाथ से मार दिया। चुनाँचे अंसारी ने पुकारा : ऐ अंसारियो, मेरी मदद करो! और मुहाजिर ने पुकारा : ऐ मुहाजिरो, मेरी मदद करो! जब अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने यह सुना, तो फ़रमाया : यह क्या है? तो लोगों ने बताया कि एक मुहाजिर ने एक अंसारी के पुट्ठे पर हाथ से मारा, तो अंसारी ने अंसारियों को आवाज़ दी, और मुहाजिर ने मुहाजिरों को पुकारा। तो नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फरमाया : इस अज्ञानता काल की आदत को छोड़ दो, क्योंकि यह घिनौनी, नापसंदीदा और तकलीफ़देह है; यानी जब किसी आदमी पर उसका विरोधी हावी हो जाता है, तो वह अपनी क़ौम को पुकारता है और वे अपनी जहालत और पक्षपात के कारण उसकी मदद के लिए दौड़ पड़ते हैं, चाहे वह ज़ालिम हो या मज़लूम। जाबिर रज़ियल्लाहु अन्हु ने फरमाया कि जब नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम हिजरत करके मदीना तशरीफ लाए थे, तो अंसार अधिक थे, फिर बाद में मुहाजिरों की संख्या बढ़ गई। तो मुनाफ़िक़ों के सरदार अब्दुल्लाह बिन उबैइ बिन सलूल ने कहा : क्या मामला इस हद तक पहुँच गया है?! अल्लाह की क़सम, अगर हम मदीना लौटकर गए तो सम्मानित लोग -यानी वह स्वयं और उसके साथी- मदीना से अपमानित लोगों को -अर्थात नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम और उनके साथियों को- निकाल बाहर करेंगे। तो उमर बिन ख़त्ताब रज़ियल्लाहु अन्हु ने कहा : ऐ अल्लाह के रसूल, मुझे इस मुनाफ़िक़ की गर्दन मारने दीजिए। नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फ़रमाया : उसे छोड़ दो, ताकि लोग यह न कहें कि मुहम्मद अपने साथियों को क़त्ल करते हैं, भले ही वह केवल ज़ाहिर में उनका साथी हो।
उम्मुल मोमिनीन आइशा रज़ियल्लाहु अन्हा बताती हैं कि नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के घर वालों ने एक ही दिन में कभी भी दो समय का ऐसा भोजन नहीं किया जिसमें से एक समय का भोजन खजूर न रहा हो।
उम्मुल मोमिनीन आइशा रज़ियल्लाहु अन्हा बताती हैं कि जब से नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के घर वाले मदीना आए, उन्होंने लगातार तीन दिन तक गेहूँ की रोटी पेट भरकर नहीं खाई, यहाँ तक कि आप सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम मृत्यु को प्राप्त हो गए।
उम्मुल मोमिनीन आइशा रज़ियल्लाहु अन्हा ने बताया कि अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम का बिस्तर पकाए हुए (Tanned) चमड़े का था और खजूर की छाल से भरा हुआ था। आपका वह तकिया भी इसी प्रकार का था, जिसपर आप टेक लगाते थे।
नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम की वफ़ात हुई तो आपने न चाँदी का कोई दिरहम छोड़ा, न सोने का कोई दीनार, न कोई लौंडी ग़ुलाम (दासी एवं दास), न कोई बकरी और न कोई ऊँट, और न कोई अन्य प्रकार का धन। छोड़ा तो बस अपना सफ़ेद खच्चर, जिस पर आप सवार होते थे, अपने हथियार, और एक ज़मीन, जिसे अपनी सेहतमंदी में मुसाफ़िरों के लिए वक़्फ़ कर दिया था।
अनस बिन मालिक -रज़ियल्लाहु अनहु- बता रहे हैं कि ऐसा बहुत कम हुआ कि अल्लाह के नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने लोगों को संबोधित किया या उपदेश दिया और यह दो बातें न कहीं : 1- उस व्यक्ति का ईमान संपूर्ण नहीं है, जिसने किसी के साथ धन, प्राण या परिवार के संबंध में ख़यानत की है। 2- उस व्यक्ति का ईमान संपूर्ण नहीं है, जो वादा करके तोड़ देता हो और वादा पूरा न करता हो।
अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम अपने कुछ बैठे हुए साथियों के पास आकर खड़े हुए और उनसे पूछा : क्या मैं तुम्हें यह न बताऊँ कि तुममें सबसे अच्छा कौन है और सबसे बुरा कौन है? लेकिन उनके पास अच्छे और बुरे की पहचान ने होने और रुसवाई के भय से उन्होंने न तो कुछ कहा और न ही कोई जवाब दिया। अतः नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने उनसे तीन बार यही प्रश्न दोहराया, तो उनमें से एक व्यक्ति ने जवाब दिया : जी हाँ, ऐ अल्लाह के रसूल! हमें हमारे अच्छे और बुरे लोगों के बारे में बताइए। चुनांचे अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने उन्हें बताया : तुममें सबसे अच्छा व्यक्ति वह है, जिससे उसकी भलाई, उपकार और नेकी की उम्मीद की जाती हो और जिसकी बुराई से सुरक्षित रहा जाता हो, अतः उसके अत्याचार, दुर्व्यवहार और ज़ुल्म का डर न हो। और तुममें सबसे बुरा व्यक्ति वह है, जिससे उसकी भलाई, उपकार और नेकी की कोई उम्मीद न की जाती हो और जिसकी बुराई से सुरक्षित न रहा जाता हो, बल्कि उसके अत्याचार, दुर्व्यवहार और ज़ुल्म का डर लगा रहे।
अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने बताया है कि जो व्यक्ति लोगों द्वारा किए गए उपकार और भलाई पर उनका शुक्र अदा नहीं करता, वह आम तौर पर अल्लाह का भी शुक्र अदा नहीं करता। ऐसा इसलिए है, क्योंकि ये दोनों मामले एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं। अतः, जिसकी प्रकृति और आदत में लोगों की नेमत की नाशुक्री करना और उनका शुक्र अदा करना छोड़ देना शामिल हो, उसकी आदत में अल्लाह की नेमत की नाशुक्री करना और उसका शुक्र अदा करने में कोताही करना भी शामिल हो जाएगा।