Hadeeth Cards
Da'wa cards that highlight great meanings from the noble prophetic hadiths in a simple style and attractive display that helps the Muslim to have a deeper understanding of his religion in an easy way






























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अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने बताया है कि ऐसे व्यक्ति पर लानत करने वाला, जो लानत का हक़दार नहीं है, दो सज़ाओं का हक़दार है : पहली : वह अपने इस गुनाह के कारण क़यामत के दिन इस बात की गवाही नहीं देगा कि पिछली उम्मतों को उनके रसूलों ने अल्लाह का संदेश पहुँचाया था, दुनिया में भी उसकी गवाही स्वीकार नहीं की जाएगी और उसे अल्लाह की राह में शहादत भी नसीब नहीं होगी। दूसरी : क़यामत के दिन, जब दूसरे मोमिन जहन्नम के हक़दार बन चुके अपने मोमिन भाइयों के बारे में सिफ़ारिश करेंगे, वह सिफ़ारिश नहीं कर सकेगा।
अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम दुआ के दौरान दोनों हाथों को उठाने की प्रेरणा दे रहे हैं और बता रहे हैं कि अल्लाह अत्यधिक हया वाला है। वह देने से गुरेज़ नहीं करता। वह बंदे का दामन ख़ुशियों से भर देता है और उसे हानियों से बचाता है। वह दाता है और बिन माँगे भी देता है, तो भला माँगने के बाद कैसे नहीं देगा? उसे इस बात से हया आती है कि जब कोई मोमिन बंदा उससे कुछ माँगने के लिए हाथ उठाए, तो उसके हाथों को खाली व नामुराद वापस कर दे।
अल्लाह के नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- अपनी पत्नी तथा मुसलमानों की माता जुवैरिया -रज़ियल्लाहु अनहा- के यहाँ से सुबह फ़ज्र की नमाज़ पढ़कर निकले। उस समय वह नमाज़ के स्थान ही में बैठी हुई थीं। जब आप दोपहर के समय वापस आए, तो देखा कि वह उसी जगह बैठी हुई हैं। अतः फ़रमाया : तुम अभी तक उसी अवस्था में हो जिसपर मैं तुमको छोड़ गया था? उन्होंने उत्तर दिया : जी हाँ। उनका उत्तर सुन आपने कहा : मैंने तुम्हारे पास से निकालने के बाद चार शब्द कहे हैं और उन्हें तीन-तीन बार दोहराया है। यदि सवाब के मामले में उनकी तुलना तुम्हारे कहे हुए उन शब्दों से किया जाए जिन्हें तुमने यहाँ बैठकर पूरे समय में कहा है, तो मेरे कहे हुए शब्द भारी साबित हों। वो शब्द इस प्रकार हैं : "سبحان الله" मैैं तमाम दोषों एवं कमियों से अल्लाह की पाकी बयान करता हूँँ, "وبحمده" तथा उसकी प्रशंसा एवं स्तुति करता हूँ, "عدد خلقه" उसकी सृष्टियों की संख्या के बराबर कि जिन्हें अल्लाह के सिवा कोई गिन नहीं सकता, "ورضا نفسه" उसकी प्रसन्नता की प्राप्ति के समान, यानी इतनी कि अल्लाह बंदे से प्रसन्न हो जाए, "وزنة عرشه" उसके अर्श (सिंहासन) के वज़न के बराबर, जो सबसे महान और सबसे भारी सृष्टि है, "ومداد كلماته" और उसकी प्रशंसा के शब्दों को लिखने की स्याही के समान। याद रहे कि अल्लाह की प्रशंसा के शब्द इतने हैं कि न गिने जा सकते हैं और न समाप्त हो सकते हैं। फिर, उसमें उपर्युक्त तीनों प्रकार शामिल भी हैं। क्योंकि की प्रशंसा के शब्दों की स्याही के परिमाण, गुण और संख्या की कोई सीमा नहीं है। लेकिन, यहाँ मुराद प्रचुरता में अतिशयोक्ति लाना है। क्योंकि अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने पहले बहुत बड़ी संख्या में मौजूद सृष्टियों की संख्या का ज़िक्र किया, फिर आगे बढ़ते हुए अल्लाह की प्रसन्नता का ज़िक्र किया और अंत में सबसे बड़ी सृष्टि अर्श के वज़न का ज़िक्र किया। इस तरह पहला वाक्य संख्या एवं मात्रा बयान करने के लिए है, दूसरा वाक्य विशेषता और गुणवत्ता बयान करने के लिए है, जबकि तीसरा वाक्य महानता एवं भारीपन बयान करने के लिए है।
अल्लाह के नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने अल्लाह के ज़िक्र में कोताही करने से मना किया है और बताया है कि जब लोग किसी सभा में बैठे और फिर वहाँ से अल्लाह का ज़िक्र किए और उसके रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- पर दरूद भेजे बिना उठ गए, तो वह सभा क़यामत के दिन उनके लिए खेद, अफ़सोस, हानि और नुक़सान का कारण बनेगी। ऐसे में अगर अल्लाह चाहेगा, तो उनको उनके पिछले गुनाहों और बाद में होने वाली कोताहियों के कारण अज़ाब देगा और अगर चाहेगा तो अपने अनुग्रह से क्षमा कर देगा।
अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने बताया कि लोगों के अंदर दुनिया में आपके सबसे प्रिय और क़यामत के दिन सबसे निकट बैठने वाले लोगों में वह लोग भी शामिल होंगे, जिनका व्यवहार सबसे अच्छा होगा। "الثرثارون" का अर्थ है : बनावट के साथ बहुत ज़्यादा बात करने वाले। "المتشدقون" का अर्थ है : बिना किसी एहतियात के और अपने मुँह मियाँ मिट्ठू बनते हुए बहुत ज़्यादा बात करने वाले। सहाबा ने पूछा : ऐ अल्लाह के रसूल! हम इस हदीस में आए हुए दो शब्दों "الثرثارون" तथा "والمتشدقون" का अर्थ समझ गए, लेकिन यह "المتفيهقون" कौन लोग हैं? आपने उत्तर दिया : लोगों का मज़ाक़ उड़ाने वाले ऐसे लोग, जो बहुत ज़्यादा बातूनी होते हैं।
अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने बताया कि वह व्यक्ति सफल हो गया, जो अपने पालनहार का आज्ञाकारी बन गया, उसे इस्लाम धर्म का पालन करने का सुयोग मिला, आवश्यकता अनुसार हलाल रोज़ी मिल गई तथा अल्लाह के अनुग्रह से उसकी दी हुई नेमतों पर संतुष्ट रहा।
अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने मुसलमानों को संबोधित करते हुए कहा है कि ऐ मुसलमानो! तुममें से जिसने स्वस्थ अवस्था में, बीमारियों से सुरक्षित रहकर तथा अपनी जान, घर-परिवार और रास्ते के बारे में हर प्रकार के भय से मुक्त होकर सुबह की, तथा उसके पास दिन भर के बराबर हलाल भोजन मौजूद हो, तो समझो उसे पूरी दुनिया मिल गई।
अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ऐसी सारगर्भित दुआएँ पसंद करते थे, जो दुनिया एवं आख़िरत की भलाइयों पर सम्मिलित हों, कम शब्दों में अधिक अर्थों को समेटे हुए हों तथा उनके अंदर अल्लाह की प्रेशंसा और सही उद्देश्य निहित हों। जिन दुआओं के अंदर ये विशेषताएँ न हों, उनसे आप गुरेज़ करते थे।
अल्लाह के नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने ख़रीदते बेचते समय क़सम खाने और क़सम का बहुत ज़्यादा प्रयोग करने से मना फ़रमाया है। क़सम चाहे सच्ची ही क्यों न हो। आपने बताया कि इससे सामान तो बिक जाता है, लेकिन क्रय-विक्रय एवं कमाई की बरकत कम और ख़त्म हो जाती है। अल्लाह उसके नष्ट हो जाने की राहें खोल देता है, चोरी द्वारा, या जलने, या डूबने, या हड़पने, या लूटपाट द्वारा, या अन्य दूसरी घटनाओं द्वारा जिनसे उसकी संपत्ति नष्ट हो जाती है।